आदिवासी गौरव का क्षण। ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने धार्मेंजय हेम्ब्रम के गीत का किया जिक्र
दुमका। जामताड़ा के हिदलजोड़ी गांव के धार्मेंजय हेम्ब्रम के संथाली गीत ‘जांगा रे पायगान’ का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में उल्लेख किया। कवि, साहित्यकार, अनुवादक, गीतकार और गायक धार्मेंजय संथाली साहित्य की नई पीढ़ी के सशक्त हस्ताक्षर हैं।
• संताल हूल पर आधारित ‘जांगा रे पायगान’ को राष्ट्रीय पहचान मिली।
• किसान परिवार से आने वाले धार्मेंजय ने सीमित संसाधनों के बीच साहित्य को साधना बनाया।
• उनकी रचनाओं में प्रकृति, प्रेम, संघर्ष, भाषा-संस्कृति और आदिवासी अस्मिता की झलक मिलती है।
• उनकी चर्चित संथाली कविता संग्रह ‘दुलाइ रेयाक् मेत्’ काफी सराही गई है।
• हिंदी की महत्वपूर्ण पुस्तकों का संथाली में अनुवाद भी किया है।
• उन्हें संताल यूथ आइकॉन-2025 से सम्मानित किया जा चुका है।
• वर्तमान में वे भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर में संथाली भाषा के संरक्षण और विकास से जुड़े कार्य कर रहे हैं।
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