भादरा में कपड़ों की दुकान के बाद रंग की दुकान का मामला , दुकानदारों के लिए ग्राहक भगवान नहीं रहे अब । माना कि आप गारंटी नहीं दे सकते माना कि आप समान बदल नहीं सकते लेकिन कम से कम ग्राहक जब खरीददारी करने आता है तब आप इज्जत से पेश आते हो उसी इज्जत से वो कोई दूसरी बार शिकायत करने आए तो पेश तो आओ ।
#भादरा_का_बुरा_हाल
ये कोई जय लक्ष्मी नाम से रंग ( पेंट ) की दूकान है , इनसे जो रंग की बाल्टी लेकर जाता है उस बाल्टी में 40,50, रूपए के टोकन डाले जाते हैं ताकि रंग करने वाले पेंटर को वो मिल जाए और बाद में हमारे पास आकर वो टोकन देकर पैसे लेकर जाए,, और आज एक गरीब मजदूर रंग की बाल्टी में से निकले क्रमश 40,50,60, रूपए के टोकन लेकर उन टोकनों के रूपए लेने जाता हे,, जाहिर सी बात है कि जिस दूकान से रंग लिया है टोकन भी उसी दूकान पर देना होता है,, लेकिन ये जनाब कहता है कि हम कोई टोकन नहीं लेंगे,, और ऊपर से गरीब मजदूर को कहता है कि मेरो पाङे है तो पड़वा दिए, तेरे बर गा बहुत आवे है,, भादरा के दुकानदारों को हो क्या गया है समझ नहीं आ रहा है पहले तो ऐसे नहीं थे,, अभी तीन दिन पहले कोई नन्ही बच्चियों को फ्री पिज्जा खिलाने की कह रहा था,, अब आज ये कह रहा है कि में कोई टोकन नहीं लूंगा,, सभी साथियों से अनुरोध है कि पोस्ट को शेयर करें और ऐसे लोगों से बचे 🙏🙏