*कोटा में ‘मेडिकल माफिया’ का खेल? मुफ्त जांच योजना के बीच निजी लैब की रिपोर्टों पर सवाल*
गलत जांच रिपोर्ट से मरीज और परिवार परेशान, निगरानी और जवाबदेही पर उठे सवाल
कोटा। शहर में अपराध और दूसरे माफियाओं की चर्चा तो अक्सर होती है, लेकिन एक ऐसा ‘मेडिकल माफिया’ भी है, जिसका असर सीधे आम परिवार की जेब और सेहत पर पड़ सकता है। मुफ्त जांच योजना के तहत होने वाली जांचों में निजी लैब की भूमिका और रिपोर्टों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
आरोप है कि कुछ मामलों में जांच रिपोर्ट में चूक या गलत रिपोर्ट सामने आने से मरीज और उनके परिजन मानसिक परेशानी के साथ आर्थिक नुकसान भी झेलने को मजबूर होते हैं। गलत रिपोर्ट के आधार पर इलाज की दिशा बदलने या अनावश्यक जांच कराने की स्थिति बन सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुफ्त जांच योजना के तहत निजी लैब में होने वाली जांचों की गुणवत्ता की निगरानी कौन करता है? यदि किसी मरीज को गलत रिपोर्ट मिलती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होती है और शिकायत के बाद क्या कार्रवाई की जाती है?
मरीजों और परिजनों की मांग है कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच हो, संदिग्ध रिपोर्टों का दोबारा परीक्षण कराया जाए और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित लैब के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
पाठकों से अपील: यदि आपके साथ भी जांच रिपोर्ट में गंभीर चूक या लापरवाही का मामला सामने आया है, तो रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज सुरक्षित रखें तथा संबंधित विभाग में शिकायत दर्ज कराएं। आपकी एक शिकायत व्यवस्था में सुधार की वजह बन सकती है।
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Ladpura, Kota | Sep 3, 2026