चाइनीस एल ई डी लाइट का वाहनों में बढ़ रहा है प्रयोग
जिसकी वजह से सामने आने वाला वाहन चालक कुछ देख नहीं पाता
आंखों के लिए बहुत ही खतरनाक है यह एल ई डी लाइटे नेत्र विशेषज्ञों का कहना है
यातायात विभाग को हादसों की रोकथाम के लिए इन लाइटों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए
हाई-इंटेंसिटी LED और HID लाइट्स: आजकल बहुत से लोग बिना सोचे-समझे गाड़ियों में बेहद तेज़ सफ़ेद रोशनी वाली LED या HID बल्ब्स लगवा लेते हैं।
आफ्टरमार्केट फ्लैशर और ब्लिंकर्स: कुछ लोग ऐसी लाइटें लगवाते हैं जो लगातार झपकती (blink करती) रहती हैं, जिससे पीछे या सामने वाले का ध्यान पूरी तरह भटक जाता है।
चकाचौंध (Glaring Effect): जब सामने से आ रहे दुपहिया वाहन की तेज़ सफ़ेद लाइट सीधे आँखों पर पड़ती है, तो सामने वाले ड्राइवर को कुछ सेकंड के लिए दिखना बिल्कुल बंद हो जाता है। इसे मेडिकल भाषा में 'नाइफ ब्लाइंडनेस' (Night Blindness/Glare) भी कहते हैं। इन कुछ सेकंड्स में गाड़ी कहाँ जा रही है, अंदाज़ा लगाना मुश्किल होता है।
सड़क की बनावट या गड्ढे न दिखना: अचानक आँखें चौंधिया जाने से सामने चल रहा कोई राहगीर, अचानक आया गड्ढा या मोड़ दिखाई नहीं देता, जिससे गाड़ियां अनियंत्रित हो जाती हैं।
खुद को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?
अगर सामने से कोई ऐसी तेज़ लाइट आ रही हो, तो सीधे उस लाइट की तरफ देखने के बजाय अपनी बाईं (left) तरफ सड़क के किनारे की पट्टी को देखें। इससे आपकी आँखों पर सीधा असर नहीं पड़ेगा और आप गाड़ी पर कंट्रोल रख पाएंगे।
अपनी गाड़ी की हेडलाइट को हमेशा 'लो-बीम' (Low-Beam / डीपर) पर रखें, खासकर शहर के अंदर या जहां सामने से गाड़ियां आ रही हों। 'हाई-बीम' का इस्तेमाल सिर्फ बिल्कुल अंधेरी और खाली सड़कों पर ही करना चाहिए।