हल्दीघाटी विजय के 450वें वर्ष पर जयपुर में लगेगी भव्य शिल्प प्रदर्शनी
राज्यपाल माननीय हरीभाऊ बागडे करेंगे उद्घाटन
इसके अलावा प्रदर्शनी राजस्थान सरकार के अनेक मंत्री, विधायक, भाजपा संगठन से जुड़े पदाधिकारी व देश भर के नाम चिन्ह मूर्तिकार भी लेंगे भाग
बाबूलाल भारती एवं महावीर भारती ने बताया कि प्रदर्शनी को लेकर आमजन में है भारी उत्साह
नोहर 13 जून । वीरता, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती (17 जून) एवं हल्दीघाटी युद्ध विजय के 450वें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष्य में जयपुर में एक विशेष शिल्प प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। भारती शिल्पकला प्राइवेट लिमिटेड की ओर से आयोजित ‘हल्दीघाटी विजय स्मृति शिल्प प्रदर्शनी’ का शुभारंभ 14 जून को राजस्थान के राज्यपाल माननीय हरीभाऊ बागडे करेंगे।। यह प्रदर्शनी आगामी तीन से चार दिनों तक आमजन के लिए खुली रहेगी। भारतीय शिल्प कला प्राइवेट लिमिटेड के महावीर भारती ने बताया कि प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर राजस्थान सरकार के अनेक मंत्री संगठन से जुड़े पदाधिकारियों के अलावा अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहेंगे। प्रदेश में देशभर के नामचिन्ह मुर्तिकार भी पहुंचेंगे। दशनाम गोस्वामी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल भारती ने बताया कि प्रदर्शनी को लेकर समस्त तैयारियां पूर्ण कर ली गई है इस प्रदर्शनी को लेकर जयपुर के अलावा पूरे राजस्थान के लोगों में अलग ही उत्साह देखने को मिल रहा है
प्रदर्शनी में महाराणा प्रताप और उनके जीवन से जुड़े प्रमुख योद्धाओं एवं ऐतिहासिक विभूतियों की प्रतिमाओं का दुर्लभ संग्रह प्रदर्शित किया जाएगा। यहां 12 इंच से लेकर 15 फीट तक की आकर्षक प्रतिमाएं देखने को मिलेंगी। इनमें चेतक पर सवार महाराणा प्रताप, हाथी पर सवार महाराणा प्रताप, राणा पूंजा, भामाशाह, हाकिम खान सूरी, अपने पुत्र चंदन का बलिदान देने वाली पन्ना धाय, भक्त शिरोमणि मीरा बाई, महारानी पद्मिनी तथा राणा सांगा की प्रतिमाएं प्रमुख रूप से शामिल हैं।
प्रदर्शनी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सभी प्रतिमाएं प्रख्यात मूर्तिकार नोहर निवासी महावीर भारती द्वारा निर्मित हैं। महाराणा प्रताप की प्रतिमाएं बनाने में पिछले 25 वर्षों से समर्पित महावीर भारती अब तक देश-विदेश में 600 से अधिक प्रतिमाओं का निर्माण कर चुके हैं। विश्वभर में स्थापित महाराणा प्रताप की अधिकांश प्रतिमाएं भारती शिल्पकला द्वारा ही तैयार की गई हैं।
इन प्रतिमाओं ने राजस्थान की गौरवशाली संस्कृति और इतिहास को नई पहचान दिलाई है। वर्तमान में देश के 15 से अधिक राज्यों के साथ-साथ दुबई और मॉरीशस तक में स्थापित इन प्रतिमाओं के माध्यम से महाराणा प्रताप की वीरता और त्याग की गाथा जन-जन तक पहुंच रही है।
आयोजकों का कहना है कि यह प्रदर्शनी मेवाड़ के स्वर्णिम इतिहास, शौर्य, त्याग और बलिदान को एक ही स्थान पर मूर्त रूप में देखने का दुर्लभ अवसर साबित होगी।