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गिर्वा: कोरोना को रोकने के लिए जन अनुशासन पखवाड़ा होने के बावजूद ये क्रिकेट खेलने में व्यस्त है। ये कैसा अनुशासन??

Girwa, Udaipur | Apr 24, 2021

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सन्डे ऑन साईकिल अभियान के तहत उदयपुर पुलिस ने निकाली भव्य साइकिल रैली..
स्वस्थ शरीर, स्वस्थ पर्यावरण और फिट इंडिया का दिया सन्देश.
@topfans News 24 Udaipur Udaipur Police IGP Udaipur RANGE Rajasthan Police  Anjana Sukhwal 
Fit India Movement 
#fitindia #cycling #udaipur #viralpost #vlog #viralreelschallenge #viralreels #nonfollowers

सन्डे ऑन साईकिल अभियान के तहत उदयपुर पुलिस ने निकाली भव्य साइकिल रैली.. स्वस्थ शरीर, स्वस्थ पर्यावरण और फिट इंडिया का दिया सन्देश. @topfans News 24 Udaipur Udaipur Police IGP Udaipur RANGE Rajasthan Police Anjana Sukhwal Fit India Movement #fitindia #cycling #udaipur #viralpost #vlog #viralreelschallenge #viralreels #nonfollowers

Girwa, Udaipur | Jun 7, 2026

*उत्तर पश्चिम रेलवे पर ‘संडेज ऑन साइकिल’ अभियान के अन्तर्गत साइक्लोथॉन एवं वॉकथॉन का आयोजन*
#railwaynews 
उत्तर पश्चिम रेलवे स्पोर्ट्स एशोसियेशन के तत्वाधान में जयपुर मंडल द्वारा वर्ल्ड साइकिल डे के उपलक्ष्य में फिट इंडिया मिशन के अंतर्गत स्वस्थ जीवनशैली, शारीरिक सक्रियता तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिनांक 7 जून 2026 (रविवार) को जयपुर स्थित के. पी. सिंह स्टेडियम, गणपति नगर में “संडेज ऑन साइकिल” अभियान के अन्तर्गत साइक्लोथॉन एवं वॉकथॉन का आयोजन किया गया। 

उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री अमित सुदर्शन के अनुसार स्वस्थ जीवनशैली, शारीरिक सक्रियता तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिनांक 7 जून 2026 (रविवार) को जयपुर स्थित के. पी. सिंह स्टेडियम, गणपति नगर में “संडेज ऑन साइकिल” अभियान के अन्तर्गत साइक्लोथॉन एवं वॉकथॉन का आयोजन किया गया। “संडेज ऑन साइकिल” अभियान ने देशभर में स्वास्थ्य एवं फिटनेस के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जिनमें लाखों नागरिकों ने भागीदारी कर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया है। अभियान के अंतर्गत साइक्लिंग के साथ-साथ योग, जुम्बा, रस्सीकूद तथा अन्य फिटनेस गतिविधियों को भी शामिल किया गया है।

7 जून 2026 (रविवार) को आयोजित इस विशेष अभियान का उद्देश्य नागरिकों को नियमित शारीरिक गतिविधियों के प्रति प्रेरित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, ईंधन बचत तथा सतत विकास के संदेश को भी जन-जन तक पहुँचाना है । साइकिल का उपयोग न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह प्रदूषण नियंत्रण तथा हरित वातावरण के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
 
“संडेज ऑन साइकिल” अभियान के अन्तर्गत आयोजित साइक्लोथॉन एवं वॉकथॉन कार्यक्रम में स्वस्थ जीवनशैली के महत्व के बारे में भी अवगत कराया गया।

“संडेज ऑन साइकिल” अभियान के अन्तर्गत साइक्लोथॉन एवं वॉकथॉन कार्यक्रम में रेलवे अधिकारियों, कर्मचारियों, खिलाड़ियों तथा आम नागरिकों व बच्चों ने भाग लिया।

*उत्तर पश्चिम रेलवे पर ‘संडेज ऑन साइकिल’ अभियान के अन्तर्गत साइक्लोथॉन एवं वॉकथॉन का आयोजन* #railwaynews उत्तर पश्चिम रेलवे स्पोर्ट्स एशोसियेशन के तत्वाधान में जयपुर मंडल द्वारा वर्ल्ड साइकिल डे के उपलक्ष्य में फिट इंडिया मिशन के अंतर्गत स्वस्थ जीवनशैली, शारीरिक सक्रियता तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिनांक 7 जून 2026 (रविवार) को जयपुर स्थित के. पी. सिंह स्टेडियम, गणपति नगर में “संडेज ऑन साइकिल” अभियान के अन्तर्गत साइक्लोथॉन एवं वॉकथॉन का आयोजन किया गया। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री अमित सुदर्शन के अनुसार स्वस्थ जीवनशैली, शारीरिक सक्रियता तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिनांक 7 जून 2026 (रविवार) को जयपुर स्थित के. पी. सिंह स्टेडियम, गणपति नगर में “संडेज ऑन साइकिल” अभियान के अन्तर्गत साइक्लोथॉन एवं वॉकथॉन का आयोजन किया गया। “संडेज ऑन साइकिल” अभियान ने देशभर में स्वास्थ्य एवं फिटनेस के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जिनमें लाखों नागरिकों ने भागीदारी कर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया है। अभियान के अंतर्गत साइक्लिंग के साथ-साथ योग, जुम्बा, रस्सीकूद तथा अन्य फिटनेस गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। 7 जून 2026 (रविवार) को आयोजित इस विशेष अभियान का उद्देश्य नागरिकों को नियमित शारीरिक गतिविधियों के प्रति प्रेरित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, ईंधन बचत तथा सतत विकास के संदेश को भी जन-जन तक पहुँचाना है । साइकिल का उपयोग न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह प्रदूषण नियंत्रण तथा हरित वातावरण के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। “संडेज ऑन साइकिल” अभियान के अन्तर्गत आयोजित साइक्लोथॉन एवं वॉकथॉन कार्यक्रम में स्वस्थ जीवनशैली के महत्व के बारे में भी अवगत कराया गया। “संडेज ऑन साइकिल” अभियान के अन्तर्गत साइक्लोथॉन एवं वॉकथॉन कार्यक्रम में रेलवे अधिकारियों, कर्मचारियों, खिलाड़ियों तथा आम नागरिकों व बच्चों ने भाग लिया।

