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पुरे भिवानी जिले मे कही से भी घर बैठे बिजली से जुड़े उपकरण जैसे RO, gas गिजर, AC, washing मशीन, cooler ठीक करवाए #repair

Bhiwani, Bhiwani | May 24, 2024

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परमात्मा को पाने का एकमात्र सरल मार्ग सच्चा प्रेम और समर्पण : अनीता शास्त्री
श्रीमद् भागवत कथा राजा अम्बरीष और महर्षि दुर्वासा के प्रसंग से समझाया निष्कपट भक्ति का महत्व
भिवानी, 05 जून : स्थानीय भीम स्टेडियम रोड पर सदर थाना के पास स्थित शिव मंदिर में जारी सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन शुक्रवार को कथाव्यास अनीता शास्त्री (अनीता शांडिल्य) द्वारा श्रद्धालुओं को प्रभु भक्ति, मानव जीवन के मूल्यों और विभिन्न पौराणिक प्रसंगों का रसपान कराया गया। कथा के मुख्य विचार को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि परमात्मा को पाने का एकमात्र सरल मार्ग सच्चा प्रेम और समर्पण ही है। अहंकार कभी भी मनुष्य का भला नहीं कर सकता, क्योंकि अहंकार प्रभु भक्ति में सबसे बड़ा बाधक है, साधक नहीं। कथा के दौरान अनीता शास्त्री ने मनु वंश की महिमा का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार राजर्षि सत्यव्रत ने भगवान की सेवा से ज्ञान प्राप्त किया और वही इस कल्प के वैवस्वत मनु हुए। उन्होंने सृष्टि की उत्पत्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संसार के आधारभूत परम पुरुष परमात्मा की नाभि से एक स्वर्णिम कमल कोष प्रकट हुआ और फिर ब्रह्मा जी का चतुर्मुख आविर्भाव हुआ। इसके बाद ब्रह्मा जी के मन से मरीचि आदि ऋषि पैदा हुए। कथाव्यास ने मनु वंश के पवित्र और कीर्तिवान पुरुषों के पराक्रम का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कश्यप ऋषि से दक्षनन्दिनी अदिति के वंश के वर्णन के साथ-साथ इक्ष्वाकु, नृग, शर्याति, नभग, अम्बरीष, विकुक्ष, युवनाश्व, कुवलयाश्व, प्रद्युम्न, त्रिशंकु, हरिश्चंद्र (रोहिताश्व), सगर, दिलीप, भागीरथ सहित सूर्यवंश व चंद्रवंश के महान राजाओं के इतिहास को श्रद्धालुओं के समक्ष रखा। मुख्य रूप से अनीता शांडिल्य ने राजा अम्बरीष के जीवन चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि राजा अम्बरीष राजाओं के राजा होने के बावजूद त्याग और तपस्या की साक्षात् मूर्ति थे। वे ईश्वर की भक्ति को ही अपने जीवन का असली लक्ष्य मानते थे। उन्होंने कहा कि ऐसे अनन्य भक्तों की रक्षा के लिए भगवान सदैव तत्पर रहते हैं। कथा के सबसे मार्मिक प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि प्रभु ने दुर्वासा ऋषि के श्राप से पूर्व ही अपने परम भक्त अम्बरीष की रक्षा के लिए सुदर्शन चक्र को नियुक्त कर रखा था। जब दुर्वासा के क्रोध के कारण सुदर्शन चक्र उनके पीछे पड़ा, तो वे अपनी रक्षा के लिए ब्रह्मा जी, शिव जी और अंत में भगवान विष्णु जी के पास गए। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं को जीवन का सार समझाते हुए अनीता शांडिल्य ने कहा कि ईश्वर या प्रभुभक्त से द्वेष और नफरत करने वाले का अंत हमेशा बुरा होता है। अहंकार कभी भी मनुष्य का कल्याण नहीं कर सकता। इसके विपरीत, जब व्यक्ति सत्य के मार्ग पर चलता है, तो उसे किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता। संसार की सभी भौतिक चीजें क्षणभंगुर हैं, इसलिए ईश्वर और प्रभु पर पूरा भरोसा रखकर मनुष्य को हमेशा अपने श्रेष्ठ कर्म करते रहना चाहिए।

