सिचौरा गांव निवासी कलावती पत्नी बाबू राम लगभग 40 वर्षों से कच्चे मकान में पन्नी डालकर रहने को मजबूर है। महिला बताती है कि पति कि मौत के बाद वह लकडिया बीनकर अपना पेट पाल रही है और सरकारी योजनों से वंचित है। महिला ने रविवार समय तकरीबन 4 बजे मीडिया से वार्ता कर जानकारी दी कि उसे सरकार से मिलने वाली किसी भी योजना का लाभ आज तक नहीं मिला है।