जेसिका लाल दिल्ली की एक उभरती हुई मॉडल थीं, जो अतिरिक्त आमदनी के लिए अन्य मॉडलों की तरह खाली समय में बारटेंडर का काम भी करती थीं। उन दिनों दिल्ली में यह एक प्रचलित व्यावसायिक व्यवस्था थी; उच्च स्तरीय रेस्तराँ और क्लबों में आकांक्षी मॉडलें अतिरिक्त आय के लिए बारटेंडिंग का कार्य संभालती थीं।
महरौली स्थित “क़ुतुब कॉलोनेड” रेस्तराँ में उस दिन जेसिका बारटेंडर की भूमिका में थीं, जब रात लगभग दो बजे मनु शर्मा अपने तीन मित्रों के साथ वहाँ पहुँचा और शराब की माँग की। साढ़े बारह बजे के बाद सेवा बंद करने के नियम के तहत जेसिका ने उसे मना कर दिया। इसके बाद मनु शर्मा ने अतिरिक्त पैसे देने का प्रस्ताव भी रखा, किंतु जेसिका के इंकार पर मनु शर्मा (जिसका दूसरा नाम सिद्धार्थ शर्मा भी था) ने तत्काल गोली चला दी, जिससे जेसिका की मृत्यु हो गई।
सांसद विनोद शर्मा के पुत्र मनु उर्फ़ सिद्धार्थ शर्मा को प्रारम्भिक मुकदमे में बरी कर दिया गया था, किंतु ठोस साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर उच्च न्यायालय ने 2006 में उसे आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई। बाद में अच्छे आचरण के आधार पर 2020 में मनु शर्मा रिहा हो गया। यद्यपि जेसिका की बहन सबरीना ने इस निर्णय का पुरज़ोर विरोध किया। मनु को सज़ा दिलाने के लिए सबरीना ने अथक संघर्ष किया, गवाहों से मिलना, उनसे सहयोग माँगना और पूरे मामले को जीवित बनाए रखना। यहाँ तक कहा जाता है कि यदि सबरीना न होतीं, तो मनु शर्मा सज़ा से बच निकलता।
तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद सिद्धार्थ शर्मा ने हरियाणा के इंद्री गाँव की एक बंद पड़ी शुगर मिल से “इंद्री” नामक सिंगल माल्ट व्हिस्की लॉन्च की। आज इंद्री भारत की सबसे चर्चित व्हिस्कियों में गिनी जाती है। देश में अनेक पुरस्कार जीतने के बाद इसका नाम विश्व की उत्कृष्ट व्हिस्कियों में भी शामिल हुआ। वर्तमान में दुनिया के अनेक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के ड्यूटी-फ्री स्टोर्स पर इंद्री उपलब्ध है।
क्या यह महज़ सौन्दर्यबोध का संयोग है या किसी निर्दोष की हत्या से उपजे सामूहिक संताप का अनकहा प्रतिबिंब, कहना कठिन है; पर जेसिका के माथे की लाल बिंदी दुनिया भर में प्रतिष्ठा पाने वाली इंद्री के इ’ माथे भी शोभती है।
यह संयोग ऐसा विचित्र बिम्ब बन सामने आया है कि जब इंद्री की बोतल पर सजी वह लाल बिंदी नज़र आती है, तो वह केवल एक डिज़ाइन भर नहीं रह जाती; अनायास ही जेसिका की स्मृति को छू जाती है। एक मासूम की अकारण हत्या की स्मृति, न्याय की ख़ातिर सबरीना के संघर्ष की स्मृति!
जेसिका की हत्या इतिहास के पन्नों से समाप्त नहीं होतीं यह प्रतीक, संकेत और संयोगों के रूप में हमारे साथ बनी रहेगी !! ✍️ प्रियंका ओम