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फतेहपुर से नरेश उत्तम पटेल 1645 वोटो से आगे *रहस्य संदेश न्यूज़*

Fatehpur, Fatehpur | Jun 4, 2024

MORE NEWS

प्रसव के बाद महिला की मौत से उठे गंभीर सवाल

परिजनों ने स्टाफ नर्स पर रुपये लेने और लापरवाही का लगाया आरोप

जसरा सीएचसी में मातृ मृत्यु के बाद जांच की मांग, स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप

✒️रिपोर्ट सुनील यादव/राजेश सोनकर

प्रयागराज के जसरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में प्रसव के बाद एक महिला की मौत का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतका के परिजनों ने अस्पताल की स्टाफ नर्स पर अवैध धन वसूली, बाहर से दवाइयां मंगवाने और समय पर रेफर न करने का आरोप लगाया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने का आश्वासन दिया है। इस घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और प्रसूति देखभाल की गुणवत्ता पर नई बहस छेड़ दी है।

डिलीवरी के नाम पर रुपये लेने और दवाएं बाहर से मंगाने का आरोप

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतका गायत्री देवी को सोमवार सुबह प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसरा में भर्ती कराया गया था। मृतका के पति राजू द्वारा दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स ने डिलीवरी कराने के लिए 2500 रुपये की मांग की थी। परिजनों का कहना है कि तत्काल उनके पास 2000 रुपये ही थे, जिन्हें देने के बाद महिला को भर्ती किया गया।

परिजनों के अनुसार भर्ती के बाद कुछ इंजेक्शन और दवाइयां अस्पताल के बजाय बाहर के मेडिकल स्टोर से मंगवाई गईं। इंजेक्शन लगाने के लगभग एक घंटे बाद महिला ने सामान्य प्रसव के माध्यम से बच्चे को जन्म दिया।

प्रसव के बाद बिगड़ी हालत, समय पर रेफर न करने का आरोप

परिवार का आरोप है कि प्रसव के कुछ समय बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। स्थिति गंभीर होने पर उन्होंने जिला अस्पताल रेफर करने की मांग की, लेकिन कथित तौर पर स्टाफ नर्स ने आश्वस्त किया कि मरीज जल्द ठीक हो जाएगी।

आरोप है कि इसके बाद भी कुछ और दवाइयां बाहर से मंगवाई गईं, लेकिन महिला की स्थिति में सुधार नहीं हुआ। जब हालत अत्यधिक गंभीर हो गई तो उसे नजदीकी निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई।

परिजनों का कहना है कि जब वे महिला को लेकर निजी अस्पताल जा रहे थे, तभी सीएचसी परिसर के भीतर ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और अस्पताल परिसर में आक्रोश का माहौल बन गया।

परिजनों ने चिकित्सीय लापरवाही का लगाया आरोप

मृतका के परिवार ने इस पूरे मामले को चिकित्सीय लापरवाही का परिणाम बताते हुए जिम्मेदार स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर उचित उपचार और रेफरल की व्यवस्था की जाती तो महिला की जान बचाई जा सकती थी।

स्थानीय लोगों का भी कहना है कि सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवाओं की नियमित निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

स्वास्थ्य विभाग ने जांच का दिया आश्वासन

मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग में भी हलचल तेज हो गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसरा की अधीक्षिका डॉ. अंकिता पांडेय ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी मिली है, लेकिन वर्तमान में वह अवकाश पर हैं और अस्पताल का प्रभार डॉ. सुरेश के पास है।

उन्होंने कहा कि बिना जांच रिपोर्ट के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही, अनियमितता अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

वायरल फैक्ट

मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवाओं, कथित अवैध वसूली और स्वास्थ्य कर्मियों की जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। लोगों ने मांग की है कि मातृ मृत्यु के प्रत्येक मामले की स्वतंत्र जांच हो और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।

जसरा सीएचसी में हुई यह घटना केवल एक परिवार के लिए व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या वास्तव में किसी स्तर पर लापरवाही हुई। फिलहाल पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा है और स्वास्थ्य विभाग की जांच पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

ND NEWS की अपील

🔹 गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक और निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
🔹 प्रसव संबंधी मामलों में किसी भी प्रकार की अवैध धन वसूली पर तत्काल कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
🔹 स्वास्थ्य संस्थानों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का नियमित ऑडिट और निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए।
🔹 आमजन स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता की सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों को दें।
🔹 प्रत्येक मातृ मृत्यु की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।

