विश्व प्रसिद्ध भगवान श्री जगन्नाथ रथ यात्रा, पुरी (ओडिशा) का भव्य वार्षिक उत्सव है। इस पावन अवसर पर भगवान श्री जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा 12वीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक यात्रा करते हैं। इस दौरान लाखों श्रद्धालु लगभग 3 किलोमीटर लंबे बड़ा डांडा (ग्रैंड एवेन्यू) मार्ग पर तीनों विशाल, नए निर्मित लकड़ी के रथों को खींचने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।
इस महापर्व का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत विशेष है—
🔸 देवताओं के रथ:
• भगवान जगन्नाथ 45 फीट ऊँचे नंदीघोष रथ पर विराजमान होते हैं।
• भगवान बलभद्र 44 फीट ऊँचे तलध्वज रथ पर यात्रा करते हैं।
• देवी सुभद्रा 43 फीट ऊँचे दर्पदलन रथ पर विराजमान होती हैं।
🔸 छेरा पहंरा (Chhera Pahanra):
रथ यात्रा प्रारंभ होने से पहले पुरी के गजपति महाराजा स्वर्ण झाड़ू से तीनों रथों की सफाई करते हैं। यह पवित्र परंपरा इस बात का प्रतीक है कि भगवान के समक्ष सभी समान हैं।
🔸 गुंडिचा प्रवास एवं बहुदा यात्रा:
तीनों देवता सात दिनों तक गुंडिचा मंदिर (जिसे उनकी मौसी/बुआ का घर भी माना जाता है) में विराजते हैं। इसके बाद बहुदा यात्रा के माध्यम से श्री जगन्नाथ मंदिर लौटते समय मौसी माँ मंदिर में रुककर भगवान को विशेष प्रसाद पोड़ा पीठा (एक पारंपरिक मीठा पकवान) अर्पित किया जाता है।
🙏 जय जगन्नाथ 🙏
Ambala, Ambala | Jul 16, 2026