दो सप्ताह बाद फूटा "लेटर बम"… या सच पर पड़ा पर्दा?
नगर पालिका परिषद् उरई की कथित भ्रष्टाचार अनियमितताओं को लेकर एक नहीं, दो नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग पत्र सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं।
कहीं भ्रष्टाचार की जांच की मांग, कहीं जांच संयुक्त मजिस्ट्रेट को सौंपे जाने की बात, तो कहीं 17 जुलाई को जांच टीम से हटाने के आदेश की सूचना 28 जुलाई को सामने आने की चर्चा!
आख़िर इतने विरोधाभास क्यों?
सबसे बड़ा सवाल—
क्या जांच की दिशा बदली, या जांच की रफ्तार?
क्या यह सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया थी, या फिर व्यवस्था के भीतर कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब जनता जानना चाहती है?
कहा जा रहा है कि जिस जांच से कई लोगों की बेचैनी बढ़ रही थी, उसी जांच के समीकरण अचानक बदल गए। यदि ऐसा है, तो पारदर्शिता के हित में पूरा घटनाक्रम सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता और जो अधिकारी पारदर्शिता लाने की कोशिश कर रहा था उसे जॉच से क्यों हटाया आख़िर क्या वजह रही।
यदि हर विवादित भ्रष्टाचार की जांच का अंत इसी तरह होना है, तो फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री @MYogiAdityanath जी की"जीरो टॉलरेंस"नीति का बोर्ड लगाइए और नीचे छोटा-सा नोट भी लिख दीजिए— "शर्तें लागू।"
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ Yogi Adityanath Office CMO Uttar Pradesh जी लगातार भ्रष्टाचार के विरुद्ध "जीरो टॉलरेंस" की नीति की बात करते हैं। ऐसे में जनता का सीधा सवाल है।
आदरणीय District Magistrate/District Election Officer, Jalaun , Dio Jalaun क्या उरई नगर पालिका प्रकरण में ईमानदार अधिकारी श्री रिंकू सिंह राही जी को हटाने के बाद भी वही नीति पूरी कठोरता से लागू होगी?
यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हो रहा था तो फ़िर क्यों हटाना पड़ा एक IAS जांच अधिकारी को
• क्या जांच के सभी आदेश सार्वजनिक किए जायेंगे
• नगर पालिका परिषद् उरई जांच में हुए बदलाव का कारण जिले की जनता को बताया जाए।
• क्या जांच रिपोर्ट पूरी ईमानदारी से समयबद्ध तरीके से सार्वजनिक की जाएगी
• श्री मान Chief Minister Office Uttar Pradesh से विशेष अनुरोध है कि नगर पालिका परिषद् उरई की जांच निष्पक्ष स्वतंत्र एजेंसी से कराने पर भी विचार किया जाए क्योंकि जिले के उच्चाधिकारी Government of UP की छवि जनता की नजरों में ख़राब करने में उतारू हैं।
क्योंकि लोकतंत्र में सबसे बड़ा हथियार अफवाह नहीं, जनता की नजरों में पारदर्शिता होती है।
अब जवाब फाइलों से नहीं, तथ्यों से चाहिए।
Jalaun, Jalaun | Jul 28, 2026