ND NEWS संदेश:
"एक मां की मृत्यु केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए आत्ममंथन का विषय है। संवेदनशीलता, जवाबदेही और पारदर्शिता ही जनविश्वास की असली नींव है।"
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मुख्य संपादक / संस्थापक: राजन सिंह हाड़ा
सह-संपादक: शालिनी सिंह भदौरिया
📍 कार्यालय-3: U158, हीरा स्वीट्स के पास, विकास मार्ग, लक्ष्मी नगर, पूर्वी दिल्ली, पिन कोड – 110092 (NCR)
📍 कार्यालय-2: विधानसभा रोड, बर्लिंगटन चौराहा, लखनऊ – 226001 (UP)
📍 कार्यालय-1: 1/1 अटल बिहारी चौराहा, नियर बर्मा चौराहा, फतेहपुर – 212601 (UP)
📅 दिनांक: 08 जून 2026
📆 दिन: सोमवार
📧 Email: ndnewschannel@gmail.com
📞 मोबाइल: 9696119696
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अस्वीकरण: यह समाचार परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों, शिकायत पत्र एवं उपलब्ध बयानों पर आधारित है। मामले की जांच जारी है। जांच पूरी होने तक सभी आरोप आरोप मात्र हैं। अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद ही निर्धारित होंगे।

प्रसव के बाद महिला की मौत से उठे गंभीर सवाल परिजनों ने स्टाफ नर्स पर रुपये लेने और लापरवाही का लगाया आरोप जसरा सीएचसी में मातृ मृत्यु के बाद जांच की मांग, स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप ✒️रिपोर्ट सुनील यादव/राजेश सोनकर प्रयागराज के जसरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में प्रसव के बाद एक महिला की मौत का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतका के परिजनों ने अस्पताल की स्टाफ नर्स पर अवैध धन वसूली, बाहर से दवाइयां मंगवाने और समय पर रेफर न करने का आरोप लगाया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने का आश्वासन दिया है। इस घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और प्रसूति देखभाल की गुणवत्ता पर नई बहस छेड़ दी है। डिलीवरी के नाम पर रुपये लेने और दवाएं बाहर से मंगाने का आरोप प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतका गायत्री देवी को सोमवार सुबह प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसरा में भर्ती कराया गया था। मृतका के पति राजू द्वारा दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स ने डिलीवरी कराने के लिए 2500 रुपये की मांग की थी। परिजनों का कहना है कि तत्काल उनके पास 2000 रुपये ही थे, जिन्हें देने के बाद महिला को भर्ती किया गया। परिजनों के अनुसार भर्ती के बाद कुछ इंजेक्शन और दवाइयां अस्पताल के बजाय बाहर के मेडिकल स्टोर से मंगवाई गईं। इंजेक्शन लगाने के लगभग एक घंटे बाद महिला ने सामान्य प्रसव के माध्यम से बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के बाद बिगड़ी हालत, समय पर रेफर न करने का आरोप परिवार का आरोप है कि प्रसव के कुछ समय बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। स्थिति गंभीर होने पर उन्होंने जिला अस्पताल रेफर करने की मांग की, लेकिन कथित तौर पर स्टाफ नर्स ने आश्वस्त किया कि मरीज जल्द ठीक हो जाएगी। आरोप है कि इसके बाद भी कुछ और दवाइयां बाहर से मंगवाई गईं, लेकिन महिला की स्थिति में सुधार नहीं हुआ। जब हालत अत्यधिक गंभीर हो गई तो उसे नजदीकी निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई। परिजनों का कहना है कि जब वे महिला को लेकर निजी अस्पताल जा रहे थे, तभी सीएचसी परिसर के भीतर ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और अस्पताल परिसर में आक्रोश का माहौल बन गया। परिजनों ने चिकित्सीय लापरवाही का लगाया आरोप मृतका के परिवार ने इस पूरे मामले को चिकित्सीय लापरवाही का परिणाम बताते हुए जिम्मेदार स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर उचित उपचार और रेफरल की व्यवस्था की जाती तो महिला की जान बचाई जा सकती थी। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवाओं की नियमित निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। स्वास्थ्य विभाग ने जांच का दिया आश्वासन मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग में भी हलचल तेज हो गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसरा की अधीक्षिका डॉ. अंकिता पांडेय ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी मिली है, लेकिन वर्तमान में वह अवकाश पर हैं और अस्पताल का प्रभार डॉ. सुरेश के पास है। उन्होंने कहा कि बिना जांच रिपोर्ट के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही, अनियमितता अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वायरल फैक्ट मामले के सामने आने के बाद सोशल 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Fatehpur, Fatehpur | Jun 8, 2026