परमात्मा को पाने का एकमात्र सरल मार्ग सच्चा प्रेम और समर्पण : अनीता शास्त्री श्रीमद् भागवत कथा राजा अम्बरीष और महर्षि दुर्वासा के प्रसंग से समझाया निष्कपट भक्ति का महत्व भिवानी, 05 जून : स्थानीय भीम स्टेडियम रोड पर सदर थाना के पास स्थित शिव मंदिर में जारी सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन शुक्रवार को कथाव्यास अनीता शास्त्री (अनीता शांडिल्य) द्वारा श्रद्धालुओं को प्रभु भक्ति, मानव जीवन के मूल्यों और विभिन्न पौराणिक प्रसंगों का रसपान कराया गया। कथा के मुख्य विचार को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि परमात्मा को पाने का एकमात्र सरल मार्ग सच्चा प्रेम और समर्पण ही है। अहंकार कभी भी मनुष्य का भला नहीं कर सकता, क्योंकि अहंकार प्रभु भक्ति में सबसे बड़ा बाधक है, साधक नहीं। कथा के दौरान अनीता शास्त्री ने मनु वंश की महिमा का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार राजर्षि सत्यव्रत ने भगवान की सेवा से ज्ञान प्राप्त किया और वही इस कल्प के वैवस्वत मनु हुए। उन्होंने सृष्टि की उत्पत्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संसार के आधारभूत परम पुरुष परमात्मा की नाभि से एक स्वर्णिम कमल कोष प्रकट हुआ और फिर ब्रह्मा जी का चतुर्मुख आविर्भाव हुआ। इसके बाद ब्रह्मा जी के मन से मरीचि आदि ऋषि पैदा हुए। कथाव्यास ने मनु वंश के पवित्र और कीर्तिवान पुरुषों के पराक्रम का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कश्यप ऋषि से दक्षनन्दिनी अदिति के वंश के वर्णन के साथ-साथ इक्ष्वाकु, नृग, शर्याति, नभग, अम्बरीष, विकुक्ष, युवनाश्व, कुवलयाश्व, प्रद्युम्न, त्रिशंकु, हरिश्चंद्र (रोहिताश्व), सगर, दिलीप, भागीरथ सहित सूर्यवंश व चंद्रवंश के महान राजाओं के इतिहास को श्रद्धालुओं के समक्ष रखा। मुख्य रूप से अनीता शांडिल्य ने राजा अम्बरीष के जीवन चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि राजा अम्बरीष राजाओं के राजा होने के बावजूद त्याग और तपस्या की साक्षात् मूर्ति थे। वे ईश्वर की भक्ति को ही अपने जीवन का असली लक्ष्य मानते थे। उन्होंने कहा कि ऐसे अनन्य भक्तों की रक्षा के लिए भगवान सदैव तत्पर रहते हैं। कथा के सबसे मार्मिक प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि प्रभु ने दुर्वासा ऋषि के श्राप से पूर्व ही अपने परम भक्त अम्बरीष की रक्षा के लिए सुदर्शन चक्र को नियुक्त कर रखा था। जब दुर्वासा के क्रोध के कारण सुदर्शन चक्र उनके पीछे पड़ा, तो वे अपनी रक्षा के लिए ब्रह्मा जी, शिव जी और अंत में भगवान विष्णु जी के पास गए। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं को जीवन का सार समझाते हुए अनीता शांडिल्य ने कहा कि ईश्वर या प्रभुभक्त से द्वेष और नफरत करने वाले का अंत हमेशा बुरा होता है। अहंकार कभी भी मनुष्य का कल्याण नहीं कर सकता। इसके विपरीत, जब व्यक्ति सत्य के मार्ग पर चलता है, तो उसे किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता। संसार की सभी भौतिक चीजें क्षणभंगुर हैं, इसलिए ईश्वर और प्रभु पर पूरा भरोसा रखकर मनुष्य को हमेशा अपने श्रेष्ठ कर्म करते रहना चाहिए।

Bhiwani, Bhiwani | Jun 5, 2026

शिक्षा बोर्ड में पौधारोपण कर मनाया विश्व पर्यावरण दिवस-बोर्ड अध्यक्ष
भिवानी, 05 जून, 2026 : पर्यावरण केवल पेड़ों एवं नदियों का नाम नहीं हैं। यह हमारा जीवन है। आज का दिन केवल चिंता करने का नहीं है, बल्कि चिंतन और संकल्प का है। जलवायु परिवर्तन कोई काल्पनिक खतरा नहीं है, यह हमारे सामने खड़ी सच्चाई है। हर यूवा से, बल्कि हर नागरिक से आग्रह है कि अपने जीवन के विशेष अवसरों पर एक पौधा अवश्य लगाएं। केवल लगाएं ही नहीं वरन् बड़ा होने तक उसकी ज़िम्मेदारी लें।
सिंगल यूज प्लास्टिक को पूर्णतया ना कहें और अपनी दैनिक आदतों में पानी और बिजली की बचत को शामिल करेंगे। प्रकृति हमें सब कुछ मुफ्त देती है, लेकिन उसकी एक ही शर्त है- सम्मान। अगर हम आज प्रकृति का सम्मान करेंगे तो प्रकृति हमारा भविष्य सुरक्षित करेगी।
ये उद्गगार आज विश्व पर्यावरण दिवस पर हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष श्री शंकर लाल धूपड़ ने बोर्ड परिसर में पौधारोपण कर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हम सब प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए पर्यावरण की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए अपने आवास/आसपास पौधारोपण अवश्य करें। हमारा पर्यावरण प्रदूषण के कारण प्रकृति के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस का मूल उद्देश्य हमारे वातावरण को स्वच्छ व शुद्ध रखना तथा पर्यावरण की रक्षा के लिए लोगों को जागरूक करना है। इसके लिए लोग ज्यादा से ज्यादा पौधारोपण करें व पेड़ों की कटाई न करें।
इस अवसर पर बोर्ड के उप-सचिव श्री ओ०पी० निंबीवाल, श्री जगदीश प्रसाद सैनी, सहायक सचिव श्री सुरेश शर्मा, अधीक्षक श्री सतीश वर्मा, श्री सुनील दत्त, श्री रविन्द्र व सामाजिक कार्यकर्ता श्री सुनील वर्मा नंबरदार, श्री शिव पाराशर सी०एम० विंडो एमिनेंट पर्सन, श्री खजांची लाल मित्तल एवं एडवोकेट सतपाल शर्मा द्वारा लगभग 30 फलदार, फूलदार, छायादार पौधों का रोपण किया गया। इनमें त्रिवेणी (पीपल, नीम व बरगद), जामुन, अर्जुन, शीशम के पौधे शामिल हैं। बोर्ड अध्यक्ष ने सभी अधिकारी/कर्मचारियों व उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं दी।

शिक्षा बोर्ड में पौधारोपण कर मनाया विश्व पर्यावरण दिवस-बोर्ड अध्यक्ष भिवानी, 05 जून, 2026 : पर्यावरण केवल पेड़ों एवं नदियों का नाम नहीं हैं। यह हमारा जीवन है। आज का दिन केवल चिंता करने का नहीं है, बल्कि चिंतन और संकल्प का है। जलवायु परिवर्तन कोई काल्पनिक खतरा नहीं है, यह हमारे सामने खड़ी सच्चाई है। हर यूवा से, बल्कि हर नागरिक से आग्रह है कि अपने जीवन के विशेष अवसरों पर एक पौधा अवश्य लगाएं। केवल लगाएं ही नहीं वरन् बड़ा होने तक उसकी ज़िम्मेदारी लें। सिंगल यूज प्लास्टिक को पूर्णतया ना कहें और अपनी दैनिक आदतों में पानी और बिजली की बचत को शामिल करेंगे। प्रकृति हमें सब कुछ मुफ्त देती है, लेकिन उसकी एक ही शर्त है- सम्मान। अगर हम आज प्रकृति का सम्मान करेंगे तो प्रकृति हमारा भविष्य सुरक्षित करेगी। ये उद्गगार आज विश्व पर्यावरण दिवस पर हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष श्री शंकर लाल धूपड़ ने बोर्ड परिसर में पौधारोपण कर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हम सब प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए पर्यावरण की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए अपने आवास/आसपास पौधारोपण अवश्य करें। हमारा पर्यावरण प्रदूषण के कारण प्रकृति के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस का मूल उद्देश्य हमारे वातावरण को स्वच्छ व शुद्ध रखना तथा पर्यावरण की रक्षा के लिए लोगों को जागरूक करना है। इसके लिए लोग ज्यादा से ज्यादा पौधारोपण करें व पेड़ों की कटाई न करें। इस अवसर पर बोर्ड के उप-सचिव श्री ओ०पी० निंबीवाल, श्री जगदीश प्रसाद सैनी, सहायक सचिव श्री सुरेश शर्मा, अधीक्षक श्री सतीश वर्मा, श्री सुनील दत्त, श्री रविन्द्र व सामाजिक कार्यकर्ता श्री सुनील वर्मा नंबरदार, श्री शिव पाराशर सी०एम० विंडो एमिनेंट पर्सन, श्री खजांची लाल मित्तल एवं एडवोकेट सतपाल शर्मा द्वारा लगभग 30 फलदार, फूलदार, छायादार पौधों का रोपण किया गया। इनमें त्रिवेणी (पीपल, नीम व बरगद), जामुन, अर्जुन, शीशम के पौधे शामिल हैं। बोर्ड अध्यक्ष ने सभी अधिकारी/कर्मचारियों व उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं दी।

Bhiwani, Bhiwani | Jun 5, 2026