सावन में मछली किसका पेटेंट...?
क्या इसपर होगा कोई नया बवाल...?
अयोध्या के तारुन में आज कांग्रेस का कार्यकर्ता सम्मेलन था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय मुख्य अतिथि थे। सम्मेलन में भोज की चर्चा है और मीडिया में यह बात भी सामने आ रही है कि भोजन में अन्य व्यंजनों के साथ मछली भी परोसी गई।
अब सवाल सिर्फ कांग्रेस से नहीं, कांग्रेस और बीजेपी दोनों से है—
क्या सावन में मछली खाना किसी एक राजनीतिक दल का पेटेंट है?
अगर सावन में मछली खाना गलत है, तो यह नियम सिर्फ राजनीति के लिए लागू होगा या समाज के हर व्यक्ति पर?
और अगर धार्मिक आस्था की बात है, तो क्या हर व्यक्ति की अपनी आस्था, परंपरा और खान-पान की स्वतंत्रता नहीं है?
राजनीति में कांग्रेस हो या बीजेपी, खान-पान को मुद्दा बनाने से पहले यह समझना जरूरी है कि भारत विविधताओं का देश है। किसी के लिए सावन में व्रत-उपवास आस्था है, तो किसी के लिए खान-पान व्यक्तिगत पसंद और परंपरा का विषय।
और हां...
मछली को कुछ इलाकों में मजाकिया अंदाज में “जल तरोई” भी कह देते हैं!
सवाल मछली का कम, राजनीति का ज्यादा है—
सावन में मछली का पेटेंट आखिर किसके पास है...?
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Sohawal, Faizabad | Aug 23, 2026