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बड़वानी: कुत्तों के हमले में महिला की मौत के मामले में भाजपा पुर्व पार्षद राकेश मकवाना ओर सिविल सर्जन श्री मनोज खन्ना

Barwani, Barwani | Jun 13, 2026

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नशे से दूरी है जरूरी 2.0 अभियान बना मिसाल, बड़वानी पुलिस का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज
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जिले के 16,700 ड्राइंग शीट्स पर चित्रकला एवं स्लोगन लेखन के माध्यम से दिया गया नशामुक्ति का संदेश
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बावनगजा में आयोजित समारोह में वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स टीम ने पुलिस अधीक्षक श्री पद्मविलोचन शुक्ल को मेडल एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया
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बच्चों की रचनात्मक अभिव्यक्ति ने बड़वानी पुलिस की नशामुक्ति मुहिम को दिलाई वैश्विक पहचान
बड़वानी 28 जुलाई 2026/मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेशभर में संचालित नशे से दूरी है जरूरी 2.0 अभियान के अंतर्गत पुलिस अधीक्षक ’श्री पद्मविलोचन शुक्ल’ के निर्देशन में बड़वानी पुलिस द्वारा जिले के विभिन्न शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की सहभागिता से नशामुक्ति विषय पर चित्रकला एवं स्लोगन लेखन गतिविधियों का व्यापक आयोजन किया गया। अभियान के दौरान विद्यार्थियों द्वारा 16,700 ड्राइंग शीट्स पर नशामुक्ति विषयक चित्र एवं स्लोगन तैयार कर जन-जन तक नशामुक्ति का संदेश पहुंचाया गया। इस अभिनव एवं रचनात्मक पहल के फलस्वरूप बड़वानी पुलिस का नाम ’वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज हुआ, जो जिले, निमाड़ अंचल एवं मध्य प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।
 अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करते हुए चित्रकला एवं स्लोगन लेखन जैसी रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से नशामुक्त समाज के निर्माण में सहभागी बनाना था। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी सृजनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से जन-जन तक नशामुक्ति का प्रभावी संदेश पहुंचाया। बड़वानी पुलिस की इस अभिनव पहल ने जनसहभागिता आधारित सामाजिक जागरूकता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसके परिणामस्वरूप इस अभियान को वैश्विक स्तर पर पहचान प्राप्त हुई।
 बावनगजा में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स टीम द्वारा पुलिस अधीक्षक ’श्री पद्मविलोचन शुक्ल’ को मेडल एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स टीम ने बड़वानी पुलिस द्वारा संचालित इस अभिनव जनजागरूकता अभियान की सराहना करते हुए इसे सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में एक अनुकरणीय एवं प्रेरणादायी पहल बताया।
 इस अवसर पर ’श्री राजेश शुक्ला’ ने कहा कि बड़वानी पुलिस द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम जिले का अभूतपूर्व आयोजन है, जिसकी जितनी सराहना की जाए उतनी कम है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे बच्चों को नशे से दूर रहने का संदेश केवल भाषणों के माध्यम से नहीं दिया गया, बल्कि चित्रकला एवं स्लोगन लेखन जैसी रचनात्मक गतिविधियों से अभियान का सक्रिय सहभागी बनाया गया। इससे बच्चे नशे के दुष्प्रभावों से परिचित हुए और समाज में नशामुक्ति का प्रभावी संदेश प्रसारित हुआ। उन्होंने कहा कि इस अभिनव पहल का ’वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज होना पूरे बड़वानी जिले, निमाड़ अंचल एवं मध्य प्रदेश के लिए गौरव की बात है।
 पुलिस अधीक्षक ’श्री पद्मविलोचन शुक्ल’ ने बताया कि ’नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान के अंतर्गत बड़वानी पुलिस द्वारा जिले के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों से लगभग ’16,700 ड्राइंग शीट्स’ पर नशामुक्ति विषयक चित्र एवं स्लोगन तैयार कराए गए। इस अभियान में बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से नशामुक्ति का प्रभावी संदेश दिया। उन्होंने वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि टीम द्वारा बड़वानी पुलिस की इस पहल को मान्यता प्रदान करते हुए मेडल एवं प्रमाण-पत्र देकर जिले को गौरवान्वित किया गया है।
 ’वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन’ के चार्टर्ड ऑफिसर ’श्री राजीव श्रीवास्तव’ ने कहा कि नशे से दूरी 2.0 अभियान के तहत किए जा रहे प्रयासों से समाज में निरंतर जनजागरूकता बढ़ रही है तथा लोगों की सहभागिता भी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अभियान का दायरा और प्रभाव दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बड़वानी पुलिस द्वारा संचालित इस अभिनव जनजागरूकता अभियान को देखते हुए इसे वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। उन्होंने बड़वानी पुलिस को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर शुभकामनाएं देते हुए भविष्य में भी ऐसे जनहितकारी एवं नवाचारपूर्ण अभियान निरंतर संचालित करते रहने की अपेक्षा व्यक्त की।
 कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री धीरज बब्बर, डीएसपी महिला सुरक्षा/एसडीओपी बड़वानी  श्री महेश सुनैया, एसडीओपी सेंधवा श्री अजय वाघमारे, डीएसपी श्री चेतनसिंह बघेल, रक्षित निरीक्षक उषा सिसोदिया यातायात प्रभारी श्रीमती रजनी भार्गव सूबेदार अलका वास्केल थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक श्री बलजीतसिंह बिसेन,  थाना प्रभारी सेंधवा ग्रामीण ओमप्रकाश चांगोड थाना प्रभारी अंजड़ आर आर चौहान
थाना प्रभारी पलसूद विक्रम बामनिया थाना प्रभारी वरला नारायण रावल थाना प्रभारी सिलावद निरीक्षक श्री रामकृष्ण लोहवंशी, थाना प्रभारी पाटी रामदास यादव सहित पुलिस विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी व जिन बच्चों द्वारा नशे से दूरी है जरूरी 2.0 अभियान में भाग लिया है उन्हें पुरस्कार भी किया गया स्कूली छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
#JansamparkMP
#Badwani
@topfans

