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Viresh Shandilya Ko Amritpal Singh Ka Sathi Marega Suniye Audio Recording

130.7k views | Haryana, India | Feb 12, 2023

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राजस्थान के श्रीगंगानगर में 13 साल की बच्ची के साथ 32 लोगों ने किया दुष्कर्म, आरोपी गिरफ्तार तथा होटल पर चला बुलडोजर।
ऐसे दरिंदों के साथ क्या होना चाहिए क्या सजा मिलनी चाहिए।

राजस्थान के श्रीगंगानगर में 13 साल की बच्ची के साथ 32 लोगों ने किया दुष्कर्म, आरोपी गिरफ्तार तथा होटल पर चला बुलडोजर। ऐसे दरिंदों के साथ क्या होना चाहिए क्या सजा मिलनी चाहिए।

Ambala, Ambala | Jul 6, 2026

जगाधरी, हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया जिसके दौरान परम पूजनीय दिव्य गुरु आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री नीलम भारती जी ने जीवन में भक्ति का महत्व बताते हुए कहा कि भक्ति एक स्वस्थ जीवन का आधार है जो हमें मानसिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक बल प्रदान करने में सहायक होती है। भगवान के निराकार स्वरूप की भक्ति बड़ी सरल है परन्तु जब परमात्मा के साकार स्वरूप की भक्ति की बात आती है तो यहाँ सर्वप्रथम अपना अहंकार छोड़ना पड़ता है और साकार स्वरूप की भक्ति में मनमाने आचरण के लिए कोई स्थान नहीं रहता क्योंकि निरंतर गुरु आज्ञा में चलते हुए अपने मन के विकारों एवं बुद्धि के दुर्विचारों को छोड़ना पड़ता है। स्वयं को मानव से महामानव बनाने की प्रक्रिया में गुरु के कुशल हाथों में गढ़े जाने के लिए तत्पर रहना होता है। गुरु भक्ति ही भक्ति का वह दिव्यतम् स्वरूप है जिसमें एक मानव देवतुल्य बन जाता है क्योंकि जब जीवन में गुरु भक्ति आती है तो वह शिष्य को कभी शिष्य नहीं रहने देती और गुरु के दिव्य गुणों को शिष्य के भीतर उतार कर उसे भी दिव्य बना देती है। फिर ऐसा गुरु भक्त जो गुरु भक्ति की पराकाष्ठा को प्राप्त कर चुका हो, स्वकल्याण के साथ अपने संपर्क में आने वाले जन समूह को भी कल्याण के मार्ग पर अग्रसर करता है। एक गुरु भक्त मोक्ष का वह द्वार बन जाता है जिसके संपर्क में आने वाले भी सुख व शान्ति प्राप्त करते हैं। गुरु भक्ति वह कल्पवृक्ष है जो अपनी शरण में आने वाले प्रत्येक शरणार्थी को इच्छा पूर्ति का वरदान देता है। यदि कोई सांसारिक इच्छा की पूर्ति हेतु गुरु भक्ति करता है, तो भी उसे वह सब कुछ प्राप्त हो जाता है जो वह पाना चाहता हो परन्तु ऐसा सकाम भक्त उस अनमोल निधि से वंचित रह जाता है जो गुरु अपनी कृपा के द्वारा शिष्य की झोली में अनायास ही डाल देते हैं। जब शिष्य मन वचन कर्म को गुरु आज्ञा में समर्पित करके चलता है तो उसे आरंभिक अवस्था में अवश्य ही परीक्षा के दौर से गुज़रना पड़ता हो किन्तु गुरु उसे ब्रह्माण्ड की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि से परिपूर्ण कर देते हैं जिसे पाने के लिए देवी देवता भी तरसते हैं। गुरु भक्ति में पगा हुआ हृदय ही वास्तविक रूप में भक्ति के आनंद को चखता है क्योंकि ऐसे गुरु भक्त का जीवन सदैव परिपूर्ण व आत्म संतुष्टि से भरपूर होता है जो अपनी सभी इच्छाओं एवं कामनाओं को छोड़कर केवल अपने मानव जीवन के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु भक्ति मार्ग पर डट जाता है। वह कल्याणकारी साधक केवल शिष्य नहीं अपितु एक आदर्श गुरु भक्त बन कर समाज में प्रतिष्ठित होता है। गुरु भक्ति के रंग में जीवन को रंगने वाले गुरु भक्तों का जीवन महोत्सव बन जाता है जिनका प्रत्येक क्षण ही जीवन मुक्ति के आनंद से परिपूर्ण होता है। जो गुरु भक्ति के द्वारा अपने आज के समय को आनंदमय बना लेता है उसे न तो बीते हुए कल का पश्चाताप होता है और ना ही आने वाले कल की चिंता सताती है। वे अपने जीवन के प्रत्येक क्षण का भरपूर आनंद उठाते हैं और सत् चित्त आनन्द स्वरूप होकर आत्मानंद में सदैव मगन रहते हैं। यदि कम शब्दों में यह कहा जाए कि गुरु भक्ति ही आत्म शान्ति एवं मुक्ति प्राप्त करने का सरलतम मार्ग है तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी क्योंकि इस मार्ग पर केवल एक भक्त का पुरुषार्थ नहीं अपितु गुरु की कृपा एवं तपोबल भी उसे इस लोक एवं परलोक में सहायक होता है। सत्संग कार्यक्रम का समापन सुंदर भजनों एवं विश्व शांति की प्रार्थना हेतु ध्यान साधना के साथ किया गया।

