◆ रोडवेज डिपो पर किया चक्काजाम,1500 मजदूरों और किसानों ने दी गिरफ्तारियां
◆ किसानों-मजदूरों की मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
◆ MSP की कानूनी गारंटी, मनरेगा में 200 दिन रोजगार और चारों श्रम संहिताएं रद्द करने की उठी मांग
#hanumangarh हनुमानगढ़। 10 अगस्त 2026 को देशव्यापी जेल भरो एवं अन्य विरोध कार्यक्रमों के तहत अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS), अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन (AIAWU) एवं सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (CITU) की ओर से किसानों, खेत मजदूरों एवं श्रमिकों की विभिन्न मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम जिला प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में केंद्र सरकार से कृषि, रोजगार, श्रम एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि किसान और मजदूर कृषि संकट, बढ़ती लागत, बेरोजगारी, कर्ज और महंगाई जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। संगठनों ने आरोप लगाया कि किसानों को फसलों का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी सीमित हो रहे हैं। ज्ञापन में 9 दिसंबर 2021 को किसान आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार की ओर से किए गए विभिन्न आश्वासनों को लागू करने की भी मांग की गई। MSP की कानूनी गारंटी की मांग संगठनों ने सभी फसलों के लिए C2+50 प्रतिशत के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी देने तथा MSP पर सुनिश्चित सरकारी खरीद के लिए कानून बनाने की मांग की। इसके साथ ही किसानों की व्यापक कर्जमाफी और किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग भी रखी गई।
कॉमरेड नेता रामेश्वर वर्मा ने बताया कि श्रम संहिताएं रद्द करने और न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग ज्ञापन में चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने तथा सभी श्रमिकों के लिए 42 हजार रुपये प्रतिमाह वैधानिक न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने की मांग की गई। मनरेगा को मजबूत करते हुए प्रत्येक ग्रामीण परिवार को साल में 200 दिन रोजगार और 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। विद्युत एवं बीज विधेयक वापस लेने की मांग
संगठनों ने विद्युत निजीकरण विधेयक-2025, बीज विधेयक-2025 तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को वापस लेने की मांग की। साथ ही जबरन भूमि अधिग्रहण और कॉरपोरेट समर्थित भूमि पूलिंग पर रोक लगाने तथा किसानों और ग्रामीण समुदायों के भूमि अधिकारों की रक्षा करने की मांग की गई।
हनुमानगढ़ की स्थानीय समस्याएं भी उठाईं
ज्ञापन में हनुमानगढ़ जिले की स्थानीय समस्याओं को भी प्रमुखता से शामिल किया गया। संगठनों ने जिले की सभी ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्य तत्काल शुरू करवाने, मजदूरों को नियमित रोजगार उपलब्ध कराने और निर्धारित मजदूरी का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की। किसानों की फसलों की लाभकारी कीमत तथा MSP पर सरकारी खरीद की व्यवस्था करने और किसानों एवं खेत मजदूरों की स्थानीय समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग भी रखी गई। इसके अलावा भारतीय खाद्य निगम (FCI) को मजबूत करने, साइलो के निजीकरण पर रोक लगाने, उर्वरकों की कमी एवं कालाबाजारी समाप्त करने तथा किसानों को उचित दर पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने की मांग की गई। पेट्रोल-डीजल एवं उर्वरकों की कीमतों को नियंत्रित करने, फसल एवं पशुधन के लिए प्रभावी सार्वजनिक बीमा योजना लागू करने और प्रत्येक खेत तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
संगठनों ने 60 वर्ष से अधिक आयु के किसानों को 10 हजार रुपये प्रतिमाह सामाजिक सुरक्षा पेंशन देने, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों एवं ग्रामीण परिवारों को समयबद्ध राहत उपलब्ध कराने तथा कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा के लिए सार्वजनिक निवेश बढ़ाने की मांग की। सहकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को कॉरपोरेट कब्जे से बचाने की मांग भी उठाई गई।
ज्ञापन के अंत में संगठनों ने राष्ट्रपति से किसानों, खेत मजदूरों एवं श्रमिकों की मांगों पर केंद्र सरकार को आवश्यक संदेश/निर्देश देने तथा समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी पहल करने का आग्रह किया। कार्यक्रम में अखिल भारतीय किसान सभा, अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन एवं सीटू से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया।