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‘#भविष्यवक्ता_कांग्रेस, ‘#अंतर्यामीएसीबी और ‘#अंधेरी_नगरी’ के #बेफिक्र_राजा किरोड़ी बाबा!** जयपुर/राजस्थान :- #लालबहादुर_भाखर:- राजस्थान की राजनीति में इन दिनों भविष्यवाणियां नक्षत्र देखकर नहीं, बल्कि टीवी स्टूडियो में बैठकर की जा रही हैं। मामला ही कुछ ऐसा है कि अच्छे-अच्छे राजनीतिक पंडित भी अपना सिर खुजलाने पर मजबूर हैं। 27 मई को जब पूरा देश भीषण गर्मी से तप रहा था, तब NDTV Rajasthan के लाइव स्टूडियो में कांग्रेस के प्रवक्ता भीमराज जाखड़ एक अलग ही 'तापमान' बढ़ा रहे थे। उन्होंने सरेआम, डंके की चोट पर एक नाम लिया— **जुगल किशोर बिश्नोई**। आरोप? खाद-बीज की दुकानों और फैक्ट्रियों पर कृषि मंत्री जी के छापों के बाद होने वाला 'कथित सेटलमेंट'। अब इसे कांग्रेस की 'दिव्य दृष्टि' कहें या मंत्री जी का 'परम भोलापन', लेकिन ठीक 12 दिन बाद यानी 7 जून को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम बिल्कुल उसी नाम पर टूट पड़ती है और एक भारी-भरकम राशि के साथ 'कार्रवाई' का सूपड़ा साफ करती है। ### क्रोनोलॉजी समझिए: जब टीवी डिबेट बनी 'असाइनमेंट शीट' राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि दीवारों के भी कान होते हैं, लेकिन यहाँ तो टेलीविजन का पर्दा चीख-चीख कर कह रहा था। आइए इस अद्भुत टाइमलाइन पर एक नज़र डालते हैं: | तारीख | घटनाक्रम | मुख्य किरदार | | :--- | :--- | :--- | | **27 मई** | लाइव टीवी डिबेट में नाम का खुलासा, सबूतों का ज़िक्र | कांग्रेस प्रवक्ता भीमराज जाखड़ | | **बीच के 12 दिन** | गहरी नींद, महा-विश्राम और 'सब चंगा सी' का भाव | कृषि मंत्रालय एवं थिंक टैंक | | **7 जून** | एसीबी की धमाकेदार एंट्री, भारी रकम बरामद | जुगल किशोर बिश्नोई (आरोपी) | ### "तिल बराबर भी भूमिका हुई तो इस्तीफा दे दूंगा..." मामला गरमाते ही हमारे 'डेयरिंग' कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा साहब ने अपनी चिर-परिचित आक्रामक शैली में सफाई पेश कर दी है। उन्होंने साफ कहा कि— *"अगर इस पूरे झमेले में मेरी तिल मात्र भी भूमिका निकली, तो मैं सीधे जेल जाने और इस्तीफा देने को तैयार हूँ।"* बाबा की इस ईमानदारी पर किसी को शक नहीं है, लेकिन सवाल तो यह उठता है बाबा कि: "अगर आपके आसपास के लोग आपके ही विभाग में 'धोती में से घी' निकाल रहे थे, और टीवी पर नाम आने के बाद भी आपको भनक नहीं लगी... तो आपका वो विश्वप्रसिद्ध 'खुफिया तंत्र' उस वक्त कौन सा रील्स देख रहा था?" ### डेयरिंग या डफर? राजनीति का 'ब्लाइंड स्पॉट' किरोड़ी लाल मीणा राजस्थान की राजनीति के वो कद्दावर नेता हैं जो पत्ता हिलने पर भी हवा का रुख भांप लेते हैं। उनके संबंध बीजेपी से लेकर कांग्रेस तक इतने मधुर हैं कि विपक्ष भी अब इस मुद्दे पर 'मौन व्रत' धारण कर चुका है। राजनीति में ये गुप्त समझौते बड़े कमाल के होते हैं—बयान देखकर ही समझ आ जाता है कि पर्दे के पीछे 'फेविकोल का मजबूत जोड़' लग चुका है। लेकिन असली पेच तो जनता के दिमाग में फंसा है: * **विकल्प A (एक्स्ट्रा डेयरिंग):** आपको सब पता था, लेकिन आपको लगा कि "अरे, अपना क्या बिगाड़ लेगा कोई!" * **विकल्प B (परम अज्ञान):** टीवी पर आपके विभाग के भ्रष्टाचार की स्क्रिप्ट पढ़ी जा रही थी और आप आंखें मूंदकर 'अरण्य रोदन' में व्यस्त थे। गलत लोगों को बगल में बिठाने का किराया बहुत भारी होता है मंत्री जी! जब पूरा राजस्थान जान चुका था कि दाल में कुछ काला है, तब आपका आंखें बंद रखना यह साबित करता है कि या तो सिस्टम आपसे ऊपर चल रहा है, या फिर आप सिस्टम को 'ओवरकॉन्फिडेंस' की घुट्टी पिला चुके थे। खैर, एसीबी की कार्रवाई की गूंज बहुत तेज है, और अब जनता इस लाइव डिबेट के 'प्रीक्वेल' और 'सीक्वल' को देखकर मुस्कुरा रही है। देखना दिलचस्प होगा कि इस 'पिक्चर' का क्लाइमेक्स क्या होता है! Part 7

Pilibanga, Hanumangarh | Jun 10, 2026

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‘#भविष्यवक्ता_कांग्रेस, ‘#अंतर्यामीएसीबी और ‘#अंधेरी_नगरी’ के #बेफिक्र_राजा किरोड़ी बाबा!**
जयपुर/राजस्थान :- #लालबहादुर_भाखर:- राजस्थान की राजनीति में इन दिनों भविष्यवाणियां नक्षत्र देखकर नहीं, बल्कि टीवी स्टूडियो में बैठकर की जा रही हैं। मामला ही कुछ ऐसा है कि अच्छे-अच्छे राजनीतिक पंडित भी अपना सिर खुजलाने पर मजबूर हैं। 27 मई को जब पूरा देश भीषण गर्मी से तप रहा था, तब NDTV Rajasthan के लाइव स्टूडियो में कांग्रेस के प्रवक्ता भीमराज जाखड़ एक अलग ही 'तापमान' बढ़ा रहे थे। उन्होंने सरेआम, डंके की चोट पर एक नाम लिया— **जुगल किशोर बिश्नोई**। आरोप? खाद-बीज की दुकानों और फैक्ट्रियों पर कृषि मंत्री जी के छापों के बाद होने वाला 'कथित सेटलमेंट'।
अब इसे कांग्रेस की 'दिव्य दृष्टि' कहें या मंत्री जी का 'परम भोलापन', लेकिन ठीक 12 दिन बाद यानी 7 जून को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम बिल्कुल उसी नाम पर टूट पड़ती है और एक भारी-भरकम राशि के साथ 'कार्रवाई' का सूपड़ा साफ करती है।
### क्रोनोलॉजी समझिए: जब टीवी डिबेट बनी 'असाइनमेंट शीट'
राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि दीवारों के भी कान होते हैं, लेकिन यहाँ तो टेलीविजन का पर्दा चीख-चीख कर कह रहा था। आइए इस अद्भुत टाइमलाइन पर एक नज़र डालते हैं:

| तारीख | घटनाक्रम | मुख्य किरदार |
| :--- | :--- | :--- |
| **27 मई** | लाइव टीवी डिबेट में नाम का खुलासा, सबूतों का ज़िक्र | कांग्रेस प्रवक्ता भीमराज जाखड़ |
| **बीच के 12 दिन** | गहरी नींद, महा-विश्राम और 'सब चंगा सी' का भाव | कृषि मंत्रालय एवं थिंक टैंक |
| **7 जून** | एसीबी की धमाकेदार एंट्री, भारी रकम बरामद | जुगल किशोर बिश्नोई (आरोपी) |

### "तिल बराबर भी भूमिका हुई तो इस्तीफा दे दूंगा..."
मामला गरमाते ही हमारे 'डेयरिंग' कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा साहब ने अपनी चिर-परिचित आक्रामक शैली में सफाई पेश कर दी है। उन्होंने साफ कहा कि— *"अगर इस पूरे झमेले में मेरी तिल मात्र भी भूमिका निकली, तो मैं सीधे जेल जाने और इस्तीफा देने को तैयार हूँ।"*
बाबा की इस ईमानदारी पर किसी को शक नहीं है, लेकिन सवाल तो यह उठता है बाबा कि:
> "अगर आपके आसपास के लोग आपके ही विभाग में 'धोती में से घी' निकाल रहे थे, और टीवी पर नाम आने के बाद भी आपको भनक नहीं लगी... तो आपका वो विश्वप्रसिद्ध 'खुफिया तंत्र' उस वक्त कौन सा रील्स देख रहा था?"
