चित्तौड़गढ़ जिले में फर्जी तरीके से बीआईपी नंबर हासिल कर वाहनों के संचालन का बड़ा घोटाला सामने आया है। परिवहन विभाग की ओर से की गई शिकायत पर सदर थाने में इस तरह का पहला एफआईआर दर्ज किया गया है, जिसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। जांच में सामने आया है कि कुछ वाहनों के ऑनलाइन पंजीयन रिकॉर्ड और आरटीओ कार्यालय में मौजूद मूल रिकॉर्ड में भारी अंतर है। एफआईआर के अनुसार, ऑटो रिक्शा जैसे वाहनों को फर्जी दस्तावेजों के सहारे कार की श्रेणी में ऑनलाइन दर्ज कराया गया, ताकि उन्हें बीआईपी नंबर मिल सके। शुरुआती जांच में वाहन संख्या आरजेएसएच 5656 और आरजेएच 0258 के मामलों का खुलासा हुआ है। इन दोनों वाहनों के पंजीयन प्रमाण पत्र राजस्थान मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 55(5) के तहत निरस्त कर दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि जिले में बैकलॉग प्रक्रिया के जरिए 3 से 4 दर्जन तक ऐसे वाहन पंजीकृत किए गए, जिनमें वाहन का प्रकार ही नहीं, बल्कि पंजीकृत स्वामी तक बदल दिए गए। यह घोटाला बिना विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के संभव नहीं माना जा रहा। पुलिस जांच शुरू होते ही फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों, बैकलॉग प्रक्रिया में शामिल लोगों और बीआईपी नंबर हासिल करने वाले वाहनों की पूरी नेटवर्क चेन के उजागर होने की उम्मीद जताई जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।