रक्षाबंधन पर बहनों की राह देखते रह गए भाई, हादसे ने छीन ली दो जिंदगियां
चरखी दादरी (बाढ़डा):- उमरवास गांव
लोहानी के पास वैगनार कार ने बाइक को मारी टक्कर, प्रदीप और राजेंद्र की मौत; इंद्र गंभीर, PGI रोहतक रेफर
चरखी दादरी। रक्षाबंधन के त्योहार से पहले गांव उमरवास के एक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
ड्यूटी से घर लौट रहे तीन युवकों की बाइक को गांव लोहानी के नजदीक एक वैगनार कार ने टक्कर मार दी। हादसे में तीनों घायल हो गए। अस्पताल में डॉक्टरों ने प्रदीप और राजेंद्र को मृत घोषित कर दिया,
जबकि गंभीर रूप से घायल इंद्र को उपचार के लिए PGI रोहतक रेफर किया गया।
बहनों को था भाइयों के लौटने का इंतजार
रक्षाबंधन पर बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए इंतजार कर रही थीं। घरों में त्योहार की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन हादसे की खबर पहुंचते ही खुशियां मातम में बदल गईं।
जिन भाइयों के हाथों पर राखी बांधनी थी, उनकी अर्थियां उठने से परिवार और गांव में हर आंख नम हो गई।
प्रदीप के तीन बच्चे, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
प्रदीप शादीशुदा था और उसके दो बेटे और एक बेटी हैं। वह पांच भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर था। उससे बड़ी केवल एक बहन है। उसके एक भाई की पहले ही मौत हो चुकी है। अब परिवार में एक भाई और दो बहनें जीवित हैं। प्रदीप की मौत से उसके तीन मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया।
राजेंद्र के दो मासूम बेटे
राजेंद्र भी शादीशुदा था और उसके दो बेटे हैं। वह पांच भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर था। उसके परिवार में तीन भाई और दो बहनें हैं। रक्षाबंधन से पहले राजेंद्र की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
इंद्र की हालत गंभीर
हादसे में घायल इंद्र भी शादीशुदा है और तीन बच्चों का पिता है। उसकी हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने उसे PGI रोहतक रेफर किया है। परिवार के लोग उसके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं।
एक परिवार के दो चिराग एक साथ बुझ गए
इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि प्रदीप और राजेंद्र एक ही परिवार से थे। दोनों की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। दोनों का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया तो गांव का माहौल गमगीन हो गया।
रक्षाबंधन के दिन जहां बहनों को भाइयों की कलाई पर राखी बांधनी थी, वहीं अब उन्हें भाइयों की यादों के साथ जीवन बिताना पड़ेगा। त्योहार की खुशियां मातम में बदल गईं और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
Charkhi Dadri, Charkhi Dadri | Aug 28, 2026