सुधार उत्सव 2026 अंतर्गत इफको द्वारा किसान दिवस के अवसर पर किसानों को आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों की जानकारी दी
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विदिशा। बी-पैक्स, इमलिया में शुक्रवार को किसान दिवस का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के 80 से अधिक किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जैविक संसाधनों के उपयोग तथा आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई। साथ ही, नैनो उर्वरकों पर आधारित प्रदर्शन प्रक्षेत्र के माध्यम से फसल में पोषक तत्व प्रबंधन के विभिन्न तरीकों का प्रत्यक्ष अवलोकन कराया गया। कार्यक्रम में पीएनबी कृषक प्रशिक्षण केंद्र, विदिशा के निदेशक श्री अजय सिंह परिहार, कृषि विज्ञान केंद्र, विदिशा के वैज्ञानिक डॉ. अक्षय उज्ज्वल, एसएडीओ श्री विशाल यादव, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष पति श्री नारायण सिंह गुर्जर, सरपंच पति श्री श्यामवीर सिंह राजपूत तथा इमलिया समिति के प्रबंधक श्री लाल बहादुर सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
संतुलित उर्वरक उपयोग एवं इफको के नवाचार उत्पादों की जानकारी -
कार्यक्रम में इफको विदिशा के क्षेत्रीय प्रबंधक श्री कुमार मनेन्द्र ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि फसलों में उर्वरकों का प्रयोग मिट्टी की स्थिति, फसल की आवश्यकता एवं अनुशंसित मात्रा के अनुसार किया जाना चाहिए। इससे फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने के साथ मृदा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण का संरक्षण भी किया जा सकता है। उन्होंने किसानों को इफको के नवाचार उत्पादों, नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, नैनो जिंक, नैनो कॉपर, सागरिका, जैव उर्वरकों एवं बायोडीकंपोजर की उपयोगिता, लाभ तथा प्रयोग विधि की जानकारी दी। उन्होंने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने और उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग के माध्यम से खेती की लागत को नियंत्रित करने का आह्वान किया।
मृदा जैविक कार्बन बढ़ाने पर दिया जोर -
कृषि विज्ञान केंद्र, विदिशा के वैज्ञानिक डॉ. अक्षय उज्ज्वल ने मृदा जैविक कार्बन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मिट्टी में जैविक कार्बन की पर्याप्त मात्रा उसकी उर्वरता, जलधारण क्षमता तथा लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने किसानों को गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट एवं अन्य जैविक संसाधनों के उचित उपयोग के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि जैविक पदार्थों का नियमित उपयोग मिट्टी की संरचना में सुधार करने, मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने तथा कृषि भूमि की दीर्घकालिक उत्पादकता बढ़ाने में सहायक होता है।
पीएनबी कृषक प्रशिक्षण केंद्र ने बताईं प्रशिक्षण एवं स्वरोजगार की संभावनाएं -
पीएनबी कृषक प्रशिक्षण केंद्र, विदिशा के निदेशक श्री अजय सिंह परिहार ने केंद्र द्वारा संचालित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से वित्तीय एवं डिजिटल साक्षरता के साथ ब्यूटी पार्लर, खाद्य प्रसंस्करण, लिप्पन आर्ट, पेंटिंग तथा अन्य रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराए जाते हैं। उन्होंने मशरूम उत्पादन, जैविक खेती एवं रिजेनरेटिव फार्मिंग जैसी टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर दिए जाने वाले प्रशिक्षण की जानकारी भी साझा की। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़कर उनकी आजीविका के अवसरों को बढ़ाया जा सकता है। इस अवसर पर इमलिया समिति के प्रबंधक श्री लाल बहादुर सिंह ने किसानों को इफको के कृषि उत्पादों की गुणवत्ता एवं उपयोगिता के संबंध में जानकारी दी।
नैनो उर्वरकों पर आधारित प्रदर्शन प्रक्षेत्र में उत्साहजनक परिणाम -
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण प्रगतिशील किसान श्री वसीम रिज़वी के खेत पर लगाए गए नैनो उर्वरक आधारित प्रदर्शन प्रक्षेत्र रहा। उन्होंने किसानों को नैनो उर्वरक आधारित प्रदर्शन के अंतर्गत अपनाई गई विभिन्न उर्वरक प्रबंधन पद्धतियों एवं उनके परिणामों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदर्शन में तीन प्लॉट निर्धारित किए गए थे। पहले प्लॉट (T1) में किसान की सामान्य पद्धति के अनुसार रासायनिक उर्वरकों का उपयोग किया गया, जबकि दूसरे प्लॉट (T2) में रासायनिक उर्वरकों की मात्रा में 50 प्रतिशत तथा तीसरे प्लॉट (T3) में 25 प्रतिशत की कमी की गई। श्री वसीम रिज़वी के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान T2 एवं T3 प्लॉट में T1 की तुलना में बेहतर परिणाम देखने को मिले। विशेष रूप से T3 प्लॉट में पौधों की अच्छी ऊंचाई,प कल्लों एवं बालियों की अधिक संख्या तथा कीट एवं रोगों का तुलनात्मक रूप से कम प्रकोप दिखाई दिया। इसके बाद किसानों कोp प्रदर्शन स्थल का भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने तीनों प्लॉटों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया और विभिन्न उर्वरक प्रबंधन पद्धतियों के परिणामों की जानकारी प्राप्त की। इस प्रदर्शन से किसानों को फसल की आवश्यकता के अनुरूप पोषक तत्वों के प्रबंधन तथा उर्वरकों के संतुलित उपयोग के महत्व को समझने का अवसर मिला।
टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने का आह्वान -
कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा जैविक कार्बन संवर्धन, जैविक संसाधनों के उपयोग, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा फील्ड डेमॉन्स्ट्रेशन की उपयोगिता से अवगत कराया गया। कार्यक्रम में किसानों को वैज्ञानिक एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियां अपनाकर उत्पादन क्षमता बढ़ाने, खेती की लागत के बेहतर प्रबंधन तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में प्रयास करने के लिए प्रेरित किया गया। #vidisha #JansamparkMP
Vidisha, Madhya Pradesh | Oct 16, 2026