पहली बार किसी रिपोर्टर को ' इंकलाब
ज़िंदाबाद ' जैसे नारे पर एतराज करते देख रहा हूं.
ABP न्यूज की इस रिपोर्टर को इंकलाब ज़िंदाबाद जैसे नारे से दिक्कत है ?
टीवी चैनल का माइक थामने से पहले थोड़ी बहुत तो पढ़ाई की होगी ?
या बस ऐसे ही ?
आज़ादी की लड़ाई के वक्त हसरत मोहानी ने पहली बार ये नारा दिया था. भगत सिंह जैसे देशभक्त ये नारा लगाया करते थे . आज भी सत्ता और सिस्टम के खिलाफ सबसे बुलंद नारा है - इंकलाब जिंदाबाद