Girwa, Udaipur | Jun 7, 2026

‘साइकिल ऑफ लाईफ’ में मंचित की गई बाप-बेटे के संबंधों की मार्मिक कथा
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उदयपुर, 7 जून। जीवन यात्रा के उतार-चढ़ाव तथा बाप-बेटे के संबंधों की मार्मिक कथा रविवार की शाम शिल्पग्राम उदयपुर स्थित दर्पण सभागार में मंचित की गई। यह आयोजन पश्चिम क्षेत्र सास्कृतिक केंद्र उदयपुर द्वारा प्रति माह आयोजित होने वाली मासिक नाट्य संध्या ‘रंगशाला’ के अंतर्गत किया गया।

पश्चिम क्षेत्र सास्कृतिक केंद्र उदयपुर के निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने बताया कि रंगशाला के अंतर्गत प्रिज्म थिएटर सोसायटी दिल्ली द्वारा साइकिल ऑफ लाईफ नाटक का मंचन रविवार को शिल्पग्राम उदयपुर स्थित दर्पण सभागार में किया गया। इस नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन गिन्नी बब्बर ने की। दर्शकों से खचाखच भरे सभागार में इस प्रभावशाली प्रस्तुति को खूब सराहा गया।

नाटक में ललित प्रकाश ने बुजुर्ग बाप, निशांत कुमार ठाकुर ने बेटे तथा ज्योति नागपाल ने मां की भूमिका निभाते हुए नाटक में जीवन चक्र का बखूबी चित्रण किया। बाप-बेटे की नोकझोंक से शुरू होकर नाटक बाप की मृत्यु उपरांत बेटे के जीवन में बदलाव तथा इस पूरे परिदृश्य में मां की स्थिति का चित्रण अभिनेताओं ने जीवंत कर दिया। नाटक में लाइटिंग का दायित्व निर्वहन विकास बाहरी ने किया।
रंगमंच प्रेमियों ने पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की इस पहल की प्रशंसा करते हुए ऐसे आयोजनों के लिए धन्यवाद दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी कलाकारों का सम्मान किया गया।

इस अवसर पर केन्द्र के उपनिदेशक (कार्यक्रम) पवन अमरावत, अधीक्षण अभियंता सी.एल. सालवी, कार्यक्रम अधिशाषी हेमंत मेहता, सिद्धांत भटनागर सहित केंद्र के अधिकारी-कर्मचारी एवं शहर के अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक (वित्तीय एवं लेखा) दुर्गेश चांदवानी ने किया।

‘साइकिल ऑफ लाईफ’ में मंचित की गई बाप-बेटे के संबंधों की मार्मिक कथा @followers @top fans News 24 Udaipur #viralreelschallenge #viralpost #vlog #udaipur #nonfollowers उदयपुर, 7 जून। जीवन यात्रा के उतार-चढ़ाव तथा बाप-बेटे के संबंधों की मार्मिक कथा रविवार की शाम शिल्पग्राम उदयपुर स्थित दर्पण सभागार में मंचित की गई। यह आयोजन पश्चिम क्षेत्र सास्कृतिक केंद्र उदयपुर द्वारा प्रति माह आयोजित होने वाली मासिक नाट्य संध्या ‘रंगशाला’ के अंतर्गत किया गया। पश्चिम क्षेत्र सास्कृतिक केंद्र उदयपुर के निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने बताया कि रंगशाला के अंतर्गत प्रिज्म थिएटर सोसायटी दिल्ली द्वारा साइकिल ऑफ लाईफ नाटक का मंचन रविवार को शिल्पग्राम उदयपुर स्थित दर्पण सभागार में किया गया। इस नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन गिन्नी बब्बर ने की। दर्शकों से खचाखच भरे सभागार में इस प्रभावशाली प्रस्तुति को खूब सराहा गया। नाटक में ललित प्रकाश ने बुजुर्ग बाप, निशांत कुमार ठाकुर ने बेटे तथा ज्योति नागपाल ने मां की भूमिका निभाते हुए नाटक में जीवन चक्र का बखूबी चित्रण किया। बाप-बेटे की नोकझोंक से शुरू होकर नाटक बाप की मृत्यु उपरांत बेटे के जीवन में बदलाव तथा इस पूरे परिदृश्य में मां की स्थिति का चित्रण अभिनेताओं ने जीवंत कर दिया। नाटक में लाइटिंग का दायित्व निर्वहन विकास बाहरी ने किया। रंगमंच प्रेमियों ने पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की इस पहल की प्रशंसा करते हुए ऐसे आयोजनों के लिए धन्यवाद दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी कलाकारों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर केन्द्र के उपनिदेशक (कार्यक्रम) पवन अमरावत, अधीक्षण अभियंता सी.एल. सालवी, कार्यक्रम अधिशाषी हेमंत मेहता, सिद्धांत भटनागर सहित केंद्र के अधिकारी-कर्मचारी एवं शहर के अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक (वित्तीय एवं लेखा) दुर्गेश चांदवानी ने किया।

