Public App Logo
Jansamasya
News
Bjp
National
Police
Bihar
India
कांग्रेस
Gujarat
Accident
Congress
Modi
Delhi
Viral
मारपीट
Jharkhand
Breakingnews
Narendramodi
Nitishkumar
Madhya_pradesh
Nsui
Madhyapradesh
Pmmodi
Rahulgandhi
Uttarpradesh
Haryana
Cricket
Lucknow
Uttarakhand
Crimenews
image
image
image
image

#cgpsc की ओर से जारी #SI #रिजल्ट चर्चा में, ‘NEWS’ और ‘SPACERANI’ जैसे कई अटपटे नामों को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल #रायपुर #छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की ओर से जारी सूबेदार, उप निरीक्षक (SI) और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा के प्रारंभिक परिणाम को लेकर अब राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस ने रिजल्ट में सामने आए कुछ अभ्यर्थियों के नामों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी ने आरोप लगाया है कि चयन सूची में कुछ ऐसे नाम शामिल हैं, जो संदेह पैदा करते हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। चयन सूची में अटपटे नामों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज रिजल्ट जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर चयन सूची में शामिल कुछ नामों को लेकर चर्चा तेज हो गई। नामों की लिस्ट के स्क्रीनशॉट भी वायरल होने लगे। इनमें क्रमांक 6074, रोल नंबर 2402148213 वाले अभ्यर्थी के नाम के रूप में दर्ज ‘NEWS’, क्रमांक 467, रोल नंबर 2402105174 वाले अभ्यर्थी के नाम ‘SPACERANI’ और क्रमांक 93, रोल नंबर 2402101319, अभ्यर्थी के नाम के स्थान पर ‘MANBAS’ शामिल है। इसके अलावा ऐसे कई नामें को लेकर भी सावल उठाए गए हैं। #कांग्रेस ने उठाए सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग कांग्रेस ने SI रिजल्ट की सूची जारी करते हुए कुछ नामों को हाइलाइट किया है। कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि यह हाल ही में 12 जुलाई 2026 को आयोजित सब इंस्पेक्टर प्री परीक्षा 2024 का परिणाम है, जिसमें अभ्यर्थियों के नामों में ‘स्पेस रानी’ और ‘न्यूज’ जैसे नाम दर्ज हैं। सुशासन का दावा करने वाली साय सरकार की हकीकत को देख लीजिए। सरकार #भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों पर किया पलटवार इस मामले में कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा प्रवक्ता राजीव चक्रवर्ती ने कहा कि चयन सूची में सामने आई चीजें केवल विसंगति हैं, जिन्हें जांच के बाद ठीक कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि परीक्षा पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित की गई है और इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अपने रिश्तेदारों को नौकरी दिलाने के नाम पर परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामले सामने आए थे। राजीव चक्रवर्ती ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में भर्ती प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ हो रही है। उन्होंने दोहराया कि यदि किसी भी प्रकार की विसंगति सामने आती है तो जांच के बाद उसे सुधार लिया जाएगा। CGPSC ने किसी भी गड़बड़ी से किया इनकार छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) ने SI रिजल्ट में सामने आए नामों को लेकर उठ रहे सवालों पर स्थिति स्पष्ट की है। CGPSC की परीक्षा नियंत्रक लीना कोसम ने लल्लूराम डॉट कॉम से बातचीत में बताया कि प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम में दर्ज नामों की जांच की गई है। उन्होंने कहा कि आयोग ने संबंधित अभ्यर्थियों से संपर्क कर जानकारी ली है। अभ्यर्थियों ने नामों में किसी भी तरह की त्रुटि होने से इनकार किया है और सूची में दर्ज नामों को सही बताया है। 341 पदों पर भर्ती के लिए आयोजित हुई थी परीक्षा गौरतलब है कि CGPSC ने बीते बुधवार 341 पदों पर भर्ती के लिए आयोजित प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी किया था। इस परीक्षा में सफल 7,301 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए चयनित किया गया है। परीक्षा 12 जुलाई 2026 को प्रदेश के सभी 33 जिलों में आयोजित की गई थी, जिसके लिए 183 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। अब मुख्य परीक्षा का आयोजन संभावित रूप से 24, 25 और 26 अक्टूबर 2026 को किया जाना है, जिसके लिए चयनित अभ्यर्थियों को ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। @followers #raipur #raipurnews #raipurians #RaipurCafe #exams #examsupport #ExamPreparation #ExamSuccess #examresults #छत्तीसगढ़ #chhattisgarh #ChhattisgarhNews #लोरमी_को_सौगात #लोरमी_के_गौरव #लोरमीमुंगेलीन्यूज़ #lormimungelinews #छत्तीसगढ़_के_माटी #छत्तीसगढ़_महतारी #छत्तीसगढ़ #LocalNews #BreakingNews #BigBreakingNews #todaynews #IndiaNews #NationalNews #ViralNewsUpdate #BigBreaking #LatestUpdates #LatestNews न्यूज़ के लिए कृपया फॉलो करें धन्यवाद👇👇👇 https://www.facebook.com/LORMIMUNGELINEWS?sk=followers

Lormi, Mungeli | Aug 8, 2026

MORE NEWS

#चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश की कई जगहों के नाम बार-बार बदल रहा था। ऐसे में भारत ने 27 जगहों के नाम अपने आधिकारिक मैप में शामिल किए हैं। इससे इन जगहों की पहचान बनेगी और आम लोगों के बीच जागरुकता बढ़ेगी।

#भारत ने शुक्रवार को #अरुणाचलप्रदेश की 27 जगहों और उनकी भौगोलिक विशेषताओं के मानक नामों को भारत के आधिकारिक मैप में शामिल किया। चीन बार-बार अरुणाचल प्रदेश की अलग-अलग जगहों के नाम बदल रहा था। इससे निपटने के लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने सभी जगहों के मानक नामों को ऑफिशियल मैप में जगह दी है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ''भारतीय सर्वेक्षण विभाग के अरुणाचल प्रदेश के मानचित्र पर इन्हें औपचारिक रूप से चिह्नित करने का उद्देश्य, इनकी सटीक पहचान को सुगम बनाना और जन-सामान्य के बीच बेहतर जागरूकता पैदा करना है।'' 