नशे से दूरी है जरूरी 2.0 अभियान बना मिसाल, बड़वानी पुलिस का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज ............................ जिले के 16,700 ड्राइंग शीट्स पर चित्रकला एवं स्लोगन लेखन के माध्यम से दिया गया नशामुक्ति का संदेश ....................... बावनगजा में आयोजित समारोह में वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स टीम ने पुलिस अधीक्षक श्री पद्मविलोचन शुक्ल को मेडल एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया ................... बच्चों की रचनात्मक अभिव्यक्ति ने बड़वानी पुलिस की नशामुक्ति मुहिम को दिलाई वैश्विक पहचान बड़वानी 28 जुलाई 2026/मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेशभर में संचालित नशे से दूरी है जरूरी 2.0 अभियान के अंतर्गत पुलिस अधीक्षक ’श्री पद्मविलोचन शुक्ल’ के निर्देशन में बड़वानी पुलिस द्वारा जिले के विभिन्न शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की सहभागिता से नशामुक्ति विषय पर चित्रकला एवं स्लोगन लेखन गतिविधियों का व्यापक आयोजन किया गया। अभियान के दौरान विद्यार्थियों द्वारा 16,700 ड्राइंग शीट्स पर नशामुक्ति विषयक चित्र एवं स्लोगन तैयार कर जन-जन तक नशामुक्ति का संदेश पहुंचाया गया। इस अभिनव एवं रचनात्मक पहल के फलस्वरूप बड़वानी पुलिस का नाम ’वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज हुआ, जो जिले, निमाड़ अंचल एवं मध्य प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करते हुए चित्रकला एवं स्लोगन लेखन जैसी रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से नशामुक्त समाज के निर्माण में सहभागी बनाना था। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी सृजनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से जन-जन तक नशामुक्ति का प्रभावी संदेश पहुंचाया। बड़वानी पुलिस की इस अभिनव पहल ने जनसहभागिता आधारित सामाजिक जागरूकता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसके परिणामस्वरूप इस अभियान को वैश्विक स्तर पर पहचान प्राप्त हुई। बावनगजा में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स टीम द्वारा पुलिस अधीक्षक ’श्री पद्मविलोचन शुक्ल’ को मेडल एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स टीम ने बड़वानी पुलिस द्वारा संचालित इस अभिनव जनजागरूकता अभियान की सराहना करते हुए इसे सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में एक अनुकरणीय एवं प्रेरणादायी पहल बताया। इस अवसर पर ’श्री राजेश शुक्ला’ ने कहा कि बड़वानी पुलिस द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम जिले का अभूतपूर्व आयोजन है, जिसकी जितनी सराहना की जाए उतनी कम है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे बच्चों को नशे से दूर रहने का संदेश केवल भाषणों के माध्यम से नहीं दिया गया, बल्कि चित्रकला एवं स्लोगन लेखन जैसी रचनात्मक गतिविधियों से अभियान का सक्रिय सहभागी बनाया गया। इससे बच्चे नशे के दुष्प्रभावों से परिचित हुए और समाज में नशामुक्ति का प्रभावी संदेश प्रसारित हुआ। उन्होंने कहा कि इस अभिनव पहल का ’वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज होना पूरे बड़वानी जिले, निमाड़ अंचल एवं मध्य प्रदेश के लिए गौरव की बात है। पुलिस अधीक्षक ’श्री पद्मविलोचन शुक्ल’ ने बताया कि ’नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान के अंतर्गत बड़वानी पुलिस द्वारा जिले के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों से लगभग ’16,700 ड्राइंग शीट्स’ पर नशामुक्ति विषयक चित्र एवं स्लोगन तैयार कराए गए। इस अभियान में बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से नशामुक्ति का प्रभावी संदेश दिया। उन्होंने वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि टीम द्वारा बड़वानी पुलिस की इस पहल को मान्यता प्रदान करते हुए मेडल एवं प्रमाण-पत्र देकर जिले को गौरवान्वित किया गया है। ’वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन’ के चार्टर्ड ऑफिसर ’श्री राजीव श्रीवास्तव’ ने कहा कि नशे से दूरी 2.0 अभियान के तहत किए जा रहे प्रयासों से समाज में निरंतर जनजागरूकता बढ़ रही है तथा लोगों की सहभागिता भी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अभियान का दायरा और प्रभाव दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बड़वानी पुलिस द्वारा संचालित इस अभिनव जनजागरूकता अभियान को देखते हुए इसे वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। उन्होंने बड़वानी पुलिस को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर शुभकामनाएं देते हुए भविष्य में भी ऐसे जनहितकारी एवं नवाचारपूर्ण अभियान निरंतर संचालित करते रहने की अपेक्षा व्यक्त की। कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री धीरज बब्बर, डीएसपी महिला सुरक्षा/एसडीओपी बड़वानी श्री महेश सुनैया, एसडीओपी सेंधवा श्री अजय वाघमारे, डीएसपी श्री चेतनसिंह बघेल, रक्षित निरीक्षक उषा सिसोदिया यातायात प्रभारी श्रीमती रजनी भार्गव सूबेदार अलका वास्केल थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक श्री बलजीतसिंह बिसेन, थाना प्रभारी सेंधवा ग्रामीण ओमप्रकाश चांगोड थाना प्रभारी अंजड़ आर आर चौहान थाना प्रभारी पलसूद विक्रम बामनिया थाना प्रभारी वरला नारायण रावल थाना प्रभारी सिलावद निरीक्षक श्री रामकृष्ण लोहवंशी, थाना प्रभारी पाटी रामदास यादव सहित पुलिस विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी व जिन बच्चों द्वारा नशे से दूरी है जरूरी 2.0 अभियान में भाग लिया है उन्हें पुरस्कार भी किया गया स्कूली छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में मौजूद रहे। #JansamparkMP #Badwani @topfans

