हमारे कोर्णावटी क्षेत्र की दो विभूतियों जो आज इस दुनिया में नहीं है लेकिन उनके गाए लोकगीत व भजन हमेशा लोगों के दिलों में रहेंगे।
मूलतः कोरणा तहसील कल्याणपुर जिला बालोतरा निवासी भील जनजाति के राव (हुड़कल) की दो स्वर कोकिला जिन्होंने गायिकी के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ी है।
मैथी का विवाह अगोलाई निवासी चंपालाल के साथ हुआ था और इस जोड़ी (चंपा-मैथी) ने लंबे समय तक आकाशवाणी केंद्र,रेडियो,टेपरिकार्डर आदि के माध्यम से लोगों का मनोरंजन किया। आज यह जोड़ी इस दुनियां में नहीं है।
गवरी देवी का विवाह पाली निवासी मिश्रीलाल जी के साथ हुआ और मांड गायकी में अपनी विशेष पहचान बनाई। करीब 8 दशक तक उन्होंने अपना गायन किया।
दोनों बहनों की अद्भुत गायन शैली ने उन्हें स्वर कोकिला की पहचान दिलाई।
पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकें से विभिन्न वाद्य यंत्रों के माध्यम से लोकगीतों व लोक भजनों की स्वर लहरियों बिखरने वाली सैंकड़ों प्रतिभाएं है। जो राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी आवाज से हर किसी को मंत्र मुग्ध कर रहे हैं।
कई विभूतियों राष्ट्रपति पुरस्कार, पद्मश्री पुरस्कार, पद्म भूषण आदि से नवाजी गई है।