अरुणाचल प्रदेश में जगहों के नाम बदलने की चीन की हरकत को भारत ने हमेशा स्पष्ट रूप से खारिज किया है। भारत ने लगातार ऐसे कदमों को 'निरर्थक और बेतुका बताया है और कहा है कि इस तरह के प्रयास इस अटल सच्चाई को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है, है और रहेगा।

लोंग जू भी ऑफिशियल मैप का हिस्सा
भारत के आधिकारिक मैप में शामिल किए गए 27 स्थानों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास स्थित लोंग जू भी शामिल है। यह क्षेत्र 1959 में भारत और चीन के बीच शुरुआती टकराव वाले स्थानों में से एक था, जब चीनी सेना ने इस इलाके में प्रवेश किया था। बयान में कहा गया है कि अपर सुबनसिरी जिले में लोंग जू के पास स्थित माजा गांव को भी मैप में मार्क किया गया है। इस सूची में बिसा गांव के अलावा क्षेत्र के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पर्वतीय दर्रे ड्जो ला, रिजा ला और पुकुर ला को भी शामिल किया गया है। रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ऊंचाई वाले दर्रों में से एक थाग ला को भी आधिकारिक मैप में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। वर्ष 1962 में भारत और चीन के बीच हुए युद्ध के शुरुआती संघर्षों में से एक इसी क्षेत्र में हुआ था।

ये अहम जगहें भी ऑफिशियल मैप का हिस्सा
जयरामपुर को भी इसमें शामिल किया गया है। यह चांगलांग जिले का एक महत्वपूर्ण रसद केंद्र है, जिसे पूर्वी सीमा क्षेत्र का प्रवेश द्वार माना जाता है। यह पूर्वी अरुणाचल प्रदेश और म्यांमा सीमा क्षेत्र की ओर सुरक्षा बलों की आवाजाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस सूची में पूर्वी अरुणाचल प्रदेश स्थित शंभू सरोवर, बड़ा कुंडुन और छोटा कुंडुन भी शामिल हैं। इसके अलावा धन बाड़ी, प्रीतनगर, तेरितनगर, तवांग रोड पर स्थित रामनगर जसवंतगढ़ (जहां भारतीय शहीद जसवंत सिंह रावत का स्मारक है), सागर, पद्मा, ज्योतिनगर और बैसाखी गांवों को भी शामिल किया गया है। इस सूची में 1962 के युद्ध के नायक त्रिलोक सिंह थापा की याद में बनाए गए शेर-ए-थापा स्मारक, छोटा रोपुक और बड़ा रोपुक, शिवाजी नगर, सुनपुरा, कमलांग अभयारण्य के पास स्थित कमलांग नगर और बुद्ध मंदिर भी शामिल हैं। 

32 जगहों को काल्पनिक नाम दे चुका चीन
चीन की ओर से भारतीय क्षेत्रों को ''काल्पनिक नाम'' देने के प्रयासों को भारत लगातार खारिज करता रहा है। भारत का कहना है कि इस तरह ''बेबुनियाद विमर्श'' गढ़ने की कोशिशें ''अटल सच्चाई'' को नहीं बदल सकतीं और इससे दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं। चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने 2017 में जांगनान में छह स्थानों के मानकीकृत नामों की पहली सूची जारी की थी। इसके बाद 2021 में 15 स्थानों के नामों वाली दूसरी सूची जारी की गई और 2023 में 11 अन्य स्थानों के नामों की एक और सूची जारी की गई। चीन अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहता है। (इनपुट-पीटीआई)

@followers #China #India #arunachalpradeshdiaries  #ArunachalPradesh #ArunachalPradeshNEWS  
#छत्तीसगढ़ #chhattisgarh #ChhattisgarhNews
#लोरमी_को_सौगात #लोरमी_के_गौरव #लोरमीमुंगेलीन्यूज़ #lormimungelinews #छत्तीसगढ़_के_माटी #छत्तीसगढ़_महतारी #छत्तीसगढ़ 
#LocalNews
#BreakingNews
#BigBreakingNews
#todaynews
#IndiaNews
#NationalNews
#ViralNewsUpdate
#BigBreaking
#LatestUpdates
#LatestNews 
न्यूज़ के लिए कृपया फॉलो करें धन्यवाद👇👇👇
https://www.facebook.com/LORMIMUNGELINEWS?sk=followers

#चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश की कई जगहों के नाम बार-बार बदल रहा था। ऐसे में भारत ने 27 जगहों के नाम अपने आधिकारिक मैप में शामिल किए हैं। इससे इन जगहों की पहचान बनेगी और आम लोगों के बीच जागरुकता बढ़ेगी। #भारत ने शुक्रवार को #अरुणाचलप्रदेश की 27 जगहों और उनकी भौगोलिक विशेषताओं के मानक नामों को भारत के आधिकारिक मैप में शामिल किया। चीन बार-बार अरुणाचल प्रदेश की अलग-अलग जगहों के नाम बदल रहा था। इससे निपटने के लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने सभी जगहों के मानक नामों को ऑफिशियल मैप में जगह दी है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ''भारतीय सर्वेक्षण विभाग के अरुणाचल प्रदेश के मानचित्र पर इन्हें औपचारिक रूप से चिह्नित करने का उद्देश्य, इनकी सटीक पहचान को सुगम बनाना और जन-सामान्य के बीच बेहतर जागरूकता पैदा करना है।'' अरुणाचल प्रदेश में जगहों के नाम बदलने की चीन की हरकत को भारत ने हमेशा स्पष्ट रूप से खारिज किया है। भारत ने लगातार ऐसे कदमों को 'निरर्थक और बेतुका बताया है और कहा है कि इस तरह के प्रयास इस अटल सच्चाई को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है, है और रहेगा। लोंग जू भी ऑफिशियल मैप का हिस्सा भारत के आधिकारिक मैप में शामिल किए गए 27 स्थानों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास स्थित लोंग जू भी शामिल है। यह क्षेत्र 1959 में भारत और चीन के बीच शुरुआती टकराव वाले स्थानों में से एक था, जब चीनी सेना ने इस इलाके में प्रवेश किया था। बयान में कहा गया है कि अपर सुबनसिरी जिले में लोंग जू के पास स्थित माजा गांव को भी मैप में मार्क किया गया है। इस सूची में बिसा गांव के अलावा क्षेत्र के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पर्वतीय दर्रे ड्जो ला, रिजा ला और पुकुर ला को भी शामिल किया गया है। रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ऊंचाई वाले दर्रों में से एक थाग ला को भी आधिकारिक मैप में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। वर्ष 1962 में भारत और चीन के बीच हुए युद्ध के शुरुआती संघर्षों में से एक इसी क्षेत्र में हुआ था। ये अहम जगहें भी ऑफिशियल मैप का हिस्सा जयरामपुर को भी इसमें शामिल किया गया है। यह चांगलांग जिले का एक महत्वपूर्ण रसद केंद्र है, जिसे पूर्वी सीमा क्षेत्र का प्रवेश द्वार माना जाता है। यह पूर्वी अरुणाचल प्रदेश और म्यांमा सीमा क्षेत्र की ओर सुरक्षा बलों की आवाजाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस सूची में पूर्वी अरुणाचल प्रदेश स्थित शंभू सरोवर, बड़ा कुंडुन और छोटा कुंडुन भी शामिल हैं। इसके अलावा धन बाड़ी, प्रीतनगर, तेरितनगर, तवांग रोड पर स्थित रामनगर जसवंतगढ़ (जहां भारतीय शहीद जसवंत सिंह रावत का स्मारक है), सागर, पद्मा, ज्योतिनगर और बैसाखी गांवों को भी शामिल किया गया है। इस सूची में 1962 के युद्ध के नायक त्रिलोक सिंह थापा की याद में बनाए गए शेर-ए-थापा स्मारक, छोटा रोपुक और बड़ा रोपुक, शिवाजी नगर, सुनपुरा, कमलांग अभयारण्य के पास स्थित कमलांग नगर और बुद्ध मंदिर भी शामिल हैं। 32 जगहों को काल्पनिक नाम दे चुका चीन चीन की ओर से भारतीय क्षेत्रों को ''काल्पनिक नाम'' देने के प्रयासों को भारत लगातार खारिज करता रहा है। भारत का कहना है कि इस तरह ''बेबुनियाद विमर्श'' गढ़ने की कोशिशें ''अटल सच्चाई'' को नहीं बदल सकतीं और इससे दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं। चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने 2017 में जांगनान में छह स्थानों के मानकीकृत नामों की पहली सूची जारी की थी। इसके बाद 2021 में 15 स्थानों के नामों वाली दूसरी सूची जारी की गई और 2023 में 11 अन्य स्थानों के नामों की एक और सूची जारी की गई। चीन अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहता है। (इनपुट-पीटीआई) @followers #China #India #arunachalpradeshdiaries #ArunachalPradesh #ArunachalPradeshNEWS #छत्तीसगढ़ #chhattisgarh #ChhattisgarhNews #लोरमी_को_सौगात #लोरमी_के_गौरव #लोरमीमुंगेलीन्यूज़ #lormimungelinews #छत्तीसगढ़_के_माटी #छत्तीसगढ़_महतारी #छत्तीसगढ़ #LocalNews #BreakingNews #BigBreakingNews #todaynews #IndiaNews #NationalNews #ViralNewsUpdate #BigBreaking #LatestUpdates #LatestNews न्यूज़ के लिए कृपया फॉलो करें धन्यवाद👇👇👇 https://www.facebook.com/LORMIMUNGELINEWS?sk=followers

Lormi, Mungeli | Aug 8, 2026

बिना सुविधाओं के रचा इतिहास : छोटे से गांव ने देश को दिए 17 #अंतरराष्ट्रीय #शतरंज #खिलाड़ी

#अहमदाबाद  #गुजरात के #महीसागर #जिले का एक छोटा सा गांव रतुसिंह ना मुवाडा, जहां महज 100 घर हैं, आज देश भर में शतरंज क्रांति की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। बिना किसी महंगी अकादमी या बड़ी सुविधाओं के, इस गांव ने बीते चार सालों में 17 FIDE-रेटेड खिलाड़ी तैयार कर दिए हैं।

इस प्रेरणादायक बदलाव की नींव 2021 में रखी गई थी। गांव के सरकारी प्राइमरी स्कूल ‘बाल वाटिका’ के 45 वर्षीय गणित शिक्षक संदीप उपाध्याय ने बच्चों को शतरंज सिखाने की मुहिम शुरू की। स्कूल की जर्जर हालत और सीमित संसाधनों के बावजूद, संदीप सर ने अपने वेतन का बड़ा हिस्सा बच्चों की एंट्री फीस, यात्रा खर्च, किताबों और चेस किट पर लगाकर उनके सपनों को पंख दिए। उनके इस संकल्प को ग्रैंडमास्टर अंकित राजपरा का भी साथ मिला, जो हर महीने गांव आकर बच्चों को मुफ्त कोचिंग देते हैं।

उपलब्धियां और आंकड़े

#मेडल व #ट्रॉफी खेत मजदूरों और दिहाड़ी मजदूरों के इन बच्चों ने अब तक 120 ट्रॉफी और 179 मेडल अपने नाम किए हैं।
टूर्नामेंट का प्रदर्शन: राज्य स्तर के 24 टूर्नामेंट्स में से 22 में गांव के बच्चों ने टॉप-3 में जगह बनाई।
विशेष पहचान: गांधीनगर के ‘स्टूडेंट्स चेस फेस्टिवल’ में बाल वाटिका को ‘बेस्ट इंस्टीट्यूट’ चुना गया। साथ ही, 21 बच्चों को सरकारी डिस्ट्रिक्ट लेवल स्पोर्ट्स स्कूल में मुफ्त शिक्षा और कोचिंग के लिए चुना गया है।

