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Chas, Bokaro | Dec 12, 2025

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फिर आया “नो हेलमेट, नो पेट्रोल”… इस बार भी होगा कमाल या कुछ दिनों बाद फिर हो जाएगा गायब ?

Bokaro: शहर की सड़कों पर सुरक्षा का फरमान फिर दस्तक दे चुका है। यातायात पुलिस ने एक बार फिर पेट्रोल पंपों को याद दिलाया है कि “नो हेलमेट, नो पेट्रोल” नियम लागू करें। आदेश जारी होते ही पेट्रोल पंपों पर बैनर लगाने, जागरूकता फैलाने और बिना हेलमेट वालों को पेट्रोल नहीं देने की बातें शुरू हो गई हैं।  लेकिन सवाल वही पुराना है… क्या इस बार यह अभियान सच में सड़क सुरक्षा की आदत बनेगा या फिर कुछ दिनों बाद फाइलों और बैनरों में ही नजर आएगा?

##पहले भी आया था यह नियम, मगर कितने दिन चला?

“नो हेलमेट, नो पेट्रोल” का फरमान पहले भी कई बार दिया गया है। शुरुआत में पेट्रोल पंपों पर सख्ती दिखी, कुछ दिनों तक बिना हेलमेट वाले बाइक चालकों को पेट्रोल नहीं मिला, लोगों ने हेलमेट पहनना भी शुरू किया। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, नियमों की सख्ती ढीली पड़ती गई और कई जगहों पर फिर वही पुराना नजारा लौट आया।

##नियम से ज्यादा जरूरी है लगातार निगरानी

सिर्फ आदेश जारी करने और बैनर लगाने से सड़क सुरक्षा मजबूत नहीं होगी। जरूरत है कि यातायात पुलिस लगातार पेट्रोल पंपों की जांच करे और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई भी हो। वरना यह अभियान भी “कुछ दिन की सुर्खियां” बनकर रह जाएगा।

##जनता भी पूछ रही है सवाल

लोगों का कहना है कि हेलमेट पहनना अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन नियम तभी सफल होगा जब इसे बिना भेदभाव और लगातार लागू किया जाए। अब देखना होगा कि बोकारो में इस बार “नो हेलमेट, नो पेट्रोल” अभियान कितने दिन चलता है और क्या यह वास्तव में सड़क हादसों को कम करने में मददगार साबित होता है या फिर कुछ समय बाद एक और भूला हुआ अभियान बन जाता है। 

 

#Bokaro #BokaroNews #NoHelmetNoPetrol #TrafficRules #RoadSafety #BokaroPolice #JharkhandNews

फिर आया “नो हेलमेट, नो पेट्रोल”… इस बार भी होगा कमाल या कुछ दिनों बाद फिर हो जाएगा गायब ? Bokaro: शहर की सड़कों पर सुरक्षा का फरमान फिर दस्तक दे चुका है। यातायात पुलिस ने एक बार फिर पेट्रोल पंपों को याद दिलाया है कि “नो हेलमेट, नो पेट्रोल” नियम लागू करें। आदेश जारी होते ही पेट्रोल पंपों पर बैनर लगाने, जागरूकता फैलाने और बिना हेलमेट वालों को पेट्रोल नहीं देने की बातें शुरू हो गई हैं। लेकिन सवाल वही पुराना है… क्या इस बार यह अभियान सच में सड़क सुरक्षा की आदत बनेगा या फिर कुछ दिनों बाद फाइलों और बैनरों में ही नजर आएगा? ##पहले भी आया था यह नियम, मगर कितने दिन चला? “नो हेलमेट, नो पेट्रोल” का फरमान पहले भी कई बार दिया गया है। शुरुआत में पेट्रोल पंपों पर सख्ती दिखी, कुछ दिनों तक बिना हेलमेट वाले बाइक चालकों को पेट्रोल नहीं मिला, लोगों ने हेलमेट पहनना भी शुरू किया। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, नियमों की सख्ती ढीली पड़ती गई और कई जगहों पर फिर वही पुराना नजारा लौट आया। ##नियम से ज्यादा जरूरी है लगातार निगरानी सिर्फ आदेश जारी करने और बैनर लगाने से सड़क सुरक्षा मजबूत नहीं होगी। जरूरत है कि यातायात पुलिस लगातार पेट्रोल पंपों की जांच करे और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई भी हो। वरना यह अभियान भी “कुछ दिन की सुर्खियां” बनकर रह जाएगा। ##जनता भी पूछ रही है सवाल लोगों का कहना है कि हेलमेट पहनना अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन नियम तभी सफल होगा जब इसे बिना भेदभाव और लगातार लागू किया जाए। अब देखना होगा कि बोकारो में इस बार “नो हेलमेट, नो पेट्रोल” अभियान कितने दिन चलता है और क्या यह वास्तव में सड़क हादसों को कम करने में मददगार साबित होता है या फिर कुछ समय बाद एक और भूला हुआ अभियान बन जाता है। #Bokaro #BokaroNews #NoHelmetNoPetrol #TrafficRules #RoadSafety #BokaroPolice #JharkhandNews