अवैध मोरम खदान में कर्मचारी की मौत, परिजनों ने हत्या का लगाया आरोप

पोकलेन मशीन के बकेट से चोट पहुंचाकर हत्या किए जाने का दावा, जांच में जुटी पुलिस

नरैनी के पुकारी गांव की घटना से मचा हड़कंप, खनन गतिविधियों पर उठे सवाल

✒️रिपोर्ट राजेश सिंह 

उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद में अवैध खनन और श्रमिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। नरैनी थाना क्षेत्र के पुकारी गांव में एक खदान पर कार्यरत कर्मचारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि खदान में विवाद के बाद पोकलेन मशीन के बकेट से हमला कर उसकी हत्या की गई। घटना के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

बांदा जनपद के नरैनी थाना क्षेत्र अंतर्गत पुकारी गांव में संचालित एक मोरम खदान में काम करने वाले कर्मचारी दिनेश कुमार त्रिवेदी की मौत के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई। मृतक के परिजनों का आरोप है कि खदान में कार्य के दौरान हुए विवाद के बाद ठेकेदार पक्ष से जुड़े लोगों द्वारा पोकलेन मशीन के बकेट से गंभीर चोट पहुंचाई गई, जिससे उनकी मौत हो गई।

परिजनों का कहना है कि मृतक लंबे समय से उक्त खदान में कार्यरत था। घटना वाले दिन किसी बात को लेकर कहासुनी हुई, जिसके बाद कथित रूप से हिंसक घटनाक्रम सामने आया। घायल अवस्था में उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नरैनी ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मामले को और गंभीर बनाते हुए परिजनों ने आरोप लगाया है कि जिस खदान में कार्य किया जा रहा था, वह कथित रूप से अवैध रूप से संचालित की जा रही थी। उनका दावा है कि खदान संचालन के संबंध में प्रशासन और खनिज विभाग से आवश्यक अनुमति उपलब्ध नहीं थी। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगी।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

वायरल फैक्ट

घटना के बाद सोशल मीडिया पर अवैध खनन, श्रमिक सुरक्षा और खदानों के संचालन को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि खनन गतिविधियों की नियमित निगरानी और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए तो इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सकता है। वहीं मृतक के परिजन दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

बांदा का यह मामला केवल एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि खनन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था, श्रमिक अधिकारों और प्रशासनिक निगरानी जैसे महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े करता है। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद घटना की वास्तविक परिस्थितियां अधिक स्पष्ट हो सकेंगी। मामले पर प्रशासन और खनिज विभाग की आगामी कार्रवाई पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

ND NEWS की अपील

🔹 खनन क्षेत्रों में श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनाई जाए।
🔹 सभी खदानों का नियमित निरीक्षण और वैधता की जांच सुनिश्चित की जाए।
🔹 किसी भी दुर्घटना या विवाद की स्थिति में कानून को अपने हाथ में लेने के बजाय प्रशासन को तत्काल सूचना दी जाए।
🔹 अवैध खनन और असुरक्षित कार्यस्थलों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
🔹 मृतक के परिजनों को निष्पक्ष जांच और न्याय दिलाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

ND NEWS का संदेश:
"श्रमिक देश की विकास यात्रा की रीढ़ हैं। उनकी सुरक्षा, सम्मान और न्याय सुनिश्चित करना समाज और प्रशासन दोनों का दायित्व है।"
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✒️ रिपोर्ट : राजेश सिंह, बांदा
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अवैध मोरम खदान में कर्मचारी की मौत, परिजनों ने हत्या का लगाया आरोप

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नरैनी के पुकारी गांव की घटना से मचा हड़कंप, खनन गतिविधियों पर उठे सवाल