Girwa, Udaipur | Jun 7, 2026

संस्कृत भविष्य की सुधारक, भारत की शक्ति और विश्व बंधुत्व का आधार : सोडाणी

वसुधैव कुटुम्बकम् का भाव केवल संस्कृत से संभव : परमानंद शर्मा 

संस्कृत भारत की जड़ है, इससे जुड़कर ही होगी उन्नति : प्रो. सारंगदेवोत
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#udaipur #viralreelschallenge #vlog #viralpost #nonfollowers #BhartiyaSanskruti #HinduSanskruti #hindu #sanatandharma
उदयपुर, 7 जून। संस्कृत भारत की सांस्कृतिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक शक्ति का मूल स्रोत है। संस्कृत न केवल विश्व की प्राचीनतम एवं वैज्ञानिक भाषा है, बल्कि भविष्य की सुधारक भाषा भी है। संस्कृत से ही अच्छे नागरिकों का निर्माण, सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण और राष्ट्र की उन्नति संभव है। यह विचार संस्कृत भारती उदयपुर विभाग द्वारा आयोजित छह दिवसीय आवासीय संस्कृत भाषा बोधन वर्ग के समारोप समारोह में मुख्य अतिथि राज्यपाल सलाहकार (उच्च शिक्षा) एवं पूर्व कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी ने व्यक्त किये। 

संस्कृत भारती उदयपुर विभाग द्वारा आयोजित छह दिवसीय आवासीय संस्कृत भाषा बोधन वर्ग का समारोप समारोह रविवार को उत्साह, गरिमा एवं संस्कृतमय वातावरण में सम्पन्न हुआ। छह दिनों तक चले इस आवासीय वर्ग में संस्कृत संभाषण, योगाभ्यास, प्रातःस्मरण, विभक्ति-अभ्यास, भाषा-क्रीड़ा, संस्कृत गीत, श्लोक, चर्चा-सत्र, प्रतिभा प्रदर्शन एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों में संस्कृत के प्रति आत्मीयता और व्यवहारिक दक्षता विकसित की गई।

समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल सलाहकार (उच्च शिक्षा) एवं पूर्व कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी ने कहा कि संस्कृत केवल अतीत की भाषा नहीं, बल्कि भविष्य की सुधारक भाषा है। भारत की वास्तविक शक्ति उसकी संस्कृति और संस्कृत भाषा में निहित है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे पढ़ने की आदत विकसित करें, क्योंकि अध्ययन ही ज्ञान और व्यक्तित्व विकास का आधार है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से दूरी बनाकर खेलकूद एवं रचनात्मक गतिविधियों को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। संस्कृत और भारतीय संस्कृति के निकट रहने से व्यक्ति में स्वतः ही अच्छे नागरिक के गुण विकसित होते हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत का अध्ययन आज के समय का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है, क्योंकि यही भारत की शक्ति, पहचान और सांस्कृतिक आत्मा है।

प्रो. सोडाणी ने संस्कृत को विश्व की प्राचीनतम एवं वैज्ञानिक भाषा बताते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन, साहित्य, गणित, आयुर्वेद और विज्ञान का विशाल भंडार संस्कृत में सुरक्षित है। संस्कृत भारती द्वारा जनसामान्य को संस्कृत संभाषण से जोड़ने का अभियान भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रभावी माध्यम बन रहा है। उन्होंने वर्ग की अनुशासित व्यवस्था, शिक्षण पद्धति एवं संस्कृतमय वातावरण की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी पहल बताया।

मुख्य वक्ता परमानंद शर्मा ने कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का सार्वभौमिक भाव संस्कृत भाषा और भारतीय चिंतन की ही देन है। संस्कृत केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि विश्व बंधुत्व और मानवता की भाषा है। उन्होंने बताया कि संस्कृत भारती के प्रयासों से आज देशभर में छह हजार से अधिक संस्कृत परिवार सक्रिय रूप से संस्कृत का व्यवहार कर रहे हैं तथा एक करोड़ से अधिक लोग संस्कृत संभाषण करने लगे हैं। यह संस्कृत के पुनर्जागरण का जीवंत प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि संस्कृत को केवल पूजा-पाठ तक सीमित समझना एक बड़ी भ्रांति है। संस्कृत भारती के संभाषण वर्गों ने सिद्ध कर दिया है कि संस्कृत सहज, सरल और व्यवहार की भाषा बन सकती है। उन्होंने प्रतिभागियों का आह्वान किया कि वे संस्कृत को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं तथा परिवार एवं समाज में संस्कृत संभाषण का वातावरण निर्मित करें।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति प्रो. (मानद) कर्नल शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि संस्कृत ज्ञान का अथाह खजाना है। भारतीय दर्शन, साहित्य, विज्ञान, चिकित्सा, गणित और संस्कृति का विशाल वैभव संस्कृत में सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारतोपीय भाषा परिवार की जननी है और अनेक आधुनिक भाषाओं की आधारशिला भी है।

उन्होंने कहा कि आज विश्व की प्रतिष्ठित संस्थाएं भी संस्कृत के महत्व को स्वीकार कर रही हैं। नासा जैसे संस्थान भी संस्कृत को भावी ज्ञान पद्धति के लिए महत्वपूर्ण भाषा मानने लगे हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी आधारभूत एवं समृद्ध भाषा होने के बावजूद संस्कृत बोलने वालों का अनुपात अभी भी अपेक्षाकृत कम है, जिसे बढ़ाना समय की आवश्यकता है। यदि संस्कृत का व्यवहार बढ़ेगा तो भारत की उन्नति भी कई गुना बढ़ेगी।