गांव की सबसे होनहार छात्रा 8वीं की दिव्या चौहान हैं। एक खेत मजदूर की बेटी दिव्या लगातार दो सालों तक तालुका स्तर पर अजेय रहीं और स्टेट विमेंस रैपिड चैंपियनशिप में तीसरा स्थान हासिल किया। उनका सपना भारत की ग्रैंडमास्टर बनना है। इतिहास

बच्चों की इस शानदार सफलता को देखते हुए महीसागर प्रशासन ने गांव में एक नया और आधुनिक स्कूल बनाने की योजना शुरू की है। यह नया परिसर मौजूदा भवन से 8.5 गुना बड़ा होगा, जिसमें खिलाड़ियों के लिए एक विशेष शतरंज हॉल भी बनाया जाएगा।

@followers #chess #chessgame #ChessCommunity #chesspuzzle #chesstactics #ChessChallenge #chessmaster #chessmasterclass #chessmasterintraining #sports #ChessSports #khel #shataranj 
#छत्तीसगढ़ #chhattisgarh #ChhattisgarhNews #gujrat #GujratNews #GujaratNewsOnline #gujaratnewsbulletin
#लोरमी_को_सौगात #लोरमी_के_गौरव #लोरमीमुंगेलीन्यूज़ #lormimungelinews #छत्तीसगढ़_के_माटी #छत्तीसगढ़_महतारी #छत्तीसगढ़ 
#LocalNews
#BreakingNews
#BigBreakingNews
#todaynews
#IndiaNews
#NationalNews
#ViralNewsUpdate
#BigBreaking
#LatestUpdates
#LatestNews 
न्यूज़ के लिए कृपया फॉलो करें धन्यवाद👇👇👇
https://www.facebook.com/LORMIMUNGELINEWS?sk=followers

बिना सुविधाओं के रचा इतिहास : छोटे से गांव ने देश को दिए 17 #अंतरराष्ट्रीय #शतरंज #खिलाड़ी #अहमदाबाद #गुजरात के #महीसागर #जिले का एक छोटा सा गांव रतुसिंह ना मुवाडा, जहां महज 100 घर हैं, आज देश भर में शतरंज क्रांति की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। बिना किसी महंगी अकादमी या बड़ी सुविधाओं के, इस गांव ने बीते चार सालों में 17 FIDE-रेटेड खिलाड़ी तैयार कर दिए हैं। इस प्रेरणादायक बदलाव की नींव 2021 में रखी गई थी। गांव के सरकारी प्राइमरी स्कूल ‘बाल वाटिका’ के 45 वर्षीय गणित शिक्षक संदीप उपाध्याय ने बच्चों को शतरंज सिखाने की मुहिम शुरू की। स्कूल की जर्जर हालत और सीमित संसाधनों के बावजूद, संदीप सर ने अपने वेतन का बड़ा हिस्सा बच्चों की एंट्री फीस, यात्रा खर्च, किताबों और चेस किट पर लगाकर उनके सपनों को पंख दिए। उनके इस संकल्प को ग्रैंडमास्टर अंकित राजपरा का भी साथ मिला, जो हर महीने गांव आकर बच्चों को मुफ्त कोचिंग देते हैं। उपलब्धियां और आंकड़े #मेडल व #ट्रॉफी खेत मजदूरों और दिहाड़ी मजदूरों के इन बच्चों ने अब तक 120 ट्रॉफी और 179 मेडल अपने नाम किए हैं। टूर्नामेंट का प्रदर्शन: राज्य स्तर के 24 टूर्नामेंट्स में से 22 में गांव के बच्चों ने टॉप-3 में जगह बनाई। विशेष पहचान: गांधीनगर के ‘स्टूडेंट्स चेस फेस्टिवल’ में बाल वाटिका को ‘बेस्ट इंस्टीट्यूट’ चुना गया। साथ ही, 21 बच्चों को सरकारी डिस्ट्रिक्ट लेवल स्पोर्ट्स स्कूल में मुफ्त शिक्षा और कोचिंग के लिए चुना गया है। गांव की सबसे होनहार छात्रा 8वीं की दिव्या चौहान हैं। एक खेत मजदूर की बेटी दिव्या लगातार दो सालों तक तालुका स्तर पर अजेय रहीं और स्टेट विमेंस रैपिड चैंपियनशिप में तीसरा स्थान हासिल किया। उनका सपना भारत की ग्रैंडमास्टर बनना है। इतिहास बच्चों की इस शानदार सफलता को देखते हुए महीसागर प्रशासन ने गांव में एक नया और आधुनिक स्कूल बनाने की योजना शुरू की है। यह नया परिसर मौजूदा भवन से 8.5 गुना बड़ा होगा, जिसमें खिलाड़ियों के लिए एक विशेष शतरंज हॉल भी बनाया जाएगा। @followers #chess #chessgame #ChessCommunity #chesspuzzle #chesstactics #ChessChallenge #chessmaster #chessmasterclass #chessmasterintraining #sports #ChessSports #khel #shataranj #छत्तीसगढ़ #chhattisgarh #ChhattisgarhNews #gujrat #GujratNews #GujaratNewsOnline #gujaratnewsbulletin #लोरमी_को_सौगात #लोरमी_के_गौरव #लोरमीमुंगेलीन्यूज़ #lormimungelinews #छत्तीसगढ़_के_माटी #छत्तीसगढ़_महतारी #छत्तीसगढ़ #LocalNews #BreakingNews #BigBreakingNews #todaynews #IndiaNews #NationalNews #ViralNewsUpdate #BigBreaking #LatestUpdates #LatestNews न्यूज़ के लिए कृपया फॉलो करें धन्यवाद👇👇👇 https://www.facebook.com/LORMIMUNGELINEWS?sk=followers

Lormi, Mungeli | Aug 7, 2026

#पीएम #मोदी की #वीडियो हटाने पर बढ़ा विवाद, #meta को #सेफहार्बर बंद करने की चेतावनी, जानिए क्या है यह क्लॉज