जगाधरी, हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया जिसके दौरान परम पूजनीय दिव्य गुरु आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री नीलम भारती जी ने जीवन में भक्ति का महत्व बताते हुए कहा कि भक्ति एक स्वस्थ जीवन का आधार है जो हमें मानसिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक बल प्रदान करने में सहायक होती है। भगवान के निराकार स्वरूप की भक्ति बड़ी सरल है परन्तु जब परमात्मा के साकार स्वरूप की भक्ति की बात आती है तो यहाँ सर्वप्रथम अपना अहंकार छोड़ना पड़ता है और साकार स्वरूप की भक्ति में मनमाने आचरण के लिए कोई स्थान नहीं रहता क्योंकि निरंतर गुरु आज्ञा में चलते हुए अपने मन के विकारों एवं बुद्धि के दुर्विचारों को छोड़ना पड़ता है। स्वयं को मानव से महामानव बनाने की प्रक्रिया में गुरु के कुशल हाथों में गढ़े जाने के लिए तत्पर रहना होता है। गुरु भक्ति ही भक्ति का वह दिव्यतम् स्वरूप है जिसमें एक मानव देवतुल्य बन जाता है क्योंकि जब जीवन में गुरु भक्ति आती है तो वह शिष्य को कभी शिष्य नहीं रहने देती और गुरु के दिव्य गुणों को शिष्य के भीतर उतार कर उसे भी दिव्य बना देती है। फिर ऐसा गुरु भक्त जो गुरु भक्ति की पराकाष्ठा को प्राप्त कर चुका हो, स्वकल्याण के साथ अपने संपर्क में आने वाले जन समूह को भी कल्याण के मार्ग पर अग्रसर करता है। एक गुरु भक्त मोक्ष का वह द्वार बन जाता है जिसके संपर्क में आने वाले भी सुख व शान्ति प्राप्त करते हैं। गुरु भक्ति वह कल्पवृक्ष है जो अपनी शरण में आने वाले प्रत्येक शरणार्थी को इच्छा पूर्ति का वरदान देता है। यदि कोई सांसारिक इच्छा की पूर्ति हेतु गुरु भक्ति करता है, तो भी उसे वह सब कुछ प्राप्त हो जाता है जो वह पाना चाहता हो परन्तु ऐसा सकाम भक्त उस अनमोल निधि से वंचित रह जाता है जो गुरु अपनी कृपा के द्वारा शिष्य की झोली में अनायास ही डाल देते हैं। जब शिष्य मन वचन कर्म को गुरु आज्ञा में समर्पित करके चलता है तो उसे आरंभिक अवस्था में अवश्य ही परीक्षा के दौर से गुज़रना पड़ता हो किन्तु गुरु उसे ब्रह्माण्ड की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि से परिपूर्ण कर देते हैं जिसे पाने के लिए देवी देवता भी तरसते हैं। गुरु भक्ति में पगा हुआ हृदय ही वास्तविक रूप में भक्ति के आनंद को चखता है क्योंकि ऐसे गुरु भक्त का जीवन सदैव परिपूर्ण व आत्म संतुष्टि से भरपूर होता है जो अपनी सभी इच्छाओं एवं कामनाओं को छोड़कर केवल अपने मानव जीवन के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु भक्ति मार्ग पर डट जाता है। वह कल्याणकारी साधक केवल शिष्य नहीं अपितु एक आदर्श गुरु भक्त बन कर समाज में प्रतिष्ठित होता है। गुरु भक्ति के रंग में जीवन को रंगने वाले गुरु भक्तों का जीवन महोत्सव बन जाता है जिनका प्रत्येक क्षण ही जीवन मुक्ति के आनंद से परिपूर्ण होता है। जो गुरु भक्ति के द्वारा अपने आज के समय को आनंदमय बना लेता है उसे न तो बीते हुए कल का पश्चाताप होता है और ना ही आने वाले कल की चिंता सताती है। वे अपने जीवन के प्रत्येक क्षण का भरपूर आनंद उठाते हैं और सत् चित्त आनन्द स्वरूप होकर आत्मानंद में सदैव मगन रहते हैं। यदि कम शब्दों में यह कहा जाए कि गुरु भक्ति ही आत्म शान्ति एवं मुक्ति प्राप्त करने का सरलतम मार्ग है तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी क्योंकि इस मार्ग पर केवल एक भक्त का पुरुषार्थ नहीं अपितु गुरु की कृपा एवं तपोबल भी उसे इस लोक एवं परलोक में सहायक होता है। सत्संग कार्यक्रम का समापन सुंदर भजनों एवं विश्व शांति की प्रार्थना हेतु ध्यान साधना के साथ किया गया।