प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि नेपाल सहित कई देशों में आज भी संस्कृत की सशक्त उपस्थिति है। जो समाज और राष्ट्र अपनी जड़ों से दूर हो जाते हैं, वे अंततः खोखले हो जाते हैं। संस्कृत भारत की जड़ है और इससे जुड़े रहना राष्ट्र की निरंतर उन्नति के लिए आवश्यक है। उन्होंने संस्कृत भारती के इस प्रयास को राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान बताया।

समारोह से पूर्व अतिथियों ने वर्ग का अवलोकन कर विभिन्न सत्रों, संस्कृत संभाषण अभ्यास, योग, भाषा-क्रीड़ा, प्रतिभा प्रदर्शन तथा शिक्षण पद्धति का निरीक्षण किया। अतिथियों ने वर्ग की व्यवस्थाओं, अनुशासन एवं संस्कृतमय वातावरण की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।

इस अवसर पर अंतिम दिन वर्ग अवलोकन के लिए आपदा राहत विभाग के भाजपा प्रदेश संयोजक एवं राजस्थान गौरव सम्मान प्राप्त डॉ. जिनेन्द्र शास्त्री, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती अलका मूंदड़ा, प्रतापनगर थानाधिकारी पूरणसिंह राजपुरोहित, आलोक विद्यालय हिरणमगरी सेक्टर-11 के प्राचार्य शशांक टांक, गहरीलाल पाटीदार, संस्कृत शिक्षा विभाग राजस्थान सरकार के विशेष अधिकारी अभयसिंह राठौड़ तथा कनक डायनिंग हॉल के रमेश श्रीमाली सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने संस्कृत भारती के इस अभिनव प्रयास की सराहना करते हुए इसे समाजोपयोगी और प्रेरणादायी पहल बताया।

वर्गार्थियों महिमा शर्मा एवं झरनेश पालीवाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि मात्र छह दिनों के अल्पकाल में ही वे संस्कृत बोलने, समझने और व्यवहार में प्रयोग करने में सक्षम हुए हैं। अनुभव कथन एवं प्रतिभा प्रदर्शन ने उपस्थित जनसमूह को विशेष रूप से प्रभावित किया।

समारोप कार्यक्रम का शुभारंभ विशाल द्वारा प्रस्तुत वैदिक मंगलाचरण से हुआ। दिव्यांशु ने ध्येय मंत्र एवं सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। प्रांत संपर्क प्रमुख डॉ. यज्ञ आमेटा ने अतिथियों का परिचय एवं स्वागत कराया। लारा उपाध्याय ने सामूहिक गीत प्रस्तुत किया। वर्ग संयोजक संजय शांडिल्य ने वर्ग प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। दिव्यांशु जोशी एवं ध्रुव पालीवाल ने अनुभव कथन प्रस्तुत किए, जबकि मुकेश कुमावत ने व्यक्तिगत गीत की प्रस्तुति दी।

दुष्यंत नागदा ने अतिथियों, विद्याभारती संस्था के पदाधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों, शिक्षकों, प्रबंधकों एवं सहयोगकर्ताओं के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का समापन गौरव साहू द्वारा कल्याण मंत्र एवं वैदिक मंगलकामनाओं के साथ हुआ। इस अवसर पर सम्पूर्ण परिसर संस्कृत वंदना, गीतों एवं जयघोषों से गुंजायमान रहा।

वर्ग में मुख्य शिक्षक के रूप में श्रीयांश कंसारा तथा सह-शिक्षक के रूप में गौरव साहू, दिव्यांशु, मेहरान, विशाल शर्मा, लक्ष्मण, आंचल चौधरी, लारा उपाध्याय, ईशा पालीवाल एवं दिव्यांशी पालीवाल ने दायित्व निभाया। वर्ग संचालन एवं व्यवस्थाओं में डॉ. यज्ञ आमेटा, दुष्यंत नागदा, नरेंद्र शर्मा, चैन शंकर दशोरा, डॉ. रेनू पालीवाल, कुलदीप जोशी, मीनाक्षी द्विवेदी, केशव नागदा, पहल सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय योगदान दिया।

समापन अवसर पर विभाग संयोजक एवं कार्यकर्ताओं ने बताया कि संस्कृत भारती का उद्देश्य संस्कृत को जन-जन की भाषा बनाना तथा भारतीय संस्कृति एवं जीवन मूल्यों को समाज में पुनः प्रतिष्ठित करना है। वर्ग के माध्यम से संस्कृत संभाषण के साथ-साथ व्यक्तित्व निर्माण, राष्ट्रभावना, संस्कार एवं सामाजिक समरसता के मूल्यों का भी विकास किया जाता है। उपस्थित जनों ने ऐसे वर्गों के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर बल देते हुए संस्कृत भारती के प्रयासों की सराहना की।

