टाइगर अभी जिंदा है' — जब सिस्टम की बेरुखी और बाढ़ के पानी ने गरीबों को घेरा, तब एक बार फिर मसीहा बनकर सामने आए 'टाइगर यादव'!
बिहार के जमनिया गांव से विस्थापित होकर बसे लोगों के लिए आज भी बाढ़ और जलजमाव का दर्द वैसा ही है। भरत तिवारी ने इसी बात के लिए अपनी आवाज उठाई थी कि इस जगह पर 8-9 फीट मिट्टी भराई जाए ताकि गरीब परिवारों का आशियाना पानी में न डूबे। लेकिन उनकी इस जायज मांग को दबाने का नतीजा सबने देखा।
आज जमीनी हकीकत यह है कि पूरा गांव एक बार फिर पानी में डूब चुका है। जब जलभराव ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया, तब नेता, मंत्री और विधायक सब गायब हो गए। लेकिन ऐसे वक्त में जहां सिस्टम ने हाथ खड़े कर दिए, वहां बिहार के रियल हीरो टाइगर यादव डटकर खड़े हैं।
बेसहारा लोगों की ढाल बने टाइगर यादव
अंधेरे में उजाला: गांव जब-जब अंधेरे में डूबा, टाइगर यादव ने खुद पहल करके वहां लाइट की व्यवस्था कराई।
राशन और स्वास्थ्य सेवा: बाढ़ के संकट में दर्जनों बार भूखे परिवार