शिक्षा सिर्फ़ किताबों तक सीमित नहीं होती, शिक्षा इंसान को अपने अधिकारों के लिए खड़े होना भी सिखाती है।” लखीमपुर के एक कक्षा 8 के छात्र ने तहसील दिवस में जो साहस दिखाया, वह उम्र से नहीं, शिक्षा और जागरूकता से पैदा हुआ आत्मविश्वास था। उसने किसी से भीख नहीं मांगी, किसी के सामने गिड़गिड़ाया नहीं, बल्कि प्रशासन के सर्वोच्च अधिकारी के सामने पूरे सम्मान के साथ अपना अधिकार मांगा। जब अधिकारी ने कहा, “बच्चे का काम देख लो,” तो बच्चे ने बिना डरे जवाब दिया—“दिखवा नहीं, कहिए ताला खुलवा दें।” यही एक जागरूक नागरिक की पहचान है। उसे पता था कि उसका अधिकार क्या है और प्रशासन की जिम्मेदारी क्या है। यह जवाब केवल एक बच्चे की हिम्मत नहीं था, बल्कि उस शिक्षा का प्रमाण था जो व्यक्ति को अन्याय के सामने चुप रहने के बजाय सवाल करना सिखाती है। हम अक्सर शिक्षा को सिर्फ़ परीक्षा, अंक और नौकरी तक सीमित कर देते हैं। लेकिन असली शिक्षा वह है जो बच्चों को संविधान, कानून, अपने अ�
Budaun, Budaun | Jul 19, 2026