Barwani, Madhya Pradesh | Jul 28, 2026

Barwani, Barwani | Jul 28, 2026

सिविल डिफेंस स्वयंसेवको को दिया जा रहा है प्रशिक्षण
बड़वानी 27 जुलाई 2026/जिला दण्डाधिकारी एवं नियंत्रक नागरिक सुरक्षा जिला बडवानी द्वारा दिये गये निर्देशों के पालन में सात दिवसीय 150 सिविल डिफेंस स्वंयसेवक प्रशिक्षण के तीसरे दिन प्रशिक्षणार्थियों को श्री मुकेश मीणा, कंपनी कमाण्डर एवं एस.डी.ई.आर.एफ. टीम द्वारा सी.पी.आर. चॉकिंग एवं एम.एफ.आर. किसी भी आपातकालीन घटना में सर्वप्रथम घायलों का उपचार कैस करे एवं उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाना आदि सिखाया गया। श्री शरदचन्द्र राय, जिला सेनानी द्वारा देश में बढ़ रही सायबर ठगी से बचने हेतु आवश्यक उपाय बताये गये जिसमें कोई भी अपनी पर्सनल डिटेल्स की जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति को साझा नही करें आदि महत्वपूर्ण बाते बताई गई।
#JansamparkMP
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सिविल डिफेंस स्वयंसेवको को दिया जा रहा है प्रशिक्षण बड़वानी 27 जुलाई 2026/जिला दण्डाधिकारी एवं नियंत्रक नागरिक सुरक्षा जिला बडवानी द्वारा दिये गये निर्देशों के पालन में सात दिवसीय 150 सिविल डिफेंस स्वंयसेवक प्रशिक्षण के तीसरे दिन प्रशिक्षणार्थियों को श्री मुकेश मीणा, कंपनी कमाण्डर एवं एस.डी.ई.आर.एफ. टीम द्वारा सी.पी.आर. चॉकिंग एवं एम.एफ.आर. किसी भी आपातकालीन घटना में सर्वप्रथम घायलों का उपचार कैस करे एवं उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाना आदि सिखाया गया। श्री शरदचन्द्र राय, जिला सेनानी द्वारा देश में बढ़ रही सायबर ठगी से बचने हेतु आवश्यक उपाय बताये गये जिसमें कोई भी अपनी पर्सनल डिटेल्स की जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति को साझा नही करें आदि महत्वपूर्ण बाते बताई गई। #JansamparkMP #Badwani