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बांदा जनपद के नरैनी थाना क्षेत्र अंतर्गत पुकारी गांव में संचालित एक मोरम खदान में काम करने वाले कर्मचारी दिनेश कुमार त्रिवेदी की मौत के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई। मृतक के परिजनों का आरोप है कि खदान में कार्य के दौरान हुए विवाद के बाद ठेकेदार पक्ष से जुड़े लोगों द्वारा पोकलेन मशीन के बकेट से गंभीर चोट पहुंचाई गई, जिससे उनकी मौत हो गई।

परिजनों का कहना है कि मृतक लंबे समय से उक्त खदान में कार्यरत था। घटना वाले दिन किसी बात को लेकर कहासुनी हुई, जिसके बाद कथित रूप से हिंसक घटनाक्रम सामने आया। घायल अवस्था में उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नरैनी ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मामले को और गंभीर बनाते हुए परिजनों ने आरोप लगाया है कि जिस खदान में कार्य किया जा रहा था, वह कथित रूप से अवैध रूप से संचालित की जा रही थी। उनका दावा है कि खदान संचालन के संबंध में प्रशासन और खनिज विभाग से आवश्यक अनुमति उपलब्ध नहीं थी। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगी।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

वायरल फैक्ट

घटना के बाद सोशल मीडिया पर अवैध खनन, श्रमिक सुरक्षा और खदानों के संचालन को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि खनन गतिविधियों की नियमित निगरानी और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए तो इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सकता है। वहीं मृतक के परिजन दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

बांदा का यह मामला केवल एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि खनन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था, श्रमिक अधिकारों और प्रशासनिक निगरानी जैसे महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े करता है। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद घटना की वास्तविक परिस्थितियां अधिक स्पष्ट हो सकेंगी। मामले पर प्रशासन और खनिज विभाग की आगामी कार्रवाई पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

ND NEWS की अपील

🔹 खनन क्षेत्रों में श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनाई जाए।
🔹 सभी खदानों का नियमित निरीक्षण और वैधता की जांच सुनिश्चित की जाए।
🔹 किसी भी दुर्घटना या विवाद की स्थिति में कानून को अपने हाथ में लेने के बजाय प्रशासन को तत्काल सूचना दी जाए।
🔹 अवैध खनन और असुरक्षित कार्यस्थलों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
🔹 मृतक के परिजनों को निष्पक्ष जांच और न्याय दिलाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

ND NEWS का संदेश:
"श्रमिक देश की विकास यात्रा की रीढ़ हैं। उनकी सुरक्षा, सम्मान और न्याय सुनिश्चित करना समाज और प्रशासन दोनों का दायित्व है।"
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मुख्य संपादक / संस्थापक: राजन सिंह हाड़ा
सह-संपादक: शालिनी सिंह भदौरिया

