दिल्ली। जंतर-मंतर पर पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक का अनशन बुधवार को 18वें दिन में प्रवेश कर गया। आंदोलन के समर्थकों का कहना है कि इतने लंबे समय के बाद भी केंद्र सरकार की ओर से कोई ठोस पहल या आधिकारिक संवाद सामने नहीं आया है, जिससे सरकार की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि यदि सरकार छात्रों और आम जनता की आवाज़ का जवाब देने में असफल रहती है, तो संबंधित मंत्री की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में मंत्री के लिए अपने पद पर बने रहने का नैतिक आधार कमजोर पड़ जाता है।
समर्थकों ने यह भी कहा कि यदि लंबे अनशन के दौरान सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को कोई गंभीर क्षति पहुँचती है या कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी नैतिक और राजनीतिक जिम्मेदारी केंद्र सरकार, संबंधित मंत्रालय और सरकार के नेतृत्व पर होगी। उनका कहना है कि सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि इतने लंबे समय तक चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन