केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत की पहली राष्ट्रीय नदी जोड़ो (River Linking) परियोजना है। इसका उद्देश्य मध्य प्रदेश की केन नदी का पानी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की बेतवा नदी तक पहुंचाना है, ताकि बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन को बढ़ावा मिल सके। यह परियोजना केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की संयुक्त परियोजना है।
लाखों हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी।
बुंदेलखंड के कई जिलों में पेयजल उपलब्ध होगा।
जल संकट कम होगा।
जलविद्युत उत्पादन भी होगा।
परियोजना का सबसे बड़ा विरोध मध्य प्रदेश के छतरपुर, पन्ना और आसपास के प्रभावित गांवों में रहने वाले आदिवासी और ग्रामीण कर रहे हैं। उनका कहना है कि:
हजारों परिवारों के विस्थापन का खतरा है।
जंगल, खेती और आजीविका प्रभावित होगी।
पुनर्वास और मुआवजे में अनियमितताएं हैं।
प्रशासन ने पहले किए गए कई आश्वासन पूरे नहीं किए।
प्रभावित ग्रामीणों ने पहले ज्ञापन, धरने और प्रशासन से बातचीत का रास्ता अपनाया।
अप्रैल 2026 में प्रशासन के आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित किया गया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वादे पूरे नहीं हुए, इसलिए जुलाई 2026 में आंदोलन दोबारा शुरू किया गया।
3 जुलाई 2026 से छतरपुर के कुपी गांव के पास बराना नदी किनारे प्रभावित ग्रामीणों, खासकर आदिवासी महिलाओं ने "चिता आंदोलन" शुरू किया। इसमें प्रतीकात्मक रूप से चिता के पास बैठकर विरोध किया गया। आंदोलन के दौरान अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और जल सत्याग्रह भी किया गया।
19 जुलाई 2026 की सुबह बड़ी संख्या में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी आंदोलन स्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शन स्थल खाली कराया और प्रदर्शनकारियों को वाहनों से उनके गांव भेज दिया। कुछ प्रदर्शनकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बल प्रयोग किया गया और आंदोलन के संयोजक अमित भटनागर को हिरासत में लिया गया, जबकि पुलिस ने गिरफ्तारी से इनकार किया और कहा कि कार्रवाई सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई।
केन-बेतवा परियोजना पर निर्माण कार्य आगे बढ़ रहा है, जबकि प्रभावित ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों की ओर से पुनर्वास, मुआवजे और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर विरोध और कानूनी लड़ाई जारी है। यह मामला विकास बनाम पर्यावरण