✒️ रिपोर्ट : राजेश सिंह, बांदा
📍 कार्यालय-3: U158, हीरा स्वीट्स के पास, विकास मार्ग, लक्ष्मी नगर, पूर्वी दिल्ली, पिन कोड – 110092 (NCR)
📍 कार्यालय-2: विधानसभा रोड, बर्लिंगटन चौराहा, लखनऊ (226001) (UP)
📍 कार्यालय-1: 1/1 अटल बिहारी चौराहा, नियर बर्मा चौराहा, फतेहपुर (212601) (UP)
📅 दिनांक: 08 जून 2026
📆 दिन: सोमवार
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अवैध मोरम खदान में कर्मचारी की मौत, परिजनों ने हत्या का लगाया आरोप पोकलेन मशीन के बकेट से चोट पहुंचाकर हत्या किए जाने का दावा, जांच में जुटी पुलिस नरैनी के पुकारी गांव की घटना से मचा हड़कंप, खनन गतिविधियों पर उठे सवाल ✒️रिपोर्ट राजेश सिंह उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद में अवैध खनन और श्रमिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। नरैनी थाना क्षेत्र के पुकारी गांव में एक खदान पर कार्यरत कर्मचारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि खदान में विवाद के बाद पोकलेन मशीन के बकेट से हमला कर उसकी हत्या की गई। घटना के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। बांदा जनपद के नरैनी थाना क्षेत्र अंतर्गत पुकारी गांव में संचालित एक मोरम खदान में काम करने वाले कर्मचारी दिनेश कुमार त्रिवेदी की मौत के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई। मृतक के परिजनों का आरोप है कि खदान में कार्य के दौरान हुए विवाद के बाद ठेकेदार पक्ष से जुड़े लोगों द्वारा पोकलेन मशीन के बकेट से गंभीर चोट पहुंचाई गई, जिससे उनकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि मृतक लंबे समय से उक्त खदान में कार्यरत था। घटना वाले दिन किसी बात को लेकर कहासुनी हुई, जिसके बाद कथित रूप से हिंसक घटनाक्रम सामने आया। घायल अवस्था में उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नरैनी ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले को और गंभीर बनाते हुए परिजनों ने आरोप लगाया है कि जिस खदान में कार्य किया जा रहा था, वह कथित रूप से अवैध रूप से संचालित की जा रही थी। उनका दावा है कि खदान संचालन के संबंध में प्रशासन और खनिज विभाग से आवश्यक अनुमति उपलब्ध नहीं थी। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। वायरल फैक्ट घटना के बाद सोशल मीडिया पर अवैध खनन, श्रमिक सुरक्षा और खदानों के संचालन को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि खनन गतिविधियों की नियमित निगरानी और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए तो इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सकता है। वहीं मृतक के परिजन दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। बांदा का यह मामला केवल एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि खनन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था, श्रमिक अधिकारों और प्रशासनिक निगरानी जैसे महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े करता है। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद घटना की वास्तविक परिस्थितियां अधिक स्पष्ट हो सकेंगी। मामले पर प्रशासन और खनिज विभाग की आगामी कार्रवाई पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं। ND NEWS की अपील 🔹 खनन क्षेत्रों में श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनाई जाए। 🔹 सभी खदानों का नियमित निरीक्षण और वैधता की जांच सुनिश्चित की जाए। 🔹 किसी भी दुर्घटना या विवाद की स्थिति में कानून को अपने हाथ में लेने के बजाय प्रशासन को तत्काल सूचना दी जाए। 🔹 अवैध खनन और असुरक्षित कार्यस्थलों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। 🔹 मृतक के परिजनों को निष्पक्ष जांच और न्याय दिलाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। ND NEWS का संदेश: "श्रमिक देश की विकास यात्रा की रीढ़ हैं। उनकी सुरक्षा, सम्मान और न्याय सुनिश्चित करना समाज और प्रशासन दोनों का दायित्व है।" 👇👇 #NDNews #दैनिकनिष्पक्षधारा #BandaNews #Naraini #PukariVillage #MiningNews #IllegalMining #JusticeForDinesh #UPPolice #BandaPolice #MiningDepartment #BreakingNews #NDNewsChannel 👇👇 #PMOIndia #mygovindia #MinesMinIndia #myogiadityanath #UPGovt #dgpup #Uppolice #DMBanda #bandapolice #GeologyMiningUP #UPGovt 👇👇 🟥 ND NEWS | दैनिक निष्पक्ष धारा मुख्य संपादक / संस्थापक: राजन सिंह हाड़ा सह-संपादक: शालिनी सिंह भदौरिया ✒️ रिपोर्ट : राजेश सिंह, बांदा 📍 कार्यालय-3: U158, हीरा स्वीट्स के पास, विकास मार्ग, लक्ष्मी नगर, पूर्वी दिल्ली, पिन कोड – 110092 (NCR) 📍 कार्यालय-2: विधानसभा रोड, बर्लिंगटन चौराहा, लखनऊ (226001) (UP) 📍 कार्यालय-1: 1/1 अटल बिहारी चौराहा, नियर बर्मा चौराहा, फतेहपुर (212601) (UP) 📅 दिनांक: 08 जून 2026 📆 दिन: सोमवार 📧 Email: ndnewschannel@gmail.com 📞 मोबाइल: 9696119696

Fatehpur, Fatehpur | Jun 8, 2026

प्रसव के बाद महिला की मौत से उठे गंभीर सवाल

परिजनों ने स्टाफ नर्स पर रुपये लेने और लापरवाही का लगाया आरोप

जसरा सीएचसी में मातृ मृत्यु के बाद जांच की मांग, स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप

✒️रिपोर्ट सुनील यादव/राजेश सोनकर

प्रयागराज के जसरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में प्रसव के बाद एक महिला की मौत का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतका के परिजनों ने अस्पताल की स्टाफ नर्स पर अवैध धन वसूली, बाहर से दवाइयां मंगवाने और समय पर रेफर न करने का आरोप लगाया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने का आश्वासन दिया है। इस घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और प्रसूति देखभाल की गुणवत्ता पर नई बहस छेड़ दी है।

