राहत दिलाने के लिए लगाया गया क्यू मैनेजमेंट सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है। लाखों रुपए खर्च कर शुरू की गई टोकन व्यवस्था अब सिर्फ कागजों में सिमटकर रह गई है। टोकन जारी करने वाली मशीन कमरे में बंद पड़ी है, जबकि विभिन्न विभागों में लगाए गए इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं। नतीजतन मरीजों को पर्चा बनवाने, डॉक्टर को दिखाने और दवा लेने के लिए तीन-ती