Ambala, Ambala | Jul 6, 2026

5 जुलाई 2026........
एक देश–एक किताब एवं एक समान फीस की मांग को लेकर आज फव्वारा चौक, यमुनानगर में अभिभावकों द्वारा शिक्षा विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए प्रतीकात्मक पुतला दहन किया गया।

प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग की कथित नाकामियों और लापरवाही के कारण निजी स्कूलों को संरक्षण मिल रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि हरियाणा के 35 निजी स्कूलों के दोषी पाए जाने के बावजूद भी शिक्षा विभाग द्वारा अब तक उनके विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। इसी के विरोध में शिक्षा विभाग का प्रतीकात्मक पुतला दहन कर अपना लोकतांत्रिक विरोध दर्ज कराया गया।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि दोषी संस्थानों पर समय रहते निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई की जाती, तो शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का कथित आर्थिक शोषण नहीं होता। उन्होंने मांग की कि दोषी पाए गए सभी निजी स्कूलों के विरुद्ध शीघ्र और पारदर्शी कार्रवाई की जाए तथा शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

अभिभावकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन कोjb और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने सरकार और शिक्षा विभाग से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, समानता और न्याय सुनिश्चित करने की मांग की।
#shikshagibhag
#viralvideo
#yamunaNagarjagadhri

5 जुलाई 2026........ एक देश–एक किताब एवं एक समान फीस की मांग को लेकर आज फव्वारा चौक, यमुनानगर में अभिभावकों द्वारा शिक्षा विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए प्रतीकात्मक पुतला दहन किया गया। प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग की कथित नाकामियों और लापरवाही के कारण निजी स्कूलों को संरक्षण मिल रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि हरियाणा के 35 निजी स्कूलों के दोषी पाए जाने के बावजूद भी शिक्षा विभाग द्वारा अब तक उनके विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। इसी के विरोध में शिक्षा विभाग का प्रतीकात्मक पुतला दहन कर अपना लोकतांत्रिक विरोध दर्ज कराया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि दोषी संस्थानों पर समय रहते निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई की जाती, तो शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का कथित आर्थिक शोषण नहीं होता। उन्होंने मांग की कि दोषी पाए गए सभी निजी स्कूलों के विरुद्ध शीघ्र और पारदर्शी कार्रवाई की जाए तथा शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। अभिभावकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन कोjb और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने सरकार और शिक्षा विभाग से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, समानता और न्याय सुनिश्चित करने की मांग की। #shikshagibhag #viralvideo #yamunaNagarjagadhri