Barwani, Madhya Pradesh | Jul 27, 2026

दिव्यांगजनों एवं वृद्धजनों के लिए निःशुल्क परीक्षण व सहायक उपकरण चिन्हांकन शिविर आयोजित
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एडीप योजना के तहत 295 हितग्राहियों का हुआ पंजीयन, मौके पर ही 26 कैलीपर्स वितरित
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12 दिव्यांगजनों को रोजगार हेतु चुना
बड़वानी 27 जुलाई 2026/कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह के निर्देशानुसार आज जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र, बड़वानी में सामाजिक न्याय विभाग और एलिम्को उज्जैन के संयुक्त तत्वावधान में एडीप योजना के तहत दिव्यांगजनों एवं वृद्धजनों के लिए हाथ-पैर, कैलीपर्स, कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरणों के चिन्हांकन हेतु निःशुल्क शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का निरीक्षण एसडीएम बड़वानी श्री भूपेंद्र रावत, जनपद पंचायत सीईओ श्री एम.एल. काग तथा सामाजिक न्याय विभाग के उपसंचालक श्री रोनक सोलंकी द्वारा किया गया, जहाँ अधिकारियों ने व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए हितग्राहियों से संवाद किया।
शिविर के दौरान कुल 295 हितग्राहियों का पंजीयन किया गया, जिनमें 97 दिव्यांगजनों तथा 26 वृद्धजनों का सहायक उपकरणों हेतु चिन्हांकन हुआ। इसके साथ ही मौके पर ही 26 पात्र हितग्राहियों को कैलीपर्स का वितरण किया गया, जबकि 160 आवेदकों के यूडीआईडी कार्ड पंजीयन एवं 20 हितग्राहियों के मेडिकल प्रमाण पत्र बनाने की कार्यवाही पूर्ण की गई। शिविर में इंदौर की संस्था डॉ. रेड्डीज फाउंडेशन की सुश्री स्वाति गौर द्वारा 12 दिव्यांगजनों का चयन रोजगार हेतु किया गया। इस अवसर पर जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र, जनपद पंचायत तथा नगरीय निकायों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
#JansamparkMP
#Badwani

दिव्यांगजनों एवं वृद्धजनों के लिए निःशुल्क परीक्षण व सहायक उपकरण चिन्हांकन शिविर आयोजित ------- एडीप योजना के तहत 295 हितग्राहियों का हुआ पंजीयन, मौके पर ही 26 कैलीपर्स वितरित ----- 12 दिव्यांगजनों को रोजगार हेतु चुना बड़वानी 27 जुलाई 2026/कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह के निर्देशानुसार आज जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र, बड़वानी में सामाजिक न्याय विभाग और एलिम्को उज्जैन के संयुक्त तत्वावधान में एडीप योजना के तहत दिव्यांगजनों एवं वृद्धजनों के लिए हाथ-पैर, कैलीपर्स, कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरणों के चिन्हांकन हेतु निःशुल्क शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का निरीक्षण एसडीएम बड़वानी श्री भूपेंद्र रावत, जनपद पंचायत सीईओ श्री एम.एल. काग तथा सामाजिक न्याय विभाग के उपसंचालक श्री रोनक सोलंकी द्वारा किया गया, जहाँ अधिकारियों ने व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए हितग्राहियों से संवाद किया। शिविर के दौरान कुल 295 हितग्राहियों का पंजीयन किया गया, जिनमें 97 दिव्यांगजनों तथा 26 वृद्धजनों का सहायक उपकरणों हेतु चिन्हांकन हुआ। इसके साथ ही मौके पर ही 26 पात्र हितग्राहियों को कैलीपर्स का वितरण किया गया, जबकि 160 आवेदकों के यूडीआईडी कार्ड पंजीयन एवं 20 हितग्राहियों के मेडिकल प्रमाण पत्र बनाने की कार्यवाही पूर्ण की गई। शिविर में इंदौर की संस्था डॉ. रेड्डीज फाउंडेशन की सुश्री स्वाति गौर द्वारा 12 दिव्यांगजनों का चयन रोजगार हेतु किया गया। इस अवसर पर जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र, जनपद पंचायत तथा नगरीय निकायों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। #JansamparkMP #Badwani