#technology #Desk #प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा एक वीडियो फेसबुक से हटाए जाने के बाद विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले ने अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर गंभीर रूप ले लिया है। संसद की सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने इस घटना को गंभीर बताते हुए मेटा (Meta) के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। बताया जा रहा है कि उन्हें इसके लिए तीन दिन का समय दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, यदि तय समय के भीतर उचित जवाब नहीं मिलता है, तो दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय समिति सोशल मीडिया कंपनियों को मिलने वाले सेफ हार्बर संरक्षण पर विचार कर सकती है। इसी वजह से एक बार फिर सेफ हार्बर क्लॉज चर्चा का विषय बन गया है।
क्या है पूरा मामला?
बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो फेसबुक से हटा दिया गया, जिसके बाद इसे लेकर राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे। आरोप लगाया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने बिना पर्याप्त कारण बताए वीडियो हटाया। इस घटना को लेकर संसदीय समिति ने कड़ा रुख अपनाया है और मेटा से स्पष्टीकरण मांगा है।

क्या होता है सेफ हार्बर क्लॉज?
सेफ हार्बर प्रावधान सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत दिया गया कानूनी संरक्षण है। इसके तहत फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (पूर्व में ट्विटर) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को उनके यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं माना जाता।

इसका मतलब यह है कि यदि कोई व्यक्ति सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट, फोटो, वीडियो या टिप्पणी साझा करता है, तो उसकी कानूनी जिम्मेदारी उस व्यक्ति की होती है, न कि प्लेटफॉर्म की। प्लेटफॉर्म केवल एक मध्यस्थ (Intermediary) की भूमिका निभाता है।

आसान भाषा में समझें
मान लीजिए किसी व्यक्ति ने फेसबुक पर आपत्तिजनक या कानून का उल्लंघन करने वाला कोई पोस्ट किया। मौजूदा सेफ हार्बर प्रावधान के अनुसार, उस पोस्ट के लिए जिम्मेदार वही व्यक्ति होगा जिसने उसे साझा किया है। फेसबुक पर सीधे कार्रवाई नहीं होगी, जब तक कि वह कानून के अनुसार आवश्यक कदम उठाने में विफल न रहे।

लेकिन यदि सेफ हार्बर का संरक्षण हटा दिया जाता है, तो ऐसे मामलों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। यानी यूजर के साथ-साथ प्लेटफॉर्म के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

किन कंपनियों पर पड़ेगा असर?
यदि सेफ हार्बर क्लॉज हटाया जाता है, तो इसका सबसे अधिक असर फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पड़ेगा। इसके अलावा क्लाउड कंप्यूटिंग, मेटावर्स, ब्लॉकचेन, क्रिप्टोकरेंसी, डीपफेक और डॉक्सिंग जैसी डिजिटल सेवाओं से जुड़ी कंपनियों के लिए भी कानूनी जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं।

ऐसी स्थिति में कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कंटेंट की अधिक निगरानी करनी पड़ सकती है और नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।

सरकार का क्या कहना है?
सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को पूरी तरह कानूनी छूट नहीं मिलनी चाहिए। यदि किसी प्लेटफॉर्म पर हानिकारक, गलत या नियमों का उल्लंघन करने वाला कंटेंट मौजूद रहता है और समय पर उस पर कार्रवाई नहीं होती, तो केवल सेफ हार्बर का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचना उचित नहीं माना जा सकता।

इसी कारण सरकार इस मामले में मेटा से जवाब और माफी की मांग कर रही है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो सेफ हार्बर से मिलने वाले कानूनी संरक्षण पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

विशेषज्ञों की राय
कई विशेषज्ञों का मानना है कि सेफ हार्बर प्रावधान के कारण कई बार सोशल मीडिया कंपनियां कंटेंट मॉडरेशन, तथ्य-जांच और आपत्तिजनक सामग्री को समय पर हटाने में पर्याप्त सक्रिय नहीं रहतीं। उनका कहना है कि यदि प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी तय होगी, तो वे गलत और हानिकारक कंटेंट पर अधिक तेजी से कार्रवाई करेंगे।

वहीं दूसरी ओर, कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि प्लेटफॉर्म पर कानूनी जिम्मेदारी बहुत अधिक बढ़ा दी जाती है, तो कंपनियां विवाद से बचने के लिए बड़ी संख्या में पोस्ट हटाने लगेंगी, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी असर पड़ सकता है।

2021 के आईटी नियम क्या कहते हैं?
सरकार ने वर्ष 2021 में लागू किए गए आईटी नियमों के तहत बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए कुछ जिम्मेदारियां तय की थीं। इन नियमों के अनुसार कंपनियों को भारत में एक मुख्य अनुपालन अधिकारी (Chief Compliance Officer – CCO), निवासी शिकायत अधिकारी (Resident Grievance Officer – RGO) और नोडल संपर्क व्यक्ति (Nodal Contact Person) नियुक्त करना अनिवार्य किया गया है। इन अधिकारियों का उद्देश्य शिकायतों का समाधान करना, कानून का पालन सुनिश्चित करना और सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखना है। 

@followers #ITSupport #ITRules2021 #ITRules #company #companyrules #DigitalBusiness #digitalcreator #digital #DigitalTransformation #digitalmarketing #metachallenge
#छत्तीसगढ़ #chhattisgarh #ChhattisgarhNews
#लोरमी_को_सौगात #लोरमी_के_गौरव #लोरमीमुंगेलीन्यूज़ #lormimungelinews #छत्तीसगढ़_के_माटी #छत्तीसगढ़_महतारी #छत्तीसगढ़ 
#LocalNews
#BreakingNews
#BigBreakingNews
#todaynews
#IndiaNews
#NationalNews
#ViralNewsUpdate
#BigBreaking
#LatestUpdates
#LatestNews 
न्यूज़ के लिए कृपया फॉलो करें धन्यवाद👇👇👇
https://www.facebook.com/LORMIMUNGELINEWS?sk=followers