डिलीवरी के नाम पर रुपये लेने और दवाएं बाहर से मंगाने का आरोप

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतका गायत्री देवी को सोमवार सुबह प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसरा में भर्ती कराया गया था। मृतका के पति राजू द्वारा दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स ने डिलीवरी कराने के लिए 2500 रुपये की मांग की थी। परिजनों का कहना है कि तत्काल उनके पास 2000 रुपये ही थे, जिन्हें देने के बाद महिला को भर्ती किया गया।

परिजनों के अनुसार भर्ती के बाद कुछ इंजेक्शन और दवाइयां अस्पताल के बजाय बाहर के मेडिकल स्टोर से मंगवाई गईं। इंजेक्शन लगाने के लगभग एक घंटे बाद महिला ने सामान्य प्रसव के माध्यम से बच्चे को जन्म दिया।

प्रसव के बाद बिगड़ी हालत, समय पर रेफर न करने का आरोप

परिवार का आरोप है कि प्रसव के कुछ समय बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। स्थिति गंभीर होने पर उन्होंने जिला अस्पताल रेफर करने की मांग की, लेकिन कथित तौर पर स्टाफ नर्स ने आश्वस्त किया कि मरीज जल्द ठीक हो जाएगी।

आरोप है कि इसके बाद भी कुछ और दवाइयां बाहर से मंगवाई गईं, लेकिन महिला की स्थिति में सुधार नहीं हुआ। जब हालत अत्यधिक गंभीर हो गई तो उसे नजदीकी निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई।

परिजनों का कहना है कि जब वे महिला को लेकर निजी अस्पताल जा रहे थे, तभी सीएचसी परिसर के भीतर ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और अस्पताल परिसर में आक्रोश का माहौल बन गया।

परिजनों ने चिकित्सीय लापरवाही का लगाया आरोप

मृतका के परिवार ने इस पूरे मामले को चिकित्सीय लापरवाही का परिणाम बताते हुए जिम्मेदार स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर उचित उपचार और रेफरल की व्यवस्था की जाती तो महिला की जान बचाई जा सकती थी।

स्थानीय लोगों का भी कहना है कि सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवाओं की नियमित निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

स्वास्थ्य विभाग ने जांच का दिया आश्वासन

मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग में भी हलचल तेज हो गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसरा की अधीक्षिका डॉ. अंकिता पांडेय ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी मिली है, लेकिन वर्तमान में वह अवकाश पर हैं और अस्पताल का प्रभार डॉ. सुरेश के पास है।

उन्होंने कहा कि बिना जांच रिपोर्ट के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही, अनियमितता अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

वायरल फैक्ट

मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवाओं, कथित अवैध वसूली और स्वास्थ्य कर्मियों की जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। लोगों ने मांग की है कि मातृ मृत्यु के प्रत्येक मामले की स्वतंत्र जांच हो और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।

जसरा सीएचसी में हुई यह घटना केवल एक परिवार के लिए व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या वास्तव में किसी स्तर पर लापरवाही हुई। फिलहाल पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा है और स्वास्थ्य विभाग की जांच पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

ND NEWS की अपील

🔹 गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक और निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
🔹 प्रसव संबंधी मामलों में किसी भी प्रकार की अवैध धन वसूली पर तत्काल कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
🔹 स्वास्थ्य संस्थानों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का नियमित ऑडिट और निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए।
🔹 आमजन स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता की सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों को दें।
🔹 प्रत्येक मातृ मृत्यु की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।

ND NEWS संदेश:
"एक मां की मृत्यु केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए आत्ममंथन का विषय है। संवेदनशीलता, जवाबदेही और पारदर्शिता ही जनविश्वास की असली नींव है।"
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अस्वीकरण: यह समाचार परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों, शिकायत पत्र एवं उपलब्ध बयानों पर आधारित है। मामले की जांच जारी है। जांच पूरी होने तक सभी आरोप आरोप मात्र हैं। अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद ही निर्धारित होंगे।

