एक वो दौर था जब सरकारें जनता के सामने झुकती थीं, और एक आज का 'अमृतकाल' है! 🤷♂️
इस वीडियो को देखिए। 1984 में जब सोनम वांगचुक के पिता सोनम वांग्याल जी ने लद्दाख के अधिकारों (ST दर्जे) के लिए भूख हड़ताल की थी, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी खुद लेह पहुंची थीं और जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया था। इसे कहते हैं जन-संघर्ष का सम्मान और सच्चा लोकतंत्र!
और आज की स्थिति देखिए...
आज उसी लद्दाख को बचाने के लिए, हमारे पर्यावरण और हकों के लिए खुद सोनम वांगचुक हफ्तों तक माइनस डिग्री तापमान में बर्फ पर सोते हैं, दिल्ली आकर प्रदर्शन करते हैं, लेकिन '56 इंच' के सीने वाली सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती।
जो सरकार कैमरे के सामने मोर को दाना खिलाने और गुफाओं में ध्यान लगाने का इवेंट कर सकती है, उसे देश के लिए असली 'तपस्या' कर रहा एक सच्चा देशभक्त दिखाई नहीं देता।
सिर्फ 'मन की बात': इन्हें सिर्फ अपनी 'मन की बात' सुनाना आता है। जनता की 'जन की बात' सुनने के लिए जो संव�
Indore, Indore | Jul 17, 2026