राज्यस्तरीय कारगिल विजय दिवस समारोह में मंडी जिला के इकलौते सैन्य अधिकारी और धर्मपुर के एकमात्र शहीद सेना कैप्टन दीपक गुलेरिया के परिवार की उपेक्षा निंदनीय
धर्मपुर (मंडी)
धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के टीहरा में आयोजित राज्यस्तरीय कारगिल विजय दिवस समारोह में प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह में विभिन्न पूर्व सैनिकों एवं वीर सैनिकों को सम्मानित किया गया, लेकिन अत्यंत दुख और पीड़ा का विषय है कि मंडी जिला के इकलौते सैन्य अधिकारी और धर्मपुर के एकमात्र शहीद कैप्टन दीपक गुलेरिया के परिवार को न तो कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया और न ही सम्मानित किया गया।
सबसे अधिक आश्चर्यजनक बात यह है कि शहीद कैप्टन दीपक गुलेरिया का पैतृक गांव चोल्थरा कार्यक्रम स्थल टीहरा से मात्र तीन-चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद उनके परिवार की अनदेखी कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
शहीद कैप्टन दीपक गुलेरिया ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके पिता स्वर्गीय श्री मोहन लाल गुलेरिया भी भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे चुके थे। उनका भी अब निधन हो चुका है। इतना ही नहीं, गत वर्ष शहीद के छोटे भाई श्री दिनेश गुलेरिया का भी असामयिक निधन हो गया। आज इस वीर परिवार में केवल शहीद की वृद्ध माता श्रीमती सत्या गुलेरिया और भाजपा नेत्री एवं पूर्व जिला परिषद सदस्य श्रीमती बंदना गुलेरिया ही साथ रहती हैं।
ऐसे में यह और भी अधिक संवेदनशील विषय बन जाता है कि राज्यस्तरीय कारगिल विजय दिवस समारोह, जो उनके घर से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर आयोजित हुआ, उसमें शहीद की वृद्ध माता श्रीमती सत्या गुलेरिया को न तो कोई निमंत्रण भेजा गया और न ही उन्हें सम्मानित करने का प्रयास किया गया। यह केवल एक परिवार की उपेक्षा नहीं, बल्कि उस बलिदान की उपेक्षा प्रतीत होती है, जिसने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
यह भी उल्लेखनीय है कि शहीद कैप्टन दीपक गुलेरिया भाजपा नेत्री एवं पूर्व जिला परिषद सदस्य श्रीमती बंदना गुलेरिया के जेठ थे। किंतु किसी भी लोकतंत्र में शहीदों का सम्मान राजनीतिक विचारधारा या दलगत सीमाओं से ऊपर होना चाहिए। शहीद पूरे राष्ट्र की धरोहर होते हैं।
प्रदेश सरकार और धर्मपुर के विधायक श्री चंद्रशेखर से यह पूछा जाना चाहिए कि आखिर ऐसी कौन-सी वजह थी कि राज्यस्तरीय कार्यक्रम में मंडी जिले के इस वीर सपूत के परिवार को आमंत्रित करना भी आवश्यक नहीं समझा गया। यदि यह प्रशासनिक चूक थी तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, और यदि ऐसा जानबूझकर किया गया तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
कारगिल विजय दिवस केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन वीर सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। यदि ऐसे अवसर पर भी एक शहीद की वृद्ध माता सम्मान और निमंत्रण से वंचित रह जाए, तो यह सरकार की संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
प्रदेश सरकार से मांग की जाती है कि इस पूरे प्रकरण पर अपना पक्ष स्पष्ट करे, यदि कोई चूक हुई है तो सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करे तथा शहीद कैप्टन दीपक गुलेरिया के परिवार को सम्मानित कर इस भूल का शीघ्र सुधार करे। भविष्य में यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी शहीद परिवार को ऐसी उपेक्षा का सामना न करना पड़े।
Dharmpur, Mandi | Jul 26, 2026