Barwani, Madhya Pradesh | Jul 27, 2026

गुरु पूर्णिमा विशेषः शिक्षा को बनाया जीवन परिवर्तन का माध्यम, ड्रॉपआउट बच्चों से लेकर जिले की प्रावीण्य सूची तक रची सफलता की नई कहानी
बड़वानी 27 जुलाई 2026/गुरु पूर्णिमा केवल गुरु के सम्मान का पर्व नहीं, बल्कि समाज और विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले शिक्षकों के योगदान को नमन करने का अवसर भी है। इसी क्रम में आज हम एक आदर्श गुरु के विषय में जानेंगे।  शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भवती के कृषि शिक्षक शफीक शेख ऐसे शिक्षकों में हैं जो केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व का निर्माण का भी जिम्मा उठाते हैं। शिक्षा को व्यवहार, अनुशासन और जीवन मूल्यों से जोड़ते हैं। हर विद्यार्थी में निहित क्षमता का अपने मार्गदर्शन से उन्नयन करते हैं । कमजोर और पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को नई उम्मीद देकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़कर उनका भविष्य संवार देते हैं। पुस्तकों से बाहर वास्तविक जीवन दर्शन और प्रकृति से जोड़कर सिखाने जैसे कार्यों ने उन्हे आदर्श शिक्षक बना दिया ।
 शिक्षक जीवन की शुरुआत से ही उन्होंने बच्चों में स्वच्छता के संस्कार विकसित करने का संकल्प लिया। विद्यार्थियों को व्यक्तिगत स्वच्छता, विद्यालय की स्वच्छता और अध्ययन सामग्री को व्यवस्थित रखने के लिए प्रेरित किया। वे बच्चों से कहते हैं स्वच्छ मन में ही स्वच्छ विचार आते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी समझाया कि यदि हमारी कॉपियाँ साफ-सुथरी, सुंदर और व्यवस्थित होंगी तो उन्हें पढ़ने का मन करेगा और उसका सकारात्मक प्रभाव परीक्षा परिणामों पर भी दिखाई देगा। धीरे-धीरे यह प्रयास विद्यालय की संस्कृति का हिस्सा बन गया।
 उनका दृढ़ विश्वास है कि हर बच्चा सीख सकता है और हर बच्चा सीखना चाहता है, बस सीखने की गति अलग-अलग होती है। इसी सोच के साथ उन्होंने प्रत्येक विद्यार्थी की क्षमता के अनुरूप शिक्षण कार्य किया तथा पीयर लर्निंग को बढ़ावा दिया, जिससे विद्यार्थी एक-दूसरे के सहयोग से सीखते हुए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें। उनके कार्यों का सबसे प्रेरणादायक पक्ष ड्रॉपआउट एवं शिक्षा से वंचित बच्चों को पुनः विद्यालय से जोड़ने का अभियान रहा। उन्होंने स्वयं घर-घर जाकर अभिभावकों से संवाद किया, बच्चों की परिस्थितियों को समझा और उन्हें पुनः विद्यालय में प्रवेश दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए। कई ऐसे बच्चे, जिन्होंने किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ दी थी, आज नियमित रूप से विद्यालय में अध्ययन कर रहे हैं। उनके लिए विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि नए जीवन की शुरुआत का माध्यम बन सका। कृषि शिक्षक होने के कारण उन्होंने शिक्षा को पूरी तरह व्यावहारिक स्वरूप दिया। बच्चों को केवल कक्षा में पढ़ाने के बजाय खेतों, विद्यालय परिसर, पेड़-पौधों और प्राकृतिक वातावरण में ले जाकर प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से कृषि शिक्षा प्रदान की। फसल उत्पादन, पौधों की पहचान, कृषि क्रियाओं तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों को व्यवहारिक रूप से सीखने का अवसर दिया। इससे विद्यार्थियों में कृषि के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सीखने के प्रति उत्साह विकसित हुआ।
 विद्यालय परिसर में पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी उन्होंने अनेक उल्लेखनीय कार्य किए। वृक्षारोपण, पौधों के संरक्षण, हरित परिसर निर्माण, जैव विविधता के प्रति जागरूकता तथा पर्यावरणीय गतिविधियों में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कराकर उन्होंने प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित की। उन्होंने विद्यालय में पुस्तकालय की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण को भी विशेष प्राथमिकता दी। उनका विश्वास है कि पुस्तकालय केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और विचारों के विकास का आधार है। उन्होंने बच्चों में नियमित पठन-पाठन की आदत विकसित करने, पुस्तकालय के अधिकतम उपयोग तथा पुस्तकों के माध्यम से स्वाध्याय की संस्कृति को बढ़ावा दिया। आज विद्यालय का पुस्तकालय विद्यार्थियों के लिए ज्ञान, जिज्ञासा और आत्मविकास का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। उन्होंने विद्यार्थियों को केवल बोर्ड परीक्षा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि कैरियर मार्गदर्शन को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाया। समय-समय पर कैरियर काउंसलिंग, प्रतियोगी परीक्षाओं की जानकारी, उच्च शिक्षा के अवसर तथा विभिन्न क्षेत्रों में संभावनाओं से विद्यार्थियों को परिचित कराया। इसका परिणाम यह रहा कि विद्यालय के अनेक विद्यार्थी बिना किसी कोचिंग के प्रथम प्रयास में पीएटी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होकर कृषि एवं उद्यानिकी महाविद्यालयों में प्रवेश प्राप्त कर अध्ययन कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में अध्ययन करने वाले विद्यार्थी जिले की प्रावीण्य सूची में भी अपनी पहचान स्थापित कर रहे हैं। पिछले चार वर्षों से उनका परीक्षा परिणाम लगातार 100 प्रतिशत रहा है, जो उनकी प्रभावी शिक्षण शैली और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने विद्यालय में नवाचार आधारित अनेक शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन किया तथा आधुनिक तकनीक को भी शिक्षण से जोड़ा। गतिविधि-आधारित शिक्षण, डिजिटल संसाधनों, व्यवहारिक शिक्षा और नवाचारों के माध्यम से उन्होंने विद्यार्थियों में सीखने की जिज्ञासा को निरंतर बढ़ाया। उनका उद्देश्य हमेशा यही रहा कि विद्यालय का प्रत्येक बच्चा आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को साकार कर सके।
 गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर शफीक शेख की यह यात्रा केवल एक शिक्षक की उपलब्धि नहीं, बल्कि इस विश्वास का सशक्त उदाहरण है कि यदि शिक्षक संवेदनशीलता, समर्पण और नवाचार के साथ कार्य करे तो वह केवल विद्यार्थियों को शिक्षित नहीं करता, बल्कि परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी बदल सकता है। उनके लिए शिक्षा का अर्थ केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि हर बच्चे को उसकी क्षमता पहचानने, आत्मविश्वास देने और जीवन में आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना है। यही सच्चे गुरु की पहचान है और यही उनकी सफलता की सबसे बड़ी कहानी है।