> 
### डेयरिंग या डफर? राजनीति का 'ब्लाइंड स्पॉट'
किरोड़ी लाल मीणा राजस्थान की राजनीति के वो कद्दावर नेता हैं जो पत्ता हिलने पर भी हवा का रुख भांप लेते हैं। उनके संबंध बीजेपी से लेकर कांग्रेस तक इतने मधुर हैं कि विपक्ष भी अब इस मुद्दे पर 'मौन व्रत' धारण कर चुका है। राजनीति में ये गुप्त समझौते बड़े कमाल के होते हैं—बयान देखकर ही समझ आ जाता है कि पर्दे के पीछे 'फेविकोल का मजबूत जोड़' लग चुका है।
लेकिन असली पेच तो जनता के दिमाग में फंसा है:
 * **विकल्प A (एक्स्ट्रा डेयरिंग):** आपको सब पता था, लेकिन आपको लगा कि "अरे, अपना क्या बिगाड़ लेगा कोई!"
 * **विकल्प B (परम अज्ञान):** टीवी पर आपके विभाग के भ्रष्टाचार की स्क्रिप्ट पढ़ी जा रही थी और आप आंखें मूंदकर 'अरण्य रोदन' में व्यस्त थे।
गलत लोगों को बगल में बिठाने का किराया बहुत भारी होता है मंत्री जी! जब पूरा राजस्थान जान चुका था कि दाल में कुछ काला है, तब आपका आंखें बंद रखना यह साबित करता है कि या तो सिस्टम आपसे ऊपर चल रहा है, या फिर आप सिस्टम को 'ओवरकॉन्फिडेंस' की घुट्टी पिला चुके थे।
खैर, एसीबी की कार्रवाई की गूंज बहुत तेज है, और अब जनता इस लाइव डिबेट के 'प्रीक्वेल' और 'सीक्वल' को देखकर मुस्कुरा रही है। देखना दिलचस्प होगा कि इस 'पिक्चर' का क्लाइमेक्स क्या होता है! Part 6

‘#भविष्यवक्ता_कांग्रेस, ‘#अंतर्यामीएसीबी और ‘#अंधेरी_नगरी’ के #बेफिक्र_राजा किरोड़ी बाबा!** जयपुर/राजस्थान :- #लालबहादुर_भाखर:- राजस्थान की राजनीति में इन दिनों भविष्यवाणियां नक्षत्र देखकर नहीं, बल्कि टीवी स्टूडियो में बैठकर की जा रही हैं। मामला ही कुछ ऐसा है कि अच्छे-अच्छे राजनीतिक पंडित भी अपना सिर खुजलाने पर मजबूर हैं। 27 मई को जब पूरा देश भीषण गर्मी से तप रहा था, तब NDTV Rajasthan के लाइव स्टूडियो में कांग्रेस के प्रवक्ता भीमराज जाखड़ एक अलग ही 'तापमान' बढ़ा रहे थे। उन्होंने सरेआम, डंके की चोट पर एक नाम लिया— **जुगल किशोर बिश्नोई**। आरोप? खाद-बीज की दुकानों और फैक्ट्रियों पर कृषि मंत्री जी के छापों के बाद होने वाला 'कथित सेटलमेंट'। अब इसे कांग्रेस की 'दिव्य दृष्टि' कहें या मंत्री जी का 'परम भोलापन', लेकिन ठीक 12 दिन बाद यानी 7 जून को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम बिल्कुल उसी नाम पर टूट पड़ती है और एक भारी-भरकम राशि के साथ 'कार्रवाई' का सूपड़ा साफ करती है। ### क्रोनोलॉजी समझिए: जब टीवी डिबेट बनी 'असाइनमेंट शीट' राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि दीवारों के भी कान होते हैं, लेकिन यहाँ तो टेलीविजन का पर्दा चीख-चीख कर कह रहा था। आइए इस अद्भुत टाइमलाइन पर एक नज़र डालते हैं: | तारीख | घटनाक्रम | मुख्य किरदार | | :--- | :--- | :--- | | **27 मई** | लाइव टीवी डिबेट में नाम का खुलासा, सबूतों का ज़िक्र | कांग्रेस प्रवक्ता भीमराज जाखड़ | | **बीच के 12 दिन** | गहरी नींद, महा-विश्राम और 'सब चंगा सी' का भाव | कृषि मंत्रालय एवं थिंक टैंक | | **7 