तीन साल पहले गोलियों से खामोश हुई पत्रकार विमल यादव की आवाज, आज भी परिवार की आंखों में वही सवाल-आखिर कहां गया 50 लाख मुआवजे और सरकारी नौकरी का वादा? तीसरी पुण्यतिथि पर सामने आई ऐसी कहानी, जिसने एक बार फिर सिस्टम और जनप्रतिनिधियों के आश्वासनों पर सवाल खड़े कर दिए।
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