🏛️ ओकरी परगना — मगध के इतिहास का एक भूला हुआ अध्याय
आज हम ओकरी को मुख्यतः जहानाबाद जिले के मोदनगंज क्षेत्र में स्थित एक गाँव के रूप में जानते हैं। लेकिन पुराने राजस्व और प्रशासनिक इतिहास के पन्ने बताते हैं कि “ओकरी” केवल एक गाँव का नाम नहीं था, बल्कि इसके नाम से एक विस्तृत परगना भी जाना जाता था।
📜 “ओकरी परगना इसी गाँव के नाम पर है।”
फ्रांसिस बुकानन के सर्वेक्षणकालीन विवरण में ओकरी परगना का क्षेत्रफल लगभग 1,32,000 बीघा बताया गया है। यह आँकड़ा अपने आप में बताता है कि ऐतिहासिक ओकरी परगना आज के ओकरी गाँव की तुलना में कहीं अधिक विस्तृत राजस्व क्षेत्र था।
🏛️ 1819 का महत्वपूर्ण संदर्भ
19वीं शताब्दी के आरंभिक दौर में मगध की प्रशासनिक व्यवस्था आज के जिलों और प्रखंडों जैसी नहीं थी। उस समय परगना, महाल और जमींदारी राजस्व व्यवस्था की महत्वपूर्ण इकाइयाँ थीं।
👑 ओकरी और टिकारी राज का ऐतिहासिक और राजनीतिक संबंध: मुगल और ब्रिटिश काल में ओकरी परगना राजस्व व्यवस्था की एक प्रमुख इकाई थी। इस पर मगध के प्रसिद्ध टिकारी राज जमींदारी रियासत का आधिपत्य था।
शासक: टिकारी राज के महाराजा सुंदर शाह ने इस परगना पर अपना नियंत्रण स्थापित किया था। बाद के समय में भी यह क्षेत्र टिकारी राज की राजस्व संरचना का एक अहम हिस्सा बना रहा। महाराजा सुन्दर शाह ने इस परगना पर अपना आधिपत्य कायम किया था.
🌊 फल्गु नदी और ओकरी
ओकरी की भौगोलिक स्थिति भी इसके इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र फल्गु नदी के निकट स्थित है.
प्रवाह क्षेत्र: यह नदी गया से आगे बढ़कर जहानाबाद जिले के घोसी और मोदनगंज जैसे इलाकों से गुजरती है।
मगध में नदियाँ केवल जल का स्रोत नहीं थीं, बल्कि वे कृषि, व्यापार, आवागमन और धार्मिक गतिविधियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थीं।
🛣️ पुराने मार्गों से जुड़ा ओकरी
स्थानीय ऐतिहासिक परंपरा ओकरी को तरेगना से एकंगरसराय की दिशा में जाने वाले पुराने मार्ग से जोड़ती है। इसे शेरशाह सूरी के समय जी.टी. रोड से भी जोड़ा गया था।
🕉️ ओकरी की प्राचीन धार्मिक परंपरा
ओकरी का इतिहास केवल औपनिवेशिक राजस्व व्यवस्था तक सीमित नहीं है।
स्थानीय परंपराओं में इसका संबंध विष्णु -उपासना और प्राचीन विष्णु मंदिर से भी जोड़ा जाता है। क्षेत्र में प्राचीन मूर्तियों, स्तम्भों और अन्य स्थापत्य अवशेषों की चर्चा इसके संभावित पुरातात्त्विक महत्व की ओर संकेत करती है।
यदि इन अवशेषों का वैज्ञानिक अध्ययन और काल- निर्धारण किया जाए, तो ओकरी का इतिहास प्राचीन मगध की सांस्कृतिक परंपराओं से भी जोड़ा जा सकता है।
इसके आसपास के क्षेत्रों में की गई पुरातात्विक खुदाई में कई प्राचीन मूर्तियां और ऐतिहासिक अवशेष प्राप्त हुए हैं। यहाँ से ब्राह्मी लिपि में लिखे अभिलेखों वाले 4 प्राचीन स्तम्भ भी मिले हैं, जो इसके मौर्य या गुप्त कालीन गौरवशाली इतिहास की ओर इशारा करते हैं
🏛️ ओकरी केवल एक गाँव नहीं है।
यह मगध की पुरानी परगना व्यवस्था, फल्गु नदी की सभ्यता, जमींदारी इतिहास, टिकारी राज की राजस्व संरचना और प्राचीन धार्मिक विरासत को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी हो सकता है।
ओकरी परगना — इसके राजस्व गाँव-
फरीदपुर, चौपहा, गंधार एराज़ी, घोषी, गम्हरपुर, केवाली, कोरमा, कोर्रा, लखावर, लखीसराय, लोदीपुर, माधोपुर, महमदपुर, अफ्ज़लपुर, अनंतपुर , बैना, धामापुर, हवेलीपुर, कथौतिया, किसरामपुर, नूरपुर, सकरौधा, सयिस्ताबाद, बहियारा चक, अमरपुर पाली, भद्सारा, गोलकपुर, कोसियावा, नरावा, निगार पाली, काको, दमुहा इत्यादि है, इसके अलावा कई गाँव है, जिनकी नाम सामने आने पर यहाँ लिखा जाएगा.
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रजनीश वाजपेयी
टिकारी, गया
Dinapur Cum Khagaul, Patna | Sep 15, 2026