महिला अपराधों से संबंधित प्रकरणों में प्रायः प्रथम सूचना रिपोर्ट में समुचित धाराओं के अभाव, अनुसंधान की कमियों तथा अभियोजन कार्यवाही के दौरान साक्ष्य एवं साक्षियों के परीक्षण में बरती गई लापरवाही के कारण आरोपियों को संदेह का लाभ प्राप्त होता है, जिसके परिणामस्वरूप न्यायालयों द्वारा दोषमुक्ति के निर्णय पारित किए जाते हैं। इसी गंभीर विषय को दृष्टिगत रखते हुए ।