🌼🌸 ..रक्षाबंधन.. 🌸🌼
बहन की स्नेह की तरंगे ही
रक्षाबंधन के धागे है।
मानव संबंधों में बहन ही होती है जो अपने भाई के भले का निरंतर चिंतन करती है,फिक्र करती है।
हर परिस्थिति में बहन हमेशा भाई के लिए शुभकानाएं करती है।
बहन का यह स्नेह बिना कारण,बिना किसी स्वार्थ,बिना किसी विशेष अवसर के
हर समय बहन अपने भाई की फिक्र करती है।
स्नेह का यह ईश्वर द्वारा दिया गया अनुपम भेंट है,
भगवान कृष्ण ने गीता में जिस निष्काम कर्म योग की बात करते है,वह योग भाई बहन के रिश्ते में स्वत: विधमान रहता है।
बहन के हृदय से निष्काम भाव भाई की भलाई के लिए स्नेह की तरंगे सदा निकलती रहती है
हमारे ऋषियों ने स्नेह के इन सूक्ष्म तरंगों देखा समझा,
और
इन तरंगों को धागे के रूप में भाई की कलाई में बांधने की परंपरा स्थापित कर दिया।
हां जी
सूक्ष्म दुनिया की हर तरह की तरंगे पॉवरफुल और परफेक्ट होती है।
बस इन तरंगों ने पूरी करुणा होनी चाहिए,
निष्काम भाव की करुणा होनी चाहिए
तो ये सूक्ष्म दुनिया की तरंगे भौतिक दुनिया में प्रभावी हो ही जाती है।
अस्तु
बहन की स्नेह की ये तरंगे भाई की हमेशा रक्षा करती है।
इन्हीं तरंगों को राखी के धागे के रूप में लेकर आज बहन अपने भाई के घर आती है।
और
भाई की कलाई में इन धागों को बांधकर बहन दुआ देती है कि मेरा भाई हमेशा खुश रहे,स्वस्थ रहे।
आज
आपके लिए बहन ये दुआएँ लेकर आई है तो वाकई में आप बहुत सौभाग्यशाली है।
रक्षाबंधन पर्व की बहुत बहुत शुभकामनाएं
🙏
ताराचंद बेलजी
प्रोफेसर - प्राकृतिक खेती
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर
Jabalpur, Jabalpur | Aug 28, 2026