Chas, Bokaro | Jul 8, 2026

बिना पहचान  जंगली मशरूम (खुखड़ी) खाना पड़ सकता है भारी 

#BokaroNews #JharkhandNews #HealthAlert #FoodSafety #BreakingNews

बोकारो में मानसून के दौरान जंगलों में उगने वाली जंगली मशरूम (खुखड़ी) के सेवन को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग ने लोगों को सतर्क किया है। खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी mohammad एहसान आलम ने कहा कि बिना सही पहचान के किसी भी जंगली खुखड़ी का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि कई प्रजातियां विषैली होती हैं। इनके सेवन से फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त, पेट दर्द, चक्कर, बेहोशी और गंभीर मामलों में जान का भी खतरा हो सकता है। विभाग ने लोगों से केवल प्रमाणित और सुरक्षित खाद्य पदार्थों का ही सेवन करने की अपील की है। यदि खुखड़ी खाने के बाद किसी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ती है, तो बिना देर किए उसे नजदीकी अस्पताल पहुंचाकर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

बिना पहचान जंगली मशरूम (खुखड़ी) खाना पड़ सकता है भारी #BokaroNews #JharkhandNews #HealthAlert #FoodSafety #BreakingNews बोकारो में मानसून के दौरान जंगलों में उगने वाली जंगली मशरूम (खुखड़ी) के सेवन को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग ने लोगों को सतर्क किया है। खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी mohammad एहसान आलम ने कहा कि बिना सही पहचान के किसी भी जंगली खुखड़ी का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि कई प्रजातियां विषैली होती हैं। इनके सेवन से फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त, पेट दर्द, चक्कर, बेहोशी और गंभीर मामलों में जान का भी खतरा हो सकता है। विभाग ने लोगों से केवल प्रमाणित और सुरक्षित खाद्य पदार्थों का ही सेवन करने की अपील की है। यदि खुखड़ी खाने के बाद किसी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ती है, तो बिना देर किए उसे नजदीकी अस्पताल पहुंचाकर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

Chas, Bokaro | Jul 8, 2026

1.3 किलो के नन्हे योद्धा ने जीती जिंदगी की जंग

#BokaroNews #MedicalMiracle #HopeLives #HealthcareHeroes #GoodNews

दो नन्ही किलकारियों के साथ शुरू हुई एक मां की खुशी में उस वक्त चिंता छा गई, जब जुड़वा बच्चों में से एक नवजात जिंदगी के लिए संघर्ष करने लगा। महज 1.3 किलो वजन और सांस लेने में परेशानी से जूझ रहे इस बच्चे ने बोकारो सदर अस्पताल की टीम की मेहनत से नई जिंदगी पाई।

15 जून को जन्मे जुड़वा बच्चों में से कमजोर बच्चे को गंभीर हालत में सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों और नर्सों की लगातार निगरानी, विशेष इलाज, कंगारू मदर केयर और मां के दूध की ताकत ने धीरे-धीरे चमत्कार कर दिखाया।

कुछ दिनों में बच्चे का वजन बढ़कर 1.5 किलो हो गया और सांस की परेशानी खत्म हो गई। आर्थिक परेशानी के कारण निजी अस्पताल से सदर अस्पताल पहुंचे माता-पिता लक्ष्मी देवी और सोना राम की आंखों में अब खुशी के आंसू हैं। यह सफलता साबित करती है कि सही समय पर इलाज और देखभाल मिले तो हर नन्ही जिंदगी मुस्कुरा सकती है।

1.3 किलो के नन्हे योद्धा ने जीती जिंदगी की जंग #BokaroNews #MedicalMiracle #HopeLives #HealthcareHeroes #GoodNews दो नन्ही किलकारियों के साथ शुरू हुई एक मां की खुशी में उस वक्त चिंता छा गई, जब जुड़वा बच्चों में से एक नवजात जिंदगी के लिए संघर्ष करने लगा। महज 1.3 किलो वजन और सांस लेने में परेशानी से जूझ रहे इस बच्चे ने बोकारो सदर अस्पताल की टीम की मेहनत से नई जिंदगी पाई। 15 जून को जन्मे जुड़वा बच्चों में से कमजोर बच्चे को गंभीर हालत में सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों और नर्सों की लगातार निगरानी, विशेष इलाज, कंगारू मदर केयर और मां के दूध की ताकत ने धीरे-धीरे चमत्कार कर दिखाया। कुछ दिनों में बच्चे का वजन बढ़कर 1.5 किलो हो गया और सांस की परेशानी खत्म हो गई। आर्थिक परेशानी के कारण निजी अस्पताल से सदर अस्पताल पहुंचे माता-पिता लक्ष्मी देवी और सोना राम की आंखों में अब खुशी के आंसू हैं। यह सफलता साबित करती है कि सही समय पर इलाज और देखभाल मिले तो हर नन्ही जिंदगी मुस्कुरा सकती है।

Chas, Bokaro | Jul 7, 2026