भामाशाहों के सहयोग से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय परलीका में चार नए कक्षों का शिलान्यास
मुख्यमंत्री जनसहभागिता विद्यालय विकास योजना के तहत होगा निर्माण, विद्यार्थियों को मिलेगा बेहतर अध्ययन वातावरण
नोहर 5 अगस्त। शिक्षा के क्षेत्र में जनसहयोग की प्रेरक मिसाल पेश करते हुए राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, परलीका में बुधवार को भामाशाहों के सहयोग से बनने वाले चार नए कक्षों का विधि-विधान के साथ शिलान्यास किया गया। मुख्यमंत्री जनसहभागिता विद्यालय विकास योजना के अंतर्गत बनने वाले इन कक्षों से विद्यालय में विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं और अध्ययन के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध होगा।
विद्यालय प्रशासन के अनुसार प्रथम कक्ष का निर्माण स्वर्गीय रावताराम बेनीवाल की स्मृति में उनके पुत्र दारा सिंह, जसवंत तथा जगदीश बेनीवाल द्वारा कराया जाएगा। द्वितीय कक्ष स्वर्गीय होशियारी लाल बेनीवाल की स्मृति में उनकी धर्मपत्नी गोमती देवी तथा पुत्र रमेश और दिनेश बेनीवाल के सहयोग से बनाया जाएगा।
इसी प्रकार तृतीय कक्ष का निर्माण स्वर्गीय लालचंद बेनीवाल की स्मृति में उनके पुत्र डॉ. दिलीप, रामकुमार, पृथ्वी सिंह एवं तुलसीराम (साहबराम) बेनीवाल द्वारा तथा चतुर्थ कक्ष स्वर्गीय मनफूल गोदारा की स्मृति में उनके पुत्र अमर सिंह, रामस्वरूप एवं भागमल गोदारा द्वारा कराया जाएगा।
शिलान्यास समारोह में ग्राम पंचायत एवं क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। कार्यक्रम में सरपंच बृजलाल, जिला परिषद सदस्य दीपचंद, पंचायत समिति सदस्य राजाराम सहारण, उपसरपंच दयाराम बेनीवाल, महेश लाटा, कृष्ण धानिया, पीरदान, रणजीत गोदारा, खुशी मोहम्मद, भंवर सहारण, अजीत पाल बेनीवाल, नत्थू बेनीवाल, सत्यनारायण बेनीवाल एवं सत्यनारायण गोदारा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
विद्यालय परिवार की ओर से प्रधानाचार्य महिपाल, डॉ. सत्यनारायण सोनी, भूप सिंह, कुलदीप भांभू, दिलीप बाना, कृष्ण लाटा सहित समस्त शिक्षक एवं कर्मचारी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य महिपाल ने सभी भामाशाहों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के सहयोग से शिक्षा का आधार और अधिक मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि नए कक्षों के निर्माण से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बेहतर वातावरण मिलेगा तथा यह पहल अन्य लोगों को भी शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए प्रेरित करेगी।
ग्रामीणों ने भी भामाशाहों की इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज और शिक्षा के प्रति उनकी जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। विद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम का समापन सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।