मसूरी मासूम की मौत मामले में अस्पताल प्रशासन का पक्ष, सीसीटीवी में नहीं मिली लापरवाही, जांच समिति ने आरोप बताए निराधार
मसूरी उप जिला चिकित्सालय में एक वर्षीय मासूम की मौत के बाद डॉक्टरों पर लगाए गए लापरवाही के आरोपों को अस्पताल प्रशासन ने खारिज कर दिया है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. खजान सिंह चौहान ने पत्रकार वार्ता में कहा कि मामले की जांच के लिए गठित चार सदस्यीय समिति और अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज में चिकित्सकों या स्टाफ की किसी प्रकार की लापरवाही सामने नहीं आई है।
डॉ. चौहान ने बताया कि 29 जून की सुबह करीब पांच बजे दंपती अपने बच्चे को अस्पताल लेकर पहुंचा था। उस समय ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक पहले से एक मरीज का उपचार कर रहे थे। दो-तीन मिनट बाद डॉ. प्रशांत नैथानी ने बच्चे की जांच की। उन्होंने बताया कि बच्चा पहले से एक निजी चिकित्सक के उपचार में था और उसे स्टेरॉयड सहित कई दवाएं दी जा रही थीं। अस्पताल में दवाओं में आवश्यक बदलाव कर परिजनों को सुबह आठ बजे बाल रोग विशेषज्ञ के आने तक रुकने की सलाह दी गई थी, लेकिन वे बच्चे को लेकर अस्पताल से चले गए। सीएमएस ने कहा कि जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि अस्पताल पहुंचते ही नर्सिंग स्टाफ ने बच्चे को तत्काल अटेंड किया था। ऐसे में अस्पताल में डॉक्टर या स्टाफ के मौजूद न होने के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए एकपक्षीय खबरें प्रसारित होने से सरकारी अस्पताल की छवि और डॉक्टरों का मनोबल प्रभावित होता है। मीडिया और जनप्रतिनिधियों को दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद ही निष्कर्ष निकालना चाहिए।
डॉ. चौहान ने बताया कि कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के प्रयासों से मसूरी अस्पताल को उप जिला चिकित्सालय का दर्जा मिला है और यहां लगातार स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। अस्पताल में सीटी स्कैन, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड सहित कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में किसी भी स्तर पर किसी कर्मचारी या चिकित्सक की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन इस मामले में जांच में ऐसे कोई तथ्य नहीं मिले हैं।
Mussoorie, Dehradun | Jul 2, 2026