मेरे गुरु, मेरी प्रेरणा 
पूर्व विद्यार्थियों की जुबानी

धर्मेंद्र डावर
वर्तमान में उद्यानिकी महाविद्यालय, रेहली (सागर) में अध्ययनरत
शफीक सर ने हमारी पीएटी परीक्षा की तैयारी केवल परीक्षा के कुछ महीने पहले नहीं, बल्कि कक्षा 11वीं से ही शुरू करवा दी थी। विषय की गहरी समझ के साथ नियमित अभ्यास कराया। पीएटी का फॉर्म भरने से लेकर काउंसलिंग, कॉलेज चयन और प्रवेश प्रक्रिया तक हर कदम पर उन्होंने हमारा मार्गदर्शन किया। आज मैं उद्यानिकी महाविद्यालय में अध्ययन कर रहा हूँ तो इसमें सर के निरंतर सहयोग और विश्वास की महत्वपूर्ण भूमिका है।

कु. पूजा इस्के
वर्तमान में कृषि महाविद्यालय, गंजबासौदा में अध्ययनरत
षशफीक सर हमारे लिए केवल शिक्षक नहीं, बल्कि एक अभिभावक की तरह रहे। विद्यालय में पढ़ाई से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, काउंसलिंग, प्रवेश प्रक्रिया और महाविद्यालय में प्रवेश मिलने के बाद भी उन्होंने हर पड़ाव पर हमारा मार्गदर्शन और सहयोग किया। उनका स्नेह, अनुशासन और प्रेरणा ही हमें निरंतर आगे बढ़ने की शक्ति देती है।