संस्कृत भविष्य की सुधारक, भारत की शक्ति और विश्व बंधुत्व का आधार : सोडाणी वसुधैव कुटुम्बकम् का भाव केवल संस्कृत से संभव : परमानंद शर्मा संस्कृत भारत की जड़ है, इससे जुड़कर ही होगी उन्नति : प्रो. सारंगदेवोत @followers @top fans News 24 Udaipur #udaipur #viralreelschallenge #vlog #viralpost #nonfollowers #BhartiyaSanskruti #HinduSanskruti #hindu #sanatandharma उदयपुर, 7 जून। संस्कृत भारत की सांस्कृतिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक शक्ति का मूल स्रोत है। संस्कृत न केवल विश्व की प्राचीनतम एवं वैज्ञानिक भाषा है, बल्कि भविष्य की सुधारक भाषा भी है। संस्कृत से ही अच्छे नागरिकों का निर्माण, सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण और राष्ट्र की उन्नति संभव है। यह विचार संस्कृत भारती उदयपुर विभाग द्वारा आयोजित छह दिवसीय आवासीय संस्कृत भाषा बोधन वर्ग के समारोप समारोह में मुख्य अतिथि राज्यपाल सलाहकार (उच्च शिक्षा) एवं पूर्व कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी ने व्यक्त किये। संस्कृत भारती उदयपुर विभाग द्वारा आयोजित छह दिवसीय आवासीय संस्कृत भाषा बोधन वर्ग का समारोप समारोह रविवार को उत्साह, गरिमा एवं संस्कृतमय वातावरण में सम्पन्न हुआ। छह दिनों तक चले इस आवासीय वर्ग में संस्कृत संभाषण, योगाभ्यास, प्रातःस्मरण, विभक्ति-अभ्यास, भाषा-क्रीड़ा, संस्कृत गीत, श्लोक, चर्चा-सत्र, प्रतिभा प्रदर्शन एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों में संस्कृत के प्रति आत्मीयता और व्यवहारिक दक्षता विकसित की गई। समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल सलाहकार (उच्च शिक्षा) एवं पूर्व कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी ने कहा कि संस्कृत केवल अतीत की भाषा नहीं, बल्कि भविष्य की सुधारक भाषा है। भारत की वास्तविक शक्ति उसकी संस्कृति और संस्कृत भाषा में निहित है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे पढ़ने की आदत विकसित करें, क्योंकि अध्ययन ही ज्ञान और व्यक्तित्व विकास का आधार है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से दूरी बनाकर खेलकूद एवं रचनात्मक गतिविधियों को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। संस्कृत और भारतीय संस्कृति के निकट रहने से व्यक्ति में स्वतः ही अच्छे नागरिक के गुण विकसित होते हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत का अध्ययन आज के समय का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है, क्योंकि यही भारत की शक्ति, पहचान और सांस्कृतिक आत्मा है। प्रो. सोडाणी ने संस्कृत को विश्व की प्राचीनतम एवं वैज्ञानिक भाषा बताते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन, साहित्य, गणित, आयुर्वेद और विज्ञान का विशाल भंडार संस्कृत में सुरक्षित है। संस्कृत भारती द्वारा जनसामान्य को संस्कृत संभाषण से जोड़ने का अभियान भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रभावी माध्यम बन रहा है। उन्होंने वर्ग की अनुशासित व्यवस्था, शिक्षण पद्धति एवं संस्कृतमय वातावरण की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी पहल बताया। मुख्य वक्ता परमानंद शर्मा ने कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का सार्वभौमिक भाव संस्कृत भाषा और भारतीय चिंतन की ही देन है। संस्कृत केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि विश्व बंधुत्व और मानवता की भाषा है। उन्होंने बताया कि संस्कृत भारती के प्रयासों से आज देशभर में छह हजार से अधिक संस्कृत परिवार सक्रिय रूप से संस्कृत का व्यवहार कर रहे हैं तथा एक करोड़ से अधिक लोग संस्कृत संभाषण करने लगे हैं। यह संस्कृत के पुनर्जागरण का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने कहा कि संस्कृत को केवल पूजा-पाठ तक सीमित समझना एक बड़ी भ्रांति है। संस्कृत भारती के संभाषण वर्गों ने सिद्ध कर दिया है कि संस्कृत सहज, सरल और व्यवहार की भाषा बन सकती है। उन्होंने प्रतिभागियों का आह्वान किया कि वे संस्कृत को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं तथा परिवार एवं समाज में संस्कृत संभाषण का वातावरण निर्मित करें। समारोह की अध्यक्षता करते हुए जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति प्रो. (मानद) कर्नल शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि संस्कृत ज्ञान का अथाह खजाना है। भारतीय दर्शन, साहित्य, विज्ञान, चिकित्सा, गणित और संस्कृति का विशाल वैभव संस्कृत में सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारतोपीय भाषा परिवार की जननी है और अनेक आधुनिक भाषाओं की आधारशिला भी है। उन्होंने कहा कि आज विश्व की प्रतिष्ठित संस्थाएं भी संस्कृत के महत्व को स्वीकार कर रही हैं। नासा जैसे संस्थान भी संस्कृत को भावी ज्ञान पद्धति के लिए महत्वपूर्ण भाषा मानने लगे हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी आधारभूत एवं समृद्ध भाषा होने के बावजूद संस्कृत बोलने वालों का अनुपात अभी भी अपेक्षाकृत कम है, जिसे बढ़ाना समय की आवश्यकता है। यदि संस्कृत का व्यवहार बढ़ेगा तो भारत की उन्नति भी कई गुना बढ़ेगी। प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि नेपाल सहित कई देशों में आज भी संस्कृत की सशक्त उपस्थिति है। जो समाज और राष्ट्र अपनी जड़ों से दूर हो जाते हैं, वे अंततः खोखले हो जाते हैं। संस्कृत भारत की जड़ है और इससे जुड़े रहना राष्ट्र की निरंतर उन्नति के लिए आवश्यक है। उन्होंने संस्कृत भारती के इस प्रयास को राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान बताया। समारोह से पूर्व अतिथियों ने वर्ग का अवलोकन कर विभिन्न सत्रों, संस्कृत संभाषण अभ्यास, योग, भाषा-क्रीड़ा, प्रतिभा प्रदर्शन तथा शिक्षण पद्धति का निरीक्षण किया। अतिथियों ने वर्ग की व्यवस्थाओं, अनुशासन एवं संस्कृतमय वातावरण की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। इस अवसर पर अंतिम दिन वर्ग अवलोकन के लिए आपदा राहत विभाग के भाजपा प्रदेश संयोजक एवं राजस्थान गौरव सम्मान प्राप्त डॉ. जिनेन्द्र शास्त्री, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती अलका मूंदड़ा, प्रतापनगर थानाधिकारी पूरणसिंह राजपुरोहित, आलोक विद्यालय हिरणमगरी सेक्टर-11 के प्राचार्य शशांक टांक, गहरीलाल पाटीदार, संस्कृत शिक्षा विभाग राजस्थान सरकार के विशेष अधिकारी अभयसिंह राठौड़ तथा कनक डायनिंग हॉल के रमेश श्रीमाली सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने संस्कृत भारती के इस अभिनव प्रयास की सराहना करते हुए इसे समाजोपयोगी और प्रेरणादायी पहल बताया। वर्गार्थियों महिमा शर्मा एवं झरनेश पालीवाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि मात्र छह दिनों के अल्पकाल में ही वे संस्कृत बोलने, समझने और व्यवहार में प्रयोग करने में सक्षम हुए हैं। अनुभव कथन एवं प्रतिभा प्रदर्शन ने उपस्थित जनसमूह को विशेष रूप से प्रभावित किया। समारोप कार्यक्रम का शुभारंभ विशाल द्वारा प्रस्तुत वैदिक मंगलाचरण से हुआ। दिव्यांशु ने ध्येय मंत्र एवं सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। प्रांत संपर्क प्रमुख डॉ. यज्ञ आमेटा ने अतिथियों का परिचय एवं स्वागत कराया। लारा उपाध्याय ने सामूहिक गीत प्रस्तुत किया। वर्ग संयोजक संजय शांडिल्य ने वर्ग प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। दिव्यांशु जोशी एवं ध्रुव पालीवाल ने अनुभव कथन प्रस्तुत किए, जबकि मुकेश कुमावत ने व्यक्तिगत गीत की प्रस्तुति दी। दुष्यंत नागदा ने अतिथियों, विद्याभारती संस्था के पदाधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों, शिक्षकों, प्रबंधकों एवं सहयोगकर्ताओं के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का समापन गौरव साहू द्वारा कल्याण मंत्र एवं वैदिक मंगलकामनाओं के साथ हुआ। इस अवसर पर सम्पूर्ण परिसर संस्कृत वंदना, गीतों एवं जयघोषों से गुंजायमान रहा। वर्ग में मुख्य शिक्षक के रूप में श्रीयांश कंसारा तथा सह-शिक्षक के रूप में गौरव साहू, दिव्यांशु, मेहरान, विशाल शर्मा, लक्ष्मण, आंचल चौधरी, लारा उपाध्याय, ईशा पालीवाल एवं दिव्यांशी पालीवाल ने दायित्व निभाया। वर्ग संचालन एवं व्यवस्थाओं में डॉ. यज्ञ आमेटा, दुष्यंत नागदा, नरेंद्र शर्मा, चैन शंकर दशोरा, डॉ. रेनू पालीवाल, कुलदीप जोशी, मीनाक्षी द्विवेदी, केशव नागदा, पहल सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय योगदान दिया। समापन अवसर पर विभाग संयोजक एवं कार्यकर्ताओं ने बताया कि संस्कृत भारती का उद्देश्य संस्कृत को जन-जन की भाषा बनाना तथा भारतीय संस्कृति एवं जीवन मूल्यों को समाज में पुनः प्रतिष्ठित करना है। वर्ग के माध्यम से संस्कृत संभाषण के साथ-साथ व्यक्तित्व निर्माण, राष्ट्रभावना, संस्कार एवं सामाजिक समरसता के मूल्यों का भी विकास किया जाता है। उपस्थित जनों ने ऐसे वर्गों के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर बल देते हुए संस्कृत भारती के प्रयासों की सराहना की।

