"मानवीय संवेदनाएं इतनी स्वाभाविक हैं कि कई बार कैमरे के पीछे रहकर भी हम खुद को भावुक होने से रोक नहीं पाते। छतरपुर के बगमऊ गांव में एक ऐसा ही दिल को छू लेने वाला दृश्य सामने आया, जब एक बेहद गरीब मजदूर परिवार के संघर्षों को चीरकर उनका बेटा धीरज सब इंस्पेक्टर (SAF) बना। जब धीरज की बहन अपनी आँखों में खुशी और अतीत के संघर्षों को समेटे अपनी कहानी बयां कर रही थी, तो उनके छलके आंसू हमारी भी पलकों को भिगो गए। उस बेहद भावुक और रूह को झकझोर देने वाले पल में, हमारे लिए भी खुद को संभालना मुश्किल हो गया और हमें बीच में ही 'कट' लेना पड़ा।"