जून** | एसीबी की धमाकेदार एंट्री, भारी रकम बरामद | जुगल किशोर बिश्नोई (आरोपी) | ### "तिल बराबर भी भूमिका हुई तो इस्तीफा दे दूंगा..." मामला गरमाते ही हमारे 'डेयरिंग' कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा साहब ने अपनी चिर-परिचित आक्रामक शैली में सफाई पेश कर दी है। उन्होंने साफ कहा कि— *"अगर इस पूरे झमेले में मेरी तिल मात्र भी भूमिका निकली, तो मैं सीधे जेल जाने और इस्तीफा देने को तैयार हूँ।"* बाबा की इस ईमानदारी पर किसी को शक नहीं है, लेकिन सवाल तो यह उठता है बाबा कि: > "अगर आपके आसपास के लोग आपके ही विभाग में 'धोती में से घी' निकाल रहे थे, और टीवी पर नाम आने के बाद भी आपको भनक नहीं लगी... तो आपका वो विश्वप्रसिद्ध 'खुफिया तंत्र' उस वक्त कौन सा रील्स देख रहा था?" > ### डेयरिंग या डफर? राजनीति का 'ब्लाइंड स्पॉट' किरोड़ी लाल मीणा राजस्थान की राजनीति के वो कद्दावर नेता हैं जो पत्ता हिलने पर भी हवा का रुख भांप लेते हैं। उनके संबंध बीजेपी से लेकर कांग्रेस तक इतने मधुर हैं कि विपक्ष भी अब इस मुद्दे पर 'मौन व्रत' धारण कर चुका है। राजनीति में ये गुप्त समझौते बड़े कमाल के होते हैं—बयान देखकर ही समझ आ जाता है कि पर्दे के पीछे 'फेविकोल का मजबूत जोड़' लग चुका है। लेकिन असली पेच तो जनता के दिमाग में फंसा है: * **विकल्प A (एक्स्ट्रा डेयरिंग):** आपको सब पता था, लेकिन आपको लगा कि "अरे, अपना क्या बिगाड़ लेगा कोई!" * **विकल्प B (परम अज्ञान):** टीवी पर आपके विभाग के भ्रष्टाचार की स्क्रिप्ट पढ़ी जा रही थी और आप आंखें मूंदकर 'अरण्य रोदन' में व्यस्त थे। गलत लोगों को बगल में बिठाने का किराया बहुत भारी होता है मंत्री जी! जब पूरा राजस्थान जान चुका था कि दाल में कुछ काला है, तब आपका आंखें बंद रखना यह साबित करता है कि या तो सिस्टम आपसे ऊपर चल रहा है, या फिर आप सिस्टम को 'ओवरकॉन्फिडेंस' की घुट्टी पिला चुके थे। खैर, एसीबी की कार्रवाई की गूंज बहुत तेज है, और अब जनता इस लाइव डिबेट के 'प्रीक्वेल' और 'सीक्वल' को देखकर मुस्कुरा रही है। देखना दिलचस्प होगा कि इस 'पिक्चर' का क्लाइमेक्स क्या होता है! Part 6

Pilibanga, Hanumangarh | Jun 10, 2026

‘#भविष्यवक्ता_कांग्रेस, ‘#अंतर्यामीएसीबी और ‘#अंधेरी_नगरी’ के #बेफिक्र_राजा किरोड़ी बाबा!** जयपुर/राजस्थान :- #लालबहादुर_भाखर:- राजस्थान की राजनीति में इन दिनों भविष्यवाणियां नक्षत्र देखकर नहीं, बल्कि टीवी स्टूडियो में बैठकर की जा रही हैं। मामला ही कुछ ऐसा है कि अच्छे-अच्छे राजनीतिक पंडित भी अपना सिर खुजलाने पर मजबूर हैं। 