विष्णु बड़ोले
वर्तमान में उद्यानिकी महाविद्यालय, छिंदवाड़ा में अध्ययनरत
कक्षा 10वीं के बाद एक समय ऐसा आया जब परिस्थितियों के कारण नियमित अध्ययन पर ब्रेक लग सकता था। तभी शफीक सर स्वयं मेरे घर आए और उन्होंने मुझे रुक जाना नहीं परीक्षा के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने मुझे पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया और विश्वास दिलाया कि मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। उनके मार्गदर्शन और प्रोत्साहन की बदौलत मैं अपनी पढ़ाई नियमित रूप से जारी रख सका और आज उद्यानिकी महाविद्यालय में अध्ययन कर रहा हूँ।
 प्राचार्य श्री असलम खान के अनुसार शिक्षक शफीक शेख सच्ची निष्ठा और समर्पण के साथ बच्चों का भविष्य निखारने हेतु सतत प्रयासरत रहते है। विद्यार्थियों के व्यवहार और परीक्षाफल में उनकी मेहनत की झलक साफ दिखाई देती है। इस गुरुपूर्णिमा पर हम उनका सम्मान करने जा रहे हैं और ऐसे प्रेरणादायी शिक्षक का गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सम्मान करना पूरे विद्यालय परिवार के लिए गर्व और सम्मान का विषय है।
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गुरु पूर्णिमा विशेषः शिक्षा को बनाया जीवन परिवर्तन का माध्यम, ड्रॉपआउट बच्चों से लेकर जिले की प्रावीण्य सूची तक रची सफलता की नई कहानी बड़वानी 27 जुलाई 2026/गुरु पूर्णिमा केवल गुरु के सम्मान का पर्व नहीं, बल्कि समाज और विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले शिक्षकों के योगदान को नमन करने का अवसर भी है। इसी क्रम में आज हम एक आदर्श गुरु के विषय में जानेंगे। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भवती के कृषि शिक्षक शफीक शेख ऐसे शिक्षकों में हैं जो केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व का निर्माण का भी जिम्मा उठाते हैं। शिक्षा को व्यवहार, अनुशासन और जीवन मूल्यों से जोड़ते हैं। हर विद्यार्थी में निहित क्षमता का अपने मार्गदर्शन से उन्नयन करते हैं । कमजोर और पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को नई उम्मीद देकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़कर उनका भविष्य संवार देते हैं। पुस्तकों से बाहर वास्तविक जीवन दर्शन और प्रकृति से जोड़कर सिखाने जैसे कार्यों ने उन्हे आदर्श शिक्षक बना दिया । शिक्षक जीवन की शुरुआत से ही उन्होंने बच्चों में स्वच्छता के संस्कार विकसित करने का संकल्प लिया। विद्यार्थियों को व्यक्तिगत स्वच्छता, विद्यालय की स्वच्छता और अध्ययन सामग्री को व्यवस्थित रखने के लिए प्रेरित किया। वे बच्चों से कहते हैं स्वच्छ मन में ही स्वच्छ विचार आते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी समझाया कि यदि हमारी कॉपियाँ साफ-सुथरी, सुंदर और व्यवस्थित होंगी तो उन्हें पढ़ने का मन करेगा और उसका सकारात्मक प्रभाव परीक्षा परिणामों पर भी दिखाई देगा। धीरे-धीरे यह प्रयास विद्यालय की संस्कृति का हिस्सा बन गया। उनका दृढ़ विश्वास है कि हर बच्चा सीख सकता है और हर बच्चा सीखना चाहता है, बस सीखने की गति अलग-अलग होती है। इसी सोच के साथ उन्होंने प्रत्येक विद्यार्थी की क्षमता के अनुरूप शिक्षण कार्य किया तथा पीयर लर्निंग को बढ़ावा दिया, जिससे विद्यार्थी एक-दूसरे के सहयोग से सीखते हुए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें। उनके कार्यों का सबसे प्रेरणादायक पक्ष ड्रॉपआउट एवं शिक्षा से वंचित बच्चों को पुनः विद्यालय से जोड़ने का अभियान रहा। उन्होंने स्वयं घर-घर जाकर अभिभावकों से संवाद किया, बच्चों की परिस्थितियों को समझा और उन्हें पुनः विद्यालय में प्रवेश दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए। कई ऐसे बच्चे, जिन्होंने किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ दी थी, आज नियमित रूप से विद्यालय में अध्ययन कर रहे हैं। उनके लिए विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि नए जीवन की शुरुआत का माध्यम बन सका। कृषि शिक्षक होने के कारण उन्होंने शिक्षा को पूरी तरह व्यावहारिक स्वरूप दिया। बच्चों को केवल कक्षा में पढ़ाने के बजाय खेतों, विद्यालय परिसर, पेड़-पौधों और प्राकृतिक वातावरण में ले जाकर प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से कृषि शिक्षा प्रदान की। फसल उत्पादन, पौधों की पहचान, कृषि क्रियाओं तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों को व्यवहारिक रूप से सीखने का अवसर दिया। इससे विद्यार्थियों में कृषि के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सीखने के प्रति उत्साह विकसित हुआ। विद्यालय परिसर में पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी उन्होंने अनेक उल्लेखनीय कार्य किए। वृक्षारोपण, पौधों के संरक्षण, हरित परिसर निर्माण, जैव विविधता के प्रति जागरूकता तथा पर्यावरणीय गतिविधियों में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कराकर उन्होंने प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित की। उन्होंने विद्यालय में पुस्तकालय