Ambala, Ambala | Jul 6, 2026

अंतर्राष्ट्रीय जाट धर्मशाला, कुरुक्षेत्र द्वारा भारतीय सिविल सेवा परीक्षाओं, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय तथा विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं युवाओं के सम्मान में भव्य "प्रतिभा सम्मान समारोह" आयोजित किया गया। कार्यक्रम में समाज की 36 बिरादरी के मेधावी विद्यार्थियों एवं युवाओं को सम्मानित कर शिक्षा, प्रतिभा और सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हरियाणा पुलिस के आईजी पंकज नैन रहे। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. चित्रलेखा शर्मा, डॉ. सतबीर कादियान, श्री रेशम सिंह, संत गोपाल दास, दिल्ली फ्लाइंग क्लब के डायरेक्टर अनिल शर्मा, दिल्ली फायर सर्विस के अधिकारी एवं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डॉ. धर्मपाल भारद्वाज, जय हिंद मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश शर्मा तथा पूर्व कुलपति डॉ. रणपाल उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि एवं अन्य वक्ताओं ने कहा कि प्रतिभाशाली युवाओं का सम्मान केवल उनकी उपलब्धियों का अभिनंदन नहीं, बल्कि समाज की आने वाली पीढ़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, शोध और नवाचार ही विकसित भारत की मजबूत नींव हैं तथा समाज को ऐसे विद्यार्थियों का निरंतर उत्साहवर्धन करना चाहिए।
समारोह में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले स्वाति आर्य (रैंक 366), शगुन मेहरा (रैंक 618), निकिता वर्मा (रैंक 30), एकांश ढुल (रैंक 3), अध्ययन बाजपेयी (रैंक 414), सिमरनजीत कौर (रैंक 15), अनन्य राणा (रैंक 60) तथा जयंत गर्ग (रैंक 64) को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
इसके अतिरिक्त भूवैज्ञानिक अभिनव पुनिया, अंतरराष्ट्रीय पत्रकार सोनल नैन, विश्व बैंक में कार्यरत भारतीय अर्थशास्त्री गरिमा नैन तथा भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) की साइंटिफिक ऑफिसर प्रियंका चहल को उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में यूजीसी-नेट जेआरएफ उत्तीर्ण शोधार्थियों के साथ-साथ हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की दसवीं एवं बारहवीं कक्षाओं में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्वतंत्र समूह सेवा समिति एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय पूर्व छात्र एसोसिएशन द्वारा बोर्ड परीक्षा के मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
इस अवसर पर रहबरे आज़म दीनबंधु सर छोटूराम लाइब्रेरी का विधिवत उद्घाटन भी किया गया। अतिथियों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तकालय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए ज्ञान और प्रेरणा का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अंतर्राष्ट्रीय जाट धर्मशाला के प्रधान डॉ. कृष्ण श्योकंद ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं अभिभावकों का स्वागत करते हुए कहा कि समाज की प्रतिभाओं का सम्मान करना अंतर्राष्ट्रीय जाट धर्मशाला की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी शिक्षा, शोध एवं युवा सशक्तिकरण के लिए ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे। सभी अतिथियों ने अंतर्राष्ट्रीय जाट धर्मशाला द्वारा किए जा रहे शैक्षिक एवं सामाजिक कार्यों की मुक्त कंठ से सराहना की। कार्यक्रम का संचालन अक्षय नरवाल ने किया। इस अवसर पर उपप्रधान बनी सिंह ढुल, सचिव हरिकेश सहारण, कैशियर नरेंद्र नैन, गंगा बिशन सहारण, जितेंद्र घराड़सी, बलविंदर, साधुराम कोलेखां, डॉ. जितेंद्र खटकड़, अवतार सीड़ा, गुलाब घराड़सी, सुभाष बारना, बलकार सरसा, राजेंद्र हथिरा, ईश्वर ढांडा, जसवंत कोलेखां, भाग सिंह, सुखबीर श्योकंद, सुरेश जाजनवाला, दरिया घराड़सी, डॉ. भरत सिंह ढुल, डॉ. सुरेश खत्री, दलबीर घराड़सी सहित अंतर्राष्ट्रीय जाट धर्मशाला की समस्त कार्यकारिणी, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद्, अभिभावक एवं समाज के अनेक प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।