27 मई को जब पूरा देश भीषण गर्मी से तप रहा था, तब NDTV Rajasthan के लाइव स्टूडियो में कांग्रेस के प्रवक्ता भीमराज जाखड़ एक अलग ही 'तापमान' बढ़ा रहे थे। उन्होंने सरेआम, डंके की चोट पर एक नाम लिया— **जुगल किशोर बिश्नोई**। आरोप? खाद-बीज की दुकानों और फैक्ट्रियों पर कृषि मंत्री जी के छापों के बाद होने वाला 'कथित सेटलमेंट'। अब इसे कांग्रेस की 'दिव्य दृष्टि' कहें या मंत्री जी का 'परम भोलापन', लेकिन ठीक 12 दिन बाद यानी 7 जून को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम बिल्कुल उसी नाम पर टूट पड़ती है और एक भारी-भरकम राशि के साथ 'कार्रवाई' का सूपड़ा साफ करती है। ### क्रोनोलॉजी समझिए: जब टीवी डिबेट बनी 'असाइनमेंट शीट' राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि दीवारों के भी कान होते हैं, लेकिन यहाँ तो टेलीविजन का पर्दा चीख-चीख कर कह रहा था। आइए इस अद्भुत टाइमलाइन पर एक नज़र डालते हैं: | तारीख | घटनाक्रम | मुख्य किरदार | | :--- | :--- | :--- | | **27 मई** | लाइव टीवी डिबेट में नाम का खुलासा, सबूतों का ज़िक्र | कांग्रेस प्रवक्ता भीमराज जाखड़ | | **बीच के 12 दिन** | गहरी नींद, महा-विश्राम और 'सब चंगा सी' का भाव | कृषि मंत्रालय एवं थिंक टैंक | | **7 जून** | एसीबी की धमाकेदार एंट्री, भारी रकम बरामद | जुगल किशोर बिश्नोई (आरोपी) | ### "तिल बराबर भी भूमिका हुई तो इस्तीफा दे दूंगा..." मामला गरमाते ही हमारे 'डेयरिंग' कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा साहब ने अपनी चिर-परिचित आक्रामक शैली में सफाई पेश कर दी है। उन्होंने साफ कहा कि— *"अगर इस पूरे झमेले में मेरी तिल मात्र भी भूमिका निकली, तो मैं सीधे जेल जाने और इस्तीफा देने को तैयार हूँ।"* बाबा की इस ईमानदारी पर किसी को शक नहीं है, लेकिन सवाल तो यह उठता है बाबा कि: "अगर आपके आसपास के लोग आपके ही विभाग में 'धोती में से घी' निकाल रहे थे, और टीवी पर नाम आने के बाद भी आपको भनक नहीं लगी... तो आपका वो विश्वप्रसिद्ध 'खुफिया तंत्र' उस वक्त कौन सा रील्स देख रहा था?" ### डेयरिंग या डफर? राजनीति का 'ब्लाइंड स्पॉट' किरोड़ी लाल मीणा राजस्थान की राजनीति के वो कद्दावर नेता हैं जो पत्ता हिलने पर भी हवा का रुख भांप लेते हैं। उनके संबंध बीजेपी से लेकर कांग्रेस तक इतने मधुर हैं कि विपक्ष भी अब इस मुद्दे पर 'मौन व्रत' धारण कर चुका है। राजनीति में ये गुप्त समझौते बड़े कमाल के होते हैं—बयान देखकर ही समझ आ जाता है कि पर्दे के पीछे 'फेविकोल का मजबूत जोड़' लग चुका है। लेकिन असली पेच तो जनता के दिमाग में फंसा है: * **विकल्प A (एक्स्ट्रा डेयरिंग):** आपको सब पता था, लेकिन आपको लगा कि "अरे, अपना क्या बिगाड़ लेगा कोई!" * **विकल्प B (परम अज्ञान):** टीवी पर आपके विभाग के भ्रष्टाचार की स्क्रिप्ट पढ़ी जा रही थी और आप आंखें मूंदकर 'अरण्य रोदन' में व्यस्त थे। गलत लोगों को बगल में बिठाने का किराया बहुत भारी होता है मंत्री जी! जब पूरा राजस्थान जान चुका था कि दाल में कुछ काला है, तब आपका आंखें बंद रखना यह साबित करता है कि या तो सिस्टम आपसे ऊपर चल रहा है, या फिर आप सिस्टम को 'ओवरकॉन्फिडेंस' की घुट्टी पिला चुके थे। खैर, एसीबी की कार्रवाई की गूंज बहुत तेज है, और अब जनता इस लाइव डिबेट के 'प्रीक्वेल' और 'सीक्वल' को देखकर मुस्कुरा रही है। देखना दिलचस्प होगा कि इस 'पिक्चर' का क्लाइमेक्स क्या होता है! Part 7 - Pilibanga News