बाड़मेर जिले के चौहटन क्षेत्र के मिठड़ऊ गांव से सामने आया यह दृश्य पत्थर दिल इंसान को भी रुला देने वाला था। युवा उम्र में विनोद मेघवाल की मौत के बाद जब उसकी अंतिम विदाई का समय आया तो परिजनों ने उसे दूल्हे की तरह सजाकर अंतिम संस्कार किया। सिर पर सेहरा, दूल्हे जैसा श्रृंगार और आंखों में अपनों के बिछड़ने का अथाह दर्द... यह मंजर देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
बताया जा रहा है कि विनोद अविवाहित था और उसके विवाह के सपने अभी पूरे भी नहीं हुए थे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। जिस घर में एक दिन बारात निकलने की उम्मीद थी, उसी घर से आज अंतिम यात्रा निकली। परिजनों ने भारी मन से उसे दूल्हे के रूप में विदा किया ताकि उनके दिल में यह टीस कुछ कम हो सके कि बेटे के अधूरे सपने अधूरे ही रह गए।
मां-बाप की सिसकियां, परिजनों का विलाप और दूल्हे के रूप में सजे विनोद का अंतिम दर्शन हर किसी को भीतर तक झकझोर रहा था। गांव के लोगों का कहना है कि बाड़मेर में शायद ही कभी ऐसा दर्दनाक और भावुक दृश्य देखने को मिला हो। खुशियों के सेहरे में लिपटी यह विदाई दरअसल एक ऐसे दर्द की कहानी थी, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
आत्महत्या के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है, लेकिन एक युवा जिंदगी का इस तरह अचानक खत्म हो जाना पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में छोड़ गया। जिस उम्र में सपने पूरे होने चाहिए थे, उस उम्र में अंतिम विदाई का यह दृश्य हर आंख को नम कर गया और एक सवाल छोड़ गया—आखिर ऐसा कौन सा दर्द था, जो जिंदगी से बड़ा हो गया।
Barmer, Barmer | Jun 20, 2026