अंतर्राष्ट्रीय जाट धर्मशाला, कुरुक्षेत्र द्वारा भारतीय सिविल सेवा परीक्षाओं, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय तथा विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं युवाओं के सम्मान में भव्य "प्रतिभा सम्मान समारोह" आयोजित किया गया। कार्यक्रम में समाज की 36 बिरादरी के मेधावी विद्यार्थियों एवं युवाओं को सम्मानित कर शिक्षा, प्रतिभा और सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हरियाणा पुलिस के आईजी पंकज नैन रहे। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. चित्रलेखा शर्मा, डॉ. सतबीर कादियान, श्री रेशम सिंह, संत गोपाल दास, दिल्ली फ्लाइंग क्लब के डायरेक्टर अनिल शर्मा, दिल्ली फायर सर्विस के अधिकारी एवं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डॉ. धर्मपाल भारद्वाज, जय हिंद मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश शर्मा तथा पूर्व कुलपति डॉ. रणपाल उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि एवं अन्य वक्ताओं ने कहा कि प्रतिभाशाली युवाओं का सम्मान केवल उनकी उपलब्धियों का अभिनंदन नहीं, बल्कि समाज की आने वाली पीढ़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, शोध और नवाचार ही विकसित भारत की मजबूत नींव हैं तथा समाज को ऐसे विद्यार्थियों का निरंतर उत्साहवर्धन करना चाहिए। समारोह में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले स्वाति आर्य (रैंक 366), शगुन मेहरा (रैंक 618), निकिता वर्मा (रैंक 30), एकांश ढुल (रैंक 3), अध्ययन बाजपेयी (रैंक 414), सिमरनजीत कौर (रैंक 15), अनन्य राणा (रैंक 60) तथा जयंत गर्ग (रैंक 64) को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त भूवैज्ञानिक अभिनव पुनिया, अंतरराष्ट्रीय पत्रकार सोनल नैन, विश्व बैंक में कार्यरत भारतीय अर्थशास्त्री गरिमा नैन तथा भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) की साइंटिफिक ऑफिसर प्रियंका चहल को उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में यूजीसी-नेट जेआरएफ उत्तीर्ण शोधार्थियों के साथ-साथ हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की दसवीं एवं बारहवीं कक्षाओं में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्वतंत्र समूह सेवा समिति एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय पूर्व छात्र एसोसिएशन द्वारा बोर्ड परीक्षा के मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। इस अवसर पर रहबरे आज़म दीनबंधु सर छोटूराम लाइब्रेरी का विधिवत उद्घाटन भी किया गया। अतिथियों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तकालय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए ज्ञान और प्रेरणा का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। कार्यक्रम के प्रारंभ में अंतर्राष्ट्रीय जाट धर्मशाला के प्रधान डॉ. कृष्ण श्योकंद ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं अभिभावकों का स्वागत करते हुए कहा कि समाज की प्रतिभाओं का सम्मान करना अंतर्राष्ट्रीय जाट धर्मशाला की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी शिक्षा, शोध एवं युवा सशक्तिकरण के लिए ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे। सभी अतिथियों ने अंतर्राष्ट्रीय जाट धर्मशाला द्वारा किए जा रहे शैक्षिक एवं सामाजिक कार्यों की मुक्त कंठ से सराहना की। कार्यक्रम का संचालन अक्षय नरवाल ने किया। इस अवसर पर उपप्रधान बनी सिंह ढुल, सचिव हरिकेश सहारण, कैशियर नरेंद्र नैन, गंगा बिशन सहारण, जितेंद्र घराड़सी, बलविंदर, साधुराम कोलेखां, डॉ. जितेंद्र खटकड़, अवतार सीड़ा, गुलाब घराड़सी, सुभाष बारना, बलकार सरसा, राजेंद्र हथिरा, ईश्वर ढांडा, जसवंत कोलेखां, भाग सिंह, सुखबीर श्योकंद, सुरेश जाजनवाला, दरिया घराड़सी, डॉ. भरत सिंह ढुल, डॉ. सुरेश खत्री, दलबीर घराड़सी सहित अंतर्राष्ट्रीय जाट धर्मशाला की समस्त कार्यकारिणी, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद्, अभिभावक एवं समाज के अनेक प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।

Ambala, Ambala | Jul 6, 2026

माधोपुर बीएसएफ कैम्प में जवानों के साथ समय बिताने का अवसर मिला। देश की सीमाओं की रक्षा में दिन-रात तत्पर रहने वाले इन वीर जवानों का अनुशासन, साहस, समर्पण और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणास्रोत है।..

माधोपुर बीएसएफ कैम्प में जवानों के साथ समय बिताने का अवसर मिला। देश की सीमाओं की रक्षा में दिन-रात तत्पर रहने वाले इन वीर जवानों का अनुशासन, साहस, समर्पण और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणास्रोत है।..

Ambala, Ambala | Jul 6, 2026

Viresh Shandilya Ko Amritpal Singh Ka Sathi Marega Suniye Audio Recording - Haryana News