#पीएम #मोदी की #वीडियो हटाने पर बढ़ा विवाद, #meta को #सेफहार्बर बंद करने की चेतावनी, जानिए क्या है यह क्लॉज #technology #Desk #प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा एक वीडियो फेसबुक से हटाए जाने के बाद विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले ने अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर गंभीर रूप ले लिया है। संसद की सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने इस घटना को गंभीर बताते हुए मेटा (Meta) के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। बताया जा रहा है कि उन्हें इसके लिए तीन दिन का समय दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, यदि तय समय के भीतर उचित जवाब नहीं मिलता है, तो दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय समिति सोशल मीडिया कंपनियों को मिलने वाले सेफ हार्बर संरक्षण पर विचार कर सकती है। इसी वजह से एक बार फिर सेफ हार्बर क्लॉज चर्चा का विषय बन गया है। क्या है पूरा मामला? बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो फेसबुक से हटा दिया गया, जिसके बाद इसे लेकर राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे। आरोप लगाया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने बिना पर्याप्त कारण बताए वीडियो हटाया। इस घटना को लेकर संसदीय समिति ने कड़ा रुख अपनाया है और मेटा से स्पष्टीकरण मांगा है। क्या होता है सेफ हार्बर क्लॉज? सेफ हार्बर प्रावधान सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत दिया गया कानूनी संरक्षण है। इसके तहत फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (पूर्व में ट्विटर) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को उनके यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं माना जाता। इसका मतलब यह है कि यदि कोई व्यक्ति सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट, फोटो, वीडियो या टिप्पणी साझा करता है, तो उसकी कानूनी जिम्मेदारी उस व्यक्ति की होती है, न कि प्लेटफॉर्म की। प्लेटफॉर्म केवल एक मध्यस्थ (Intermediary) की भूमिका निभाता है। आसान भाषा में समझें मान लीजिए किसी व्यक्ति ने फेसबुक पर आपत्तिजनक या कानून का उल्लंघन करने वाला कोई पोस्ट किया। मौजूदा सेफ हार्बर प्रावधान के अनुसार, उस पोस्ट के लिए जिम्मेदार वही व्यक्ति होगा जिसने उसे साझा किया है। फेसबुक पर सीधे कार्रवाई नहीं होगी, जब तक कि वह कानून के अनुसार आवश्यक कदम उठाने में विफल न रहे। लेकिन यदि सेफ हार्बर का संरक्षण हटा दिया जाता है, तो ऐसे मामलों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। यानी यूजर के साथ-साथ प्लेटफॉर्म के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। किन कंपनियों पर पड़ेगा असर? यदि सेफ हार्बर क्लॉज हटाया जाता है, तो इसका सबसे अधिक असर फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पड़ेगा। इसके अलावा क्लाउड कंप्यूटिंग, मेटावर्स, ब्लॉकचेन, क्रिप्टोकरेंसी, डीपफेक और डॉक्सिंग जैसी डिजिटल सेवाओं से जुड़ी कंपनियों के लिए भी कानूनी जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। ऐसी स्थिति में कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कंटेंट की अधिक निगरानी करनी पड़ सकती है और नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। सरकार का क्या कहना है? सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को पूरी तरह कानूनी छूट नहीं मिलनी चाहिए। यदि किसी प्लेटफॉर्म पर हानिकारक, गलत या नियमों का उल्लंघन करने वाला कंटेंट मौजूद रहता है और समय पर उस पर कार्रवाई नहीं होती, तो केवल सेफ हार्बर का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचना उचित नहीं माना जा सकता। इसी कारण सरकार इस मामले में मेटा से जवाब और माफी की मांग कर रही है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो सेफ हार्बर से मिलने वाले कानूनी संरक्षण पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों की राय कई विशेषज्ञों का मानना है कि सेफ हार्बर प्रावधान के कारण कई बार सोशल मीडिया कंपनियां कंटेंट मॉडरेशन, तथ्य-जांच और आपत्तिजनक सामग्री को समय पर हटाने में पर्याप्त सक्रिय नहीं रहतीं। उनका कहना है कि यदि प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी तय होगी, तो वे गलत और हानिकारक कंटेंट पर अधिक तेजी से कार्रवाई करेंगे। वहीं दूसरी ओर, कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि प्लेटफॉर्म पर कानूनी जिम्मेदारी बहुत अधिक बढ़ा दी जाती है, तो कंपनियां विवाद से बचने के लिए बड़ी संख्या में पोस्ट हटाने लगेंगी, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी असर पड़ सकता है। 2021 के आईटी नियम क्या कहते हैं? सरकार ने वर्ष 2021 में लागू किए गए आईटी नियमों के तहत बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए कुछ जिम्मेदारियां तय की थीं। इन नियमों के अनुसार कंपनियों को भारत में एक मुख्य अनुपालन अधिकारी (Chief Compliance Officer – CCO), निवासी शिकायत अधिकारी (Resident Grievance Officer – RGO) और नोडल संपर्क व्यक्ति (Nodal Contact Person) नियुक्त करना अनिवार्य किया गया है। इन अधिकारियों का उद्देश्य शिकायतों का समाधान करना, कानून का पालन सुनिश्चित करना और सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखना है। @followers #ITSupport #ITRules2021 #ITRules #company #companyrules #DigitalBusiness #digitalcreator #digital #DigitalTransformation #digitalmarketing #metachallenge #छत्तीसगढ़ #chhattisgarh #ChhattisgarhNews #लोरमी_को_सौगात #लोरमी_के_गौरव #लोरमीमुंगेलीन्यूज़ #lormimungelinews #छत्तीसगढ़_के_माटी #छत्तीसगढ़_महतारी #छत्तीसगढ़ #LocalNews #BreakingNews #BigBreakingNews #todaynews #IndiaNews #NationalNews #ViralNewsUpdate #BigBreaking #LatestUpdates #LatestNews न्यूज़ के लिए कृपया फॉलो करें धन्यवाद👇👇👇 https://www.facebook.com/LORMIMUNGELINEWS?sk=followers

Lormi, Mungeli | Aug 6, 2026

#भारत #म्यांमार #जमीन की अदला-बदली करेंगेः सीमा विवाद सुलझाने की दिशा में बड़ा कदम, इधर मणिपुर में सुलगने लगी विरोध की चिंगारी

