कलाकारों ने ग्रामीण जीवन की सच्चाई को मासूमियत से दर्शाया
शिल्पग्राम में नाटक ‘मीता! पंचलैट वाले’ का प्रभावशाली मंचन
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उदयपुर, 6 सितम्बर। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर द्वारा आयोजित मासिक नाट्य संध्या ‘रंगशाला’ के अंतर्गत रविवार को शिल्पग्राम स्थित दर्पण सभागार में ‘मीता! पंचलैट वाले’ नाटक का मंचन किया गया। अस्तिता फाउण्डेशन की सांस्कृतिक विंग ‘ड्रामा ड्रॉपआउट्स’, बरेली (उत्तर प्रदेश) द्वारा प्रस्तुत इस नाटक का नाट्य रूपांतरण एवं निर्देशन लव तोमर ने किया।
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर के निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने बताया कि ‘रंगशाला’ के अंतर्गत प्रत्येक माह नाट्य प्रस्तुतियों का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में ‘मीता! पंचलैट वाले’ का मंचन किया गया, जिसमें ग्रामीण परिवेश, सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
फणीश्वरनाथ रेणु की प्रसिद्ध कहानी ‘पंचलाइट’ से प्रेरित यह नाट्य प्रस्तुति ‘तीसरी कसम’, विशेष रूप से ‘महुआ घटवारिन’ के भावपूर्ण प्रसंग से भी प्रेरणा लेती है। उत्तर भारत के ग्रामीण परिवेश में रची-बसी यह कहानी गरीबी, सामाजिक ऊंच-नीच, इच्छाओं और रोजमर्रा के जीवन की गरिमा के बीच मानवीय संबंधों की पड़ताल करती है।
नाटक के केन्द्र में गोधन और मुनरी की भावनात्मक एवं प्रतीकात्मक यात्रा है। इनके रिश्ते के माध्यम से अपनेपन, इच्छा, पहचान और सामूहिक स्वीकृति जैसे प्रश्नों को सामने रखा गया। इनके इर्द-गिर्द उभरता ग्रामीण समुदाय हास्य, संवेदना, रूढ़ियों, गपशप, सामाजिक बहिष्कार और आत्मीयता से भरा दिखाई दिया।
यह प्रस्तुति रेणु की कहानी का शाब्दिक मंच रूपांतरण न होकर रोहिलखंडी भाषा-शैली, क्षेत्रीय मुहावरों और मौलिक लोक रचनाओं पर आधारित सामूहिक नाट्य शैली में साहित्यिक संसार की पुनर्कल्पना करती है। कहानी, संगीत और अभिनय के सुंदर समन्वय ने मंच को जीवंत बना दिया।
नाटक के दौरान कलाकारों ने असमानता, विपन्नता और स्वयं को कमतर समझे जाने से उपजने वाले भावों को प्रभावी ढंग से मंचित किया। ग्रामीण जीवन की सादगी और मासूमियत को कलाकारों ने सहज अभिनय के माध्यम से दर्शाया। प्रस्तुति ने यह संदेश भी दिया कि आज तमाम भौतिक सुविधाओं से संपन्न होने के बावजूद मनुष्य ऐसी चीज की तलाश में है, जो उसे वास्तविक खुशी दे सके। निरंतर दौड़ और इस खोज में वह कहीं न कहीं अकेला होता जा रहा है।
नाटक ने उस दौर की स्मृतियों को भी मंच पर जीवंत किया, जब देश में शहरों की संख्या कम और गांव अधिक थे। शहरों में पहुंचने के बाद भी लोगों के जीवन में गांव की आत्मीयता और अपनापन बना रहता था। लोग साथ रहते, बातचीत करते, लड़ते-झगड़ते और फिर साथ हो जाते थे। दिलों में मासूमियत और चेहरों पर भोलापन था। प्रस्तुति ने इसी बीते दौर को मानो समय-यात्रा के रूप में दर्शकों के सामने रखा।
नाटक के सफल मंचन में पंकज कुमार मौर्य का विशेष योगदान रहा। उन्होंने सूत्रधार, नन्हे और गजक वाले सहित विभिन्न पात्रों को प्रभावशाली ढंग से निभाने के साथ ही नाटक के संगीत पक्ष को भी मजबूती प्रदान की। सह-संगीत निर्देशक एवं गीतकार के रूप में उन्होंने ‘पंचलैट आए गयी गांव में...’ और ‘ओ गोरी घूमन न जईयो...’ जैसे गीतों की रचना की, जिन्होंने प्रस्तुति में ग्रामीण संस्कृति की मिठास घोल दी।
लव तोमर के निर्देशन और शोभित गंगवार के सह-निर्देशन में सजी इस प्रस्तुति में गोधन की भूमिका में शोभित गंगवार और मुनरी की भूमिका में आशी सिंह ने प्रभावशाली अभिनय किया। गुलरी चाची के रूप में माधुरी कश्यप और महुआ घटवारिन के रूप में झलक गंगवार ने भी अपनी अभिनय प्रतिभा की छाप छोड़ी। अमन गुप्ता, विजय कुमार, ऋषभ शर्मा, श्रेय रस्तोगी, आयुष अग्रवाल, सिद्धी रस्तोगी एवं कपिल ने अन्य किरदारों को जीवंत किया।
दर्शकों से खचाखच भरे दर्पण सभागार में प्रस्तुत नाटक को दर्शकों ने खूब सराहा। कलाकारों के अभिनय, लोकभाषा, संगीत और ग्रामीण परिवेश के जीवंत चित्रण ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।
इस अवसर पर केन्द्र के उपनिदेशक (कार्यक्रम) पवन अमरावत, सहायक निदेशक (वित्त एवं लेखा)दुर्गेश चांदवानी, अधीक्षण अभियंता सी.एल. सालवी, कार्यक्रम अधिशासी राकेश मेहता, हेमंत मेहता सहित केन्द्र के अधिकारी-कर्मचारी एवं शहर के अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सिद्धांत भटनागर ने किया।
Girwa, Udaipur | Sep 6, 2026