Girwa, Udaipur | Jun 7, 2026

नारायण सेवा संस्थान ने 46वें सामूहिक विवाह समारोह में 21 दिव्यांग जोड़ों के सपनों को दिया नया आसमान

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जब जीवन की राहों में गरीबी, दिव्यांगता और सामाजिक चुनौतियां दीवार बनकर खड़ी हो जाएं, तब किसी का हाथ थामकर सपनों को सच करना किसी वरदान से कम नहीं होता। ऐसे ही 21 दिव्यांग एवं निर्धन जोड़ों के जीवन में खुशियों की नई सुबह लेकर आया नारायण सेवा संस्थान का 46वां नि:शुल्क सामूहिक विवाह समारोह, जहां सात फेरों के साथ केवल दो दिल ही नहीं मिले, बल्कि वर्षों के संघर्ष, इंतजार और अधूरे सपनों को भी मंजिल मिली।

नई दिल्ली में आयोजित इस भावनात्मक समारोह में राजस्थान, झारखंड, बिहार, गुजरात और उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए 21 जोड़ों ने वैदिक मंत्रों और अग्नि को साक्षी मानकर जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया। विवाह मंडप में कहीं माता-पिता की नम आंखें थीं तो कहीं नवदंपतियों के चेहरों पर नए जीवन की चमक। हर फेरे के साथ मानो संघर्षों के बादलों को चीरकर उम्मीद का सूरज निकल रहा था।

दो दिवसीय आयोजन की शुरुआत गणपति स्थापना, हल्दी और मेहंदी जैसी पारंपरिक रस्मों से हुई। महिलाओं के मंगल गीत, घूमर और लोकनृत्यों ने वातावरण को उत्सव, संस्कृति और भावनाओं से सराबोर कर दिया। उपस्थित अतिथियों और स्वयंसेवकों ने नवदंपतियों को आशीर्वाद देकर उनके सुखद एवं सम्मानपूर्ण जीवन की कामना की।