India-Myanmar Border Dispute: भारत-म्यांमार सीमा विवाद सुलझाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सीमा विवाद सुलझाने के लिए भारत-म्यांमार जमीन की अदला-बदली करेंगे। वर्षों से लंबित सीमा सीमांकन का मामला सुलझाने की दिशा में बातचीत शुरू भी हो गई है। हालांकि इस प्रस्ताव ने मणिपुर में राजनीतिक और सामाजिक विरोध की आहट पैदा कर दी है। जमीन की अदला-बदली की लेकर मणिपुर में विरोध की चिंगारी सुलगने लगी है। पहले ही 2 साल से अधिक दिनों से हिंसा की आग में जल रहे मणिपुर के लिए यह फैसला आग में घी डालने का काम कर सकती है और स्थिति विध्वंसक हो सकती है।

दरअसल भारत-म्यांमार सीमा विवाद पर 4 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सीमा पर कुछ ऐसे इलाके हैं जिन्हें अभी सुलझाया जाना बाकी है. उन हिस्सों पर बातचीत चल रही है। हालांकि उन्होंने इन खबरों की पुष्टि नहीं की कि दोनों देशों के बीच जमीन की अदला-बदली हो सकती है।

वहीं प्रस्तावित योजना का मणिपुर में पहले ही विरोध शुरू हो गया है। ‘कोऑर्डिनेटिंग कमिटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी’ (COCOMI) ने भारत सरकार को चेतावनी दी है कि वह राज्य के इलाके का एक छोटा सा हिस्सा भी म्यांमार को न सौंपे। संगठन ने कहा कि अगर ऐसा कोई प्रस्ताव लागू किया जाता है, तो वे इसके खिलाफ जबरदस्त जन-विरोध करेंगे। संगठन ने आगे चेतावनी दी कि नई दिल्ली को मणिपुर के लोगों की सहमति के बिना उसकी क्षेत्रीय अखंडता को प्रभावित करने वाला कोई भी फैसला लेकर ‘आग से नहीं खेलना’ चाहिए। COCOMI संगठनन ने तर्क दिया कि 1949 में भारतीय संघ में विलय के बाद से मणिपुर ने अपने ऐतिहासिक इलाके के कुछ हिस्से पहले ही खो दिए हैं। चेतावनी दी कि राज्य की भौगोलिक सीमाओं में और कोई भी कटौती मंज़ूर नहीं होगी, जैसा कि ‘द इम्फाल टाइम्स’ ने रिपोर्ट किया। मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता को ऐसा मुद्दा बताते हुए जिस पर कोई समझौता नहीं हो सकता, संगठन ने कहा कि राज्य की मौजूदा सीमाएँ पिछली पीढ़ियों से विरासत में मिली हैं और समय-समय पर उनकी रक्षा की गई है।इतिहास

भारत और म्यांमार के बीच 1,643 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा इतिहास

बता दें कि भारत और म्यांमार के बीच 1,643 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है जो अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से होकर गुजरती है और फिर म्यांमार के सगाइंग क्षेत्र और चिन राज्य में जाती है। सीमा का ज्यादातर हिस्सा पहाड़ी, जंगली और खुला है, जो उन जातीय समुदायों के इलाकों से होकर गुजरता है जो दोनों तरफ रहते आए हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार, सीमा के लगभग 1,472 किलोमीटर हिस्से को बॉर्डर पिलर के जरिए तय किया गया है, जबकि लगभग 171 किलोमीटर हिस्सा अभी भी अनसुलझा है। यह मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश के लोहित सेक्टर और मणिपुर की काबाव घाटी में है।

अमेरिकी मैगज़ीन ‘द डिप्लोमैट’ ने किया है दावा

बता दें कि यह दावा अमेरिका की मैगज़ीन ‘द डिप्लोमैट’ (The Diplomat) ने की है। अमेरिकी मैगज़ीन की रिपोर्ट के मुताबिक अदला-बदली के लिए प्रस्तावित इलाका मणिपुर के चंदेल जिले में है, जो म्यांमार के सगाइंग क्षेत्र में काबाव घाटी से सटा हुआ है। 17 जुलाई की रिपोर्ट में मैगजीन ने कहा कि भारत सरकार म्यांमार के साथ मणिपुर की सीमा पर बॉर्डर पिलर 65 और 68 के बीच सीमा तय करने के लिए लगभग 1.4 वर्ग मील जमीन की अदला-बदली के ‘प्रस्ताव’ की जांच कर रही है. पिलर 65 और 68 के बीच की दूरी लगभग 2.8 किलोमीटर है। सीमा तय करने का काम तीन महीने के भीतर, यानी अगस्त के आसपास पूरा होने की उम्मीद थी। मैगजीन की रिपोर्ट के मुताबिक, जमीन की अदला-बदली के संभावित प्रस्ताव के पीछे मुख्य मकसद भारत-म्यांमार सीमा के अनसुलझे हिस्से को तय करने की प्रक्रिया में तेजी लाना है। जिससे नई दिल्ली सीमा पर बाड़ लगा सके और अवैध आप्रवासन, उग्रवादियों की आवाजाही और सीमा पार होने वाले अन्य अपराधों को रोका जा सके।

@followers #Myanmar #MyanmarNews #InternationalNews  #america #IndiaMyanmarBorder #indiamyanmarfriendship 
#छत्तीसगढ़ #chhattisgarh #ChhattisgarhNews
#लोरमी_को_सौगात #लोरमी_के_गौरव #लोरमीमुंगेलीन्यूज़ #lormimungelinews #छत्तीसगढ़_के_माटी #छत्तीसगढ़_महतारी #छत्तीसगढ़ 
#LocalNews
#BreakingNews
#BigBreakingNews
#todaynews
#IndiaNews
#NationalNews
#ViralNewsUpdate
#BigBreaking
#LatestUpdates
#LatestNews 
न्यूज़ के लिए कृपया फॉलो करें धन्यवाद👇👇👇
https://www.facebook.com/LORMIMUNGELINEWS?sk=followers

