डंडों से भीड़ हटाई जा सकती है... लेकिन सवाल नहीं।
युवा जब सड़क पर उतरता है, तो वह सिर्फ़ विरोध नहीं करता, बल्कि अपने भविष्य, अपने अधिकार और अपनी उम्मीदों की आवाज़ उठाता है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना ज़रूरी है, लेकिन लोकतंत्र की असली ताकत संवाद में होती है, बल प्रयोग में नहीं।
यह किसी दल या विचारधारा का पक्ष नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों पर एक सवाल है।
क्या हर विरोध का जवाब लाठी हो सकता है?