की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण को भी विशेष प्राथमिकता दी। उनका विश्वास है कि पुस्तकालय केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और विचारों के विकास का आधार है। उन्होंने बच्चों में नियमित पठन-पाठन की आदत विकसित करने, पुस्तकालय के अधिकतम उपयोग तथा पुस्तकों के माध्यम से स्वाध्याय की संस्कृति को बढ़ावा दिया। आज विद्यालय का पुस्तकालय विद्यार्थियों के लिए ज्ञान, जिज्ञासा और आत्मविकास का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। उन्होंने विद्यार्थियों को केवल बोर्ड परीक्षा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि कैरियर मार्गदर्शन को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाया। समय-समय पर कैरियर काउंसलिंग, प्रतियोगी परीक्षाओं की जानकारी, उच्च शिक्षा के अवसर तथा विभिन्न क्षेत्रों में संभावनाओं से विद्यार्थियों को परिचित कराया। इसका परिणाम यह रहा कि विद्यालय के अनेक विद्यार्थी बिना किसी कोचिंग के प्रथम प्रयास में पीएटी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होकर कृषि एवं उद्यानिकी महाविद्यालयों में प्रवेश प्राप्त कर अध्ययन कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में अध्ययन करने वाले विद्यार्थी जिले की प्रावीण्य सूची में भी अपनी पहचान स्थापित कर रहे हैं। पिछले चार वर्षों से उनका परीक्षा परिणाम लगातार 100 प्रतिशत रहा है, जो उनकी प्रभावी शिक्षण शैली और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने विद्यालय में नवाचार आधारित अनेक शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन किया तथा आधुनिक तकनीक को भी शिक्षण से जोड़ा। गतिविधि-आधारित शिक्षण, डिजिटल संसाधनों, व्यवहारिक शिक्षा और नवाचारों के माध्यम से उन्होंने विद्यार्थियों में सीखने की जिज्ञासा को निरंतर बढ़ाया। उनका उद्देश्य हमेशा यही रहा कि विद्यालय का प्रत्येक बच्चा आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को साकार कर सके। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर शफीक शेख की यह यात्रा केवल एक शिक्षक की उपलब्धि नहीं, बल्कि इस विश्वास का सशक्त उदाहरण है कि यदि शिक्षक संवेदनशीलता, समर्पण और नवाचार के साथ कार्य करे तो वह केवल विद्यार्थियों को शिक्षित नहीं करता, बल्कि परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी बदल सकता है। उनके लिए शिक्षा का अर्थ केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि हर बच्चे को उसकी क्षमता पहचानने, आत्मविश्वास देने और जीवन में आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना है। यही सच्चे गुरु की पहचान है और यही उनकी सफलता की सबसे बड़ी कहानी है। मेरे गुरु, मेरी प्रेरणा पूर्व विद्यार्थियों की जुबानी धर्मेंद्र डावर वर्तमान में उद्यानिकी महाविद्यालय, रेहली (सागर) में अध्ययनरत शफीक सर ने हमारी पीएटी परीक्षा की तैयारी केवल परीक्षा के कुछ महीने पहले नहीं, बल्कि कक्षा 11वीं से ही शुरू करवा दी थी। विषय की गहरी समझ के साथ नियमित अभ्यास कराया। पीएटी का फॉर्म भरने से लेकर काउंसलिंग, कॉलेज चयन और प्रवेश प्रक्रिया तक हर कदम पर उन्होंने हमारा मार्गदर्शन किया। आज मैं उद्यानिकी महाविद्यालय में अध्ययन कर रहा हूँ तो इसमें सर के निरंतर सहयोग और विश्वास की महत्वपूर्ण भूमिका है। कु. पूजा इस्के वर्तमान में कृषि महाविद्यालय, गंजबासौदा में अध्ययनरत षशफीक सर हमारे लिए केवल शिक्षक नहीं, बल्कि एक अभिभावक की तरह रहे। विद्यालय में पढ़ाई से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, काउंसलिंग, प्रवेश प्रक्रिया और महाविद्यालय में प्रवेश मिलने के बाद भी उन्होंने हर पड़ाव पर हमारा मार्गदर्शन और सहयोग किया। उनका स्नेह, अनुशासन और प्रेरणा ही हमें निरंतर आगे बढ़ने की शक्ति देती है। विष्णु बड़ोले वर्तमान में उद्यानिकी महाविद्यालय, छिंदवाड़ा में अध्ययनरत कक्षा 10वीं के बाद एक समय ऐसा आया जब परिस्थितियों के कारण नियमित अध्ययन पर ब्रेक लग सकता था। तभी शफीक सर स्वयं मेरे घर आए और उन्होंने मुझे रुक जाना नहीं परीक्षा के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने मुझे पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया और विश्वास दिलाया कि मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। उनके मार्गदर्शन और प्रोत्साहन की बदौलत मैं अपनी पढ़ाई नियमित रूप से जारी रख सका और आज उद्यानिकी महाविद्यालय में अध्ययन कर रहा हूँ। प्राचार्य श्री असलम खान के अनुसार शिक्षक शफीक शेख सच्ची निष्ठा और समर्पण के साथ बच्चों का भविष्य निखारने हेतु सतत प्रयासरत रहते है। विद्यार्थियों के व्यवहार और परीक्षाफल में उनकी मेहनत की झलक साफ दिखाई देती है। इस गुरुपूर्णिमा पर हम उनका सम्मान करने जा रहे हैं और ऐसे प्रेरणादायी शिक्षक का गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सम्मान करना पूरे विद्यालय परिवार के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। #JansamparkMP #Badwani

Barwani, Madhya Pradesh | Jul 27, 2026