समारोह के दौरान संस्था के प्रेसिडेंट प्रशांत अग्रवाल, डायरेक्टर वंदना अग्रवाल तथा ट्रस्टी देवेंद्र चौबीसा ने सहयोगी दानदाताओं एवं अतिथियों का पारंपरिक सम्मान किया।

नवविवाहित जोड़ों को गृहस्थ जीवन की मजबूत शुरुआत देने के लिए संस्थान ने पलंग, अलमारी, गैस चूल्हा, पंखे, मिक्सर तथा 100 से अधिक प्रकार के घरेलू उपयोग के बर्तन भेंट किए। दिल्ली के अनेक दानदाताओं ने भी आगे बढ़कर उपहार देकर नवदंपतियों की खुशियों में भागीदारी निभाई।

प्रेसिडेंट प्रशांत अग्रवाल ने कहा, "सामूहिक विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं है, बल्कि यह सम्मान, समानता और सामाजिक समरसता का उत्सव है। हमारा प्रयास है कि कोई भी दिव्यांग या आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति केवल संसाधनों के अभाव में अपने जीवन के इस महत्वपूर्ण संस्कार से वंचित न रहे।"

प्यार, संघर्ष और उम्मीद की कहानी

इस समारोह में झारखंड के शिबू कुमार और गीता कुमारी की कहानी हर किसी की आंखें नम कर गई। पिछले दो वर्षों से एक-दूसरे का साथ निभा रहे इस जोड़े के सामने आर्थिक तंगी और सामाजिक चुनौतियां बड़ी बाधा बनी हुई थीं। शिबू के दोनों पैरों में विकृति है, जबकि गीता अपने दाहिने पैर से दिव्यांग हैं।

जब उम्मीद की किरण धुंधली पड़ने लगी, तब उन्होंने नारायण सेवा संस्थान का दरवाजा खटखटाया। संस्था ने गीता के उपचार में सहयोग किया और शिबू को आधुनिक कैलीपर्स उपलब्ध कराए, जिससे उनकी चलने-फिरने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ। अंततः दोनों का विवाह उसी संस्थान के मंच पर संपन्न हुआ जिसने उनके जीवन में नई आशा जगाई।

आंसुओं से भरी आंखों के साथ गीता ने कहा, "नारायण सेवा संस्थान हमारे लिए भगवान के समान है। आज संस्था की वजह से मुझे मेरा प्यार और अपना घर बसाने का अवसर मिला है।"

एक और सपना हुआ साकार :
राजस्थान के बांसवाड़ा निवासी मुकेश और दुर्गा की कहानी भी संघर्ष और विश्वास की मिसाल है। मुकेश के पिता का निधन हो चुका है और उनकी मां मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करती हैं। वहीं दुर्गा के पिता मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। वर्ष 2009 में नारायण सेवा संस्थान द्वारा किए गए सफल ऑपरेशन के बाद दुर्गा आज एक निजी विद्यालय में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं।

आर्थिक और पारिवारिक कठिनाइयों के बीच विवाह का सपना दूर होता जा रहा था, लेकिन संस्थान ने उनके जीवन में भी खुशियों का दीप जलाया। विवाह के बाद भावुक दुर्गा ने कहा, "2009 में संस्थान ने मुझे चलने का आत्मविश्वास दिया था और आज जीवनसाथी का साथ भी। मेरे लिए यह केवल विवाह नहीं, बल्कि जीवन का नया जन्म है।"

चार दशक से अधिक समय से सेवा, संवेदना और समर्पण के मार्ग पर अग्रसर नारायण सेवा संस्थान अब तक 2,582 दिव्यांग एवं निर्धन जोड़ों का विवाह संपन्न करा चुका है। यह केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के जीवन में रोशनी, सम्मान और आत्मविश्वास की नई कहानी है।

संस्थान के संस्थापक कैलाश मानव अग्रवाल को वर्ष 2008 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था, जबकि संस्था के प्रेसिडेंट प्रशांत अग्रवाल को वर्ष 2023 में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। संस्था अब तक 39,388 से अधिक लोगों को नि:शुल्क कृत्रिम अंग उपलब्ध करा चुकी है तथा 4.52 लाख से अधिक मरीजों का नि:शुल्क उपचार कर चुकी है।

यह समारोह केवल विवाह का आयोजन नहीं था, बल्कि इस बात का जीवंत प्रमाण था कि जब समाज संवेदनशील बनता है, तो दिव्यांगता और गरीबी जैसी बाधाएं भी सपनों का रास्ता नहीं रोक पातीं।