#भारत #म्यांमार #जमीन की अदला-बदली करेंगेः सीमा विवाद सुलझाने की दिशा में बड़ा कदम, इधर मणिपुर में सुलगने लगी विरोध की चिंगारी India-Myanmar Border Dispute: भारत-म्यांमार सीमा विवाद सुलझाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सीमा विवाद सुलझाने के लिए भारत-म्यांमार जमीन की अदला-बदली करेंगे। वर्षों से लंबित सीमा सीमांकन का मामला सुलझाने की दिशा में बातचीत शुरू भी हो गई है। हालांकि इस प्रस्ताव ने मणिपुर में राजनीतिक और सामाजिक विरोध की आहट पैदा कर दी है। जमीन की अदला-बदली की लेकर मणिपुर में विरोध की चिंगारी सुलगने लगी है। पहले ही 2 साल से अधिक दिनों से हिंसा की आग में जल रहे मणिपुर के लिए यह फैसला आग में घी डालने का काम कर सकती है और स्थिति विध्वंसक हो सकती है। दरअसल भारत-म्यांमार सीमा विवाद पर 4 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सीमा पर कुछ ऐसे इलाके हैं जिन्हें अभी सुलझाया जाना बाकी है. उन हिस्सों पर बातचीत चल रही है। हालांकि उन्होंने इन खबरों की पुष्टि नहीं की कि दोनों देशों के बीच जमीन की अदला-बदली हो सकती है। वहीं प्रस्तावित योजना का मणिपुर में पहले ही विरोध शुरू हो गया है। ‘कोऑर्डिनेटिंग कमिटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी’ (COCOMI) ने भारत सरकार को चेतावनी दी है कि वह राज्य के इलाके का एक छोटा सा हिस्सा भी म्यांमार को न सौंपे। संगठन ने कहा कि अगर ऐसा कोई प्रस्ताव लागू किया जाता है, तो वे इसके खिलाफ जबरदस्त जन-विरोध करेंगे। संगठन ने आगे चेतावनी दी कि नई दिल्ली को मणिपुर के लोगों की सहमति के बिना उसकी क्षेत्रीय अखंडता को प्रभावित करने वाला कोई भी फैसला लेकर ‘आग से नहीं खेलना’ चाहिए। COCOMI संगठनन ने तर्क दिया कि 1949 में भारतीय संघ में विलय के बाद से मणिपुर ने अपने ऐतिहासिक इलाके के कुछ हिस्से पहले ही खो दिए हैं। चेतावनी दी कि राज्य की भौगोलिक सीमाओं में और कोई भी कटौती मंज़ूर नहीं होगी, जैसा कि ‘द इम्फाल टाइम्स’ ने रिपोर्ट किया। मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता को ऐसा मुद्दा बताते हुए जिस पर कोई समझौता नहीं हो सकता, संगठन ने कहा कि राज्य की मौजूदा सीमाएँ पिछली पीढ़ियों से विरासत में मिली हैं और समय-समय पर उनकी रक्षा की गई है।इतिहास भारत और म्यांमार के बीच 1,643 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा इतिहास बता दें कि भारत और म्यांमार के बीच 1,643 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है जो अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से होकर गुजरती है और फिर म्यांमार के सगाइंग क्षेत्र और चिन राज्य में जाती है। सीमा का ज्यादातर हिस्सा पहाड़ी, जंगली और खुला है, जो उन जातीय समुदायों के इलाकों से होकर गुजरता है जो दोनों तरफ रहते आए हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार, सीमा के लगभग 1,472 किलोमीटर हिस्से को बॉर्डर पिलर के जरिए तय किया गया है, जबकि लगभग 171 किलोमीटर हिस्सा अभी भी अनसुलझा है। यह मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश के लोहित सेक्टर और मणिपुर की काबाव घाटी में है। अमेरिकी मैगज़ीन ‘द डिप्लोमैट’ ने किया है दावा बता दें कि यह दावा अमेरिका की मैगज़ीन ‘द डिप्लोमैट’ (The Diplomat) ने की है। अमेरिकी मैगज़ीन की रिपोर्ट के मुताबिक अदला-बदली के लिए प्रस्तावित इलाका मणिपुर के चंदेल जिले में है, जो म्यांमार के सगाइंग क्षेत्र में काबाव घाटी से सटा हुआ है। 17 जुलाई की रिपोर्ट में मैगजीन ने कहा कि भारत सरकार म्यांमार के साथ मणिपुर की सीमा पर बॉर्डर पिलर 65 और 68 के बीच सीमा तय करने के लिए लगभग 1.4 वर्ग मील जमीन की अदला-बदली के ‘प्रस्ताव’ की जांच कर रही है. पिलर 65 और 68 के बीच की दूरी लगभग 2.8 किलोमीटर है। सीमा तय करने का काम तीन महीने के भीतर, यानी अगस्त के आसपास पूरा होने की उम्मीद थी। मैगजीन की रिपोर्ट के मुताबिक, जमीन की अदला-बदली के संभावित प्रस्ताव के पीछे मुख्य मकसद भारत-म्यांमार सीमा के अनसुलझे हिस्से को तय करने की प्रक्रिया में तेजी लाना है। जिससे नई दिल्ली सीमा पर बाड़ लगा सके और अवैध आप्रवासन, उग्रवादियों की आवाजाही और सीमा पार होने वाले अन्य अपराधों को रोका जा सके। @followers #Myanmar #MyanmarNews #InternationalNews #america #IndiaMyanmarBorder #indiamyanmarfriendship #छत्तीसगढ़ #chhattisgarh #ChhattisgarhNews #लोरमी_को_सौगात #लोरमी_के_गौरव #लोरमीमुंगेलीन्यूज़ #lormimungelinews #छत्तीसगढ़_के_माटी #छत्तीसगढ़_महतारी #छत्तीसगढ़ #LocalNews #BreakingNews #BigBreakingNews #todaynews #IndiaNews #NationalNews #ViralNewsUpdate #BigBreaking #LatestUpdates #LatestNews न्यूज़ के लिए कृपया फॉलो करें धन्यवाद👇👇👇 https://www.facebook.com/LORMIMUNGELINEWS?sk=followers

Lormi, Mungeli | Aug 6, 2026