जब समुद्र मंथन के दौरान ‘हलाहल’ नाम का भयानक विष निकला, तो ब्रह्मांड को बचाने के लिए भगवान शिव ने उसे अपने गले में धारण कर लिया।
विष के कारण उनका गला नीला पड़ गया (जिससे वे ‘नीलकंठ’ कहलाए) और उनके शरीर का तापमान अत्यधिक बढ़ गया।
भगवान शिव के शरीर की जलन और बेचैनी को शांत करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने उन पर पवित्र गंगाजल चढ़ाया था। माना जाता है कि तभी से सावन के महीने में शिव जी पर गंगाजल चढ़ाने (कावड़ लाने) की परंपरा शुरू हुई।
Har Har Mahadev ॐ
Ladpura, Kota | Aug 16, 2026