नारायण सेवा संस्थान ने 46वें सामूहिक विवाह समारोह में 21 दिव्यांग जोड़ों के सपनों को दिया नया आसमान @followers @top fans News 24 Udaipur Narayan Seva Sansthan #VivahSamaroh #vlog #viralpost #viralreelschallenge #nonfollowers जब जीवन की राहों में गरीबी, दिव्यांगता और सामाजिक चुनौतियां दीवार बनकर खड़ी हो जाएं, तब किसी का हाथ थामकर सपनों को सच करना किसी वरदान से कम नहीं होता। ऐसे ही 21 दिव्यांग एवं निर्धन जोड़ों के जीवन में खुशियों की नई सुबह लेकर आया नारायण सेवा संस्थान का 46वां नि:शुल्क सामूहिक विवाह समारोह, जहां सात फेरों के साथ केवल दो दिल ही नहीं मिले, बल्कि वर्षों के संघर्ष, इंतजार और अधूरे सपनों को भी मंजिल मिली। नई दिल्ली में आयोजित इस भावनात्मक समारोह में राजस्थान, झारखंड, बिहार, गुजरात और उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए 21 जोड़ों ने वैदिक मंत्रों और अग्नि को साक्षी मानकर जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया। विवाह मंडप में कहीं माता-पिता की नम आंखें थीं तो कहीं नवदंपतियों के चेहरों पर नए जीवन की चमक। हर फेरे के साथ मानो संघर्षों के बादलों को चीरकर उम्मीद का सूरज निकल रहा था। दो दिवसीय आयोजन की शुरुआत गणपति स्थापना, हल्दी और मेहंदी जैसी पारंपरिक रस्मों से हुई। महिलाओं के मंगल गीत, घूमर और लोकनृत्यों ने वातावरण को उत्सव, संस्कृति और भावनाओं से सराबोर कर दिया। उपस्थित अतिथियों और स्वयंसेवकों ने नवदंपतियों को आशीर्वाद देकर उनके सुखद एवं सम्मानपूर्ण जीवन की कामना की। समारोह के दौरान संस्था के प्रेसिडेंट प्रशांत अग्रवाल, डायरेक्टर वंदना अग्रवाल तथा ट्रस्टी देवेंद्र चौबीसा ने सहयोगी दानदाताओं एवं अतिथियों का पारंपरिक सम्मान किया। नवविवाहित जोड़ों को गृहस्थ जीवन की मजबूत शुरुआत देने के लिए संस्थान ने पलंग, अलमारी, गैस चूल्हा, पंखे, मिक्सर तथा 100 से अधिक प्रकार के घरेलू उपयोग के बर्तन भेंट किए। दिल्ली के अनेक दानदाताओं ने भी आगे बढ़कर उपहार देकर नवदंपतियों की खुशियों में भागीदारी निभाई। प्रेसिडेंट प्रशांत अग्रवाल ने कहा, "सामूहिक विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं है, बल्कि यह सम्मान, समानता और सामाजिक समरसता का उत्सव है। हमारा प्रयास है कि कोई भी दिव्यांग या आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति केवल संसाधनों के अभाव में अपने जीवन के इस महत्वपूर्ण संस्कार से वंचित न रहे।" प्यार, संघर्ष और उम्मीद की कहानी इस समारोह में झारखंड के शिबू कुमार और गीता कुमारी की कहानी हर किसी की आंखें नम कर गई। पिछले दो वर्षों से एक-दूसरे का साथ निभा रहे इस जोड़े के सामने आर्थिक तंगी और सामाजिक चुनौतियां बड़ी बाधा बनी हुई थीं। शिबू के दोनों पैरों में विकृति है, जबकि गीता अपने दाहिने पैर से दिव्यांग हैं। जब उम्मीद की किरण धुंधली पड़ने लगी, तब उन्होंने नारायण सेवा संस्थान का दरवाजा खटखटाया। संस्था ने गीता के उपचार में सहयोग किया और शिबू को आधुनिक कैलीपर्स उपलब्ध कराए, जिससे उनकी चलने-फिरने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ। अंततः दोनों का विवाह उसी संस्थान के मंच पर संपन्न हुआ जिसने उनके जीवन में नई आशा जगाई। आंसुओं से भरी आंखों के साथ गीता ने कहा, "नारायण सेवा संस्थान हमारे लिए भगवान के समान है। आज संस्था की वजह से मुझे मेरा प्यार और अपना घर बसाने का अवसर मिला है।" एक और सपना हुआ साकार : राजस्थान के बांसवाड़ा निवासी मुकेश और दुर्गा की कहानी भी संघर्ष और विश्वास की मिसाल है। मुकेश के पिता का निधन हो चुका है और उनकी मां मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करती हैं। वहीं दुर्गा के पिता मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। वर्ष 2009 में नारायण सेवा संस्थान द्वारा किए गए सफल ऑपरेशन के बाद दुर्गा आज एक निजी विद्यालय में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं। आर्थिक और पारिवारिक कठिनाइयों के बीच विवाह का सपना दूर होता जा रहा था, लेकिन संस्थान ने उनके जीवन में भी खुशियों का दीप जलाया। विवाह के बाद भावुक दुर्गा ने कहा, "2009 में संस्थान ने मुझे चलने का आत्मविश्वास दिया था और आज जीवनसाथी का साथ भी। मेरे लिए यह केवल विवाह नहीं, बल्कि जीवन का नया जन्म है।" चार दशक से अधिक समय से सेवा, संवेदना और समर्पण के मार्ग पर अग्रसर नारायण सेवा संस्थान अब तक 2,582 दिव्यांग एवं निर्धन जोड़ों का विवाह संपन्न करा चुका है। यह केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के जीवन में रोशनी, सम्मान और आत्मविश्वास की नई कहानी है। संस्थान के संस्थापक कैलाश मानव अग्रवाल को वर्ष 2008 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था, जबकि संस्था के प्रेसिडेंट प्रशांत अग्रवाल को वर्ष 2023 में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। संस्था अब तक 39,388 से अधिक लोगों को नि:शुल्क कृत्रिम अंग उपलब्ध करा चुकी है तथा 4.52 लाख से अधिक मरीजों का नि:शुल्क उपचार कर चुकी है। यह समारोह केवल विवाह का आयोजन नहीं था, बल्कि इस बात का जीवंत प्रमाण था कि जब समाज संवेदनशील बनता है, तो दिव्यांगता और गरीबी जैसी बाधाएं भी सपनों का रास्ता नहीं रोक पातीं।

Girwa, Udaipur | Jun 7, 2026