पूरा मामला गुरुआ प्रखंड के उसेवा गांव का है। गांव में रोज़ की तरह चूल्हे जल रहे थे, लेकिन मजदूर सतीश दास के घर उस शाम मातम लिखी जा चुकी थी। उनका पांच वर्षीय बेटा प्रशांत कुमार अचानक तेज बुखार से कांपने लगा। गरीब पिता के पास न संसाधन थे, न सही जानकारी। सरकारी अस्पताल दूर था, मजबूरी में परिजनों ने गांव के ही एक निजी क्लिनिक पर भरोसा कर लिया।