मेघा कुमारी (ग्राम – कतरौल बसंत) के मामले में कुछ तथ्य सामने आए हैं।जब बच्ची के लापता होने की सूचना मिली थी, तब उसके परिजन विधायक जी से मिलने गए थे। उस समय विधायक जी ने परिजनों से कहा था कि प्रशासन अपना कार्य कर रहा है, इसलिए दो दिन का समय दिया जाए और जांच पूरी होने दी जाए।
लेकिन कुछ लोगों द्वारा मामले को राजनीतिक रंग दिया गया। सोशल मीडिया और तथा कथित पत्रकार (मोबाइलधारी) के माध्यम से तरह-तरह की बातें फैलायी गईं तथा विधायक जी के खिलाफ भी अपशब्द कहे गए। कई घंटों तक सड़क जाम कर प्रशासनिक कार्य में बाधा उत्पन्न की गई। जबकि प्रशासन लगातार मामले की जांच में जुटा हुआ था।
इस बीच परिजनों द्वारा अपहरण की आशंका जताई गई, लेकिन अब जो तस्वीरें और जानकारी सामने आई हैं, उनसे यह स्पष्ट होता है कि मेघा कुमारी ने अपनी इच्छा से कोर्ट मैरिज की है। इससे अपहरण की आशंका को बल नहीं मिलता।
यह घटना हमें सिखाती है कि किसी भी मामले में जांच पूरी होने से पहले अफवाहों पर विश्वास नहीं करना चाहिए और न ही बिना तथ्य के किसी व्यक्ति या जनप्रतिनिधि पर आरोप लगाना चाहिए। प्रशासन को अपना कार्य करने का अवसर देना चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
सत्य अंततः सामने आ ही जाता है, इसलिए संयम और जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखना हम सभी का कर्तव्य है।