प्रसव के बाद महिला की मौत से उठे गंभीर सवाल परिजनों ने स्टाफ नर्स पर रुपये लेने और लापरवाही का लगाया आरोप जसरा सीएचसी में मातृ मृत्यु के बाद जांच की मांग, स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप ✒️रिपोर्ट सुनील यादव/राजेश सोनकर प्रयागराज के जसरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में प्रसव के बाद एक महिला की मौत का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतका के परिजनों ने अस्पताल की स्टाफ नर्स पर अवैध धन वसूली, बाहर से दवाइयां मंगवाने और समय पर रेफर न करने का आरोप लगाया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने का आश्वासन दिया है। इस घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और प्रसूति देखभाल की गुणवत्ता पर नई बहस छेड़ दी है। डिलीवरी के नाम पर रुपये लेने और दवाएं बाहर से मंगाने का आरोप प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतका गायत्री देवी को सोमवार सुबह प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसरा में भर्ती कराया गया था। मृतका के पति राजू द्वारा दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स ने डिलीवरी कराने के लिए 2500 रुपये की मांग की थी। परिजनों का कहना है कि तत्काल उनके पास 2000 रुपये ही थे, जिन्हें देने के बाद महिला को भर्ती किया गया। परिजनों के अनुसार भर्ती के बाद कुछ इंजेक्शन और दवाइयां अस्पताल के बजाय बाहर के मेडिकल स्टोर से मंगवाई गईं। इंजेक्शन लगाने के लगभग एक घंटे बाद महिला ने सामान्य प्रसव के माध्यम से बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के बाद बिगड़ी हालत, समय पर रेफर न करने का आरोप परिवार का आरोप है कि प्रसव के कुछ समय बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। स्थिति गंभीर होने पर उन्होंने जिला अस्पताल रेफर करने की मांग की, लेकिन कथित तौर पर स्टाफ नर्स ने आश्वस्त किया कि मरीज जल्द ठीक हो जाएगी। आरोप है कि इसके बाद भी कुछ और दवाइयां बाहर से मंगवाई गईं, लेकिन महिला की स्थिति में सुधार नहीं हुआ। जब हालत अत्यधिक गंभीर हो गई तो उसे नजदीकी निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई। परिजनों का कहना है कि जब वे महिला को लेकर निजी अस्पताल जा रहे थे, तभी सीएचसी परिसर के भीतर ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और अस्पताल परिसर में आक्रोश का माहौल बन गया। परिजनों ने चिकित्सीय लापरवाही का लगाया आरोप मृतका के परिवार ने इस पूरे मामले को चिकित्सीय लापरवाही का परिणाम बताते हुए जिम्मेदार स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर उचित उपचार और रेफरल की व्यवस्था की जाती तो महिला की जान बचाई जा सकती थी। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवाओं की नियमित निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। स्वास्थ्य विभाग ने जांच का दिया आश्वासन मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग में भी हलचल तेज हो गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसरा की अधीक्षिका डॉ. अंकिता पांडेय ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी मिली है, लेकिन वर्तमान में वह अवकाश पर हैं और अस्पताल का प्रभार डॉ. सुरेश के पास है। उन्होंने कहा कि बिना जांच रिपोर्ट के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही, अनियमितता अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वायरल फैक्ट मामले के सामने आने के बाद सोशल 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Fatehpur, Fatehpur | Jun 8, 2026

#Spfhr के निर्देशन में प्रभारी निरीक्षक/थानाध्यक्ष द्वारा जनपद में शांति एवं कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाये रखने के दृष्टिगत मय पुलिस बल के अपने-अपने थाना क्षेत्रान्तर्गत भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर पैदल गस्त कर संदिग्ध वाहन/व्यक्तियों की चेकिंग की गयी तथा आमजनमानस को सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया।

#UPPolice

#Spfhr के निर्देशन में प्रभारी निरीक्षक/थानाध्यक्ष द्वारा जनपद में शांति एवं कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाये रखने के दृष्टिगत मय पुलिस बल के अपने-अपने थाना क्षेत्रान्तर्गत भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर पैदल गस्त कर संदिग्ध वाहन/व्यक्तियों की चेकिंग की गयी तथा आमजनमानस को सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया। #UPPolice

Fatehpur, Uttar Pradesh | Jun 8, 2026

फतेहपुर से नरेश उत्तम पटेल 1645 वोटो से आगे *रहस्य संदेश न्यूज़* - Fatehpur News