यमुना में प्रतिबंधित मछलियों का अवैध शिकार जारी, ग्रामीणों ने उठाए गंभीर सवाल
छोटी मछलियों समेत प्रतिबंधित प्रजातियों के पकड़े जाने का आरोप, कार्रवाई की मांग तेज
किशनपुर क्षेत्र में अवैध आखेट पर रोक लगाने को प्रशासन से विशेष अभियान चलाने की अपील
✒️रिपोर्ट पिंटू तिवारी
किशनपुर/फतेहपुर। फतेहपुर जनपद के किशनपुर थाना क्षेत्र के समीप यमुना नदी में प्रतिबंध के बावजूद मछलियों के अवैध शिकार की शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नदी में जाल डालकर छोटी मछलियों के साथ प्रतिबंधित प्रजातियों का भी खुलेआम आखेट किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से जलीय जीवों के संरक्षण पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
फतेहपुर। किशनपुर क्षेत्र से गुजरने वाली यमुना नदी में कथित रूप से प्रतिबंधित अवधि के दौरान भी मछली पकड़ने का सिलसिला जारी है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार गुरवल, मड़ौली, एकडला, गढ़ा, मडैयन, महावतपुर असहट और किशनपुर सहित कई घाटों और नदी किनारे के क्षेत्रों में जाल डालकर मछलियां पकड़ी जा रही हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि किशनपुर के समीप नदी में बड़ी संख्या में छोटी मछलियां और प्रतिबंधित प्रजातियां पकड़ी जा रही हैं। उनका कहना है कि प्रजनन काल में मछलियों का शिकार होने से नदी के प्राकृतिक संतुलन और जलीय जीवों की संख्या पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
संरक्षण पर मंडरा रहा खतरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार छोटे आकार की मछलियों के आखेट से भविष्य में यमुना नदी में मछलियों की संख्या कम होने की आशंका बढ़ रही है। ग्रामीणों ने इसे केवल आजीविका का नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी गंभीर विषय बताया है।
विभागीय कार्रवाई पर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभाग की अनदेखी के कारण अवैध आखेट करने वालों के हौसले बुलंद हैं। लोगों ने मांग की है कि मत्स्य विभाग, प्रशासन और पुलिस संयुक्त रूप से नदी क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर अवैध जालों को जब्त करें और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करें।
उठ रहे हैं अहम सवाल
- क्या यमुना नदी में प्रतिबंधित अवधि के दौरान नियमित निगरानी हो रही है?
- क्या अवैध जालों की जांच और जब्ती की कार्रवाई की जा रही है?
- छोटी मछलियों और प्रतिबंधित प्रजातियों के संरक्षण के लिए क्या व्यवस्था है?
- शिकायतों पर संबंधित विभाग ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
यमुना नदी का पारिस्थितिकी तंत्र स्थानीय आजीविका और जैव विविधता दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में आवश्यक है कि संबंधित विभाग शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे। यदि अवैध आखेट की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई कर नदी और जलीय जीवों के संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
🟥 ND NEWS | दैनिक निष्पक्ष धारा की अपील
एनडी न्यूज़ सभी नागरिकों से अपील करता है कि नदियों, तालाबों और अन्य जलस्रोतों में प्रतिबंधित अवधि के दौरान मछली पकड़ने से बचें तथा अवैध आखेट की सूचना तुरंत प्रशासन या मत्स्य विभाग को दें। पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की नहीं बल्कि समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है।
जनहित सुझाव
- प्रतिबंधित अवधि में मछली पकड़ने से बचें।
- छोटी मछलियों और संरक्षित प्रजातियों को पकड़ने से रोकें।
- अवैध जाल और शिकार की सूचना प्रशासन को दें।
- नदी किनारे स्वच्छता बनाए रखें।
- मत्स्य विभाग नियमित निगरानी और जनजागरूकता अभियान चलाए।
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