जगाधरी, हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया, जिसके दौरान परम पूजनीय दिव्य गुरु आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री नीलम भारती जी ने गुरु सेवा का महत्व समझाते हुए कहा कि गुरु वह शक्ति है जो साधारण से दिखने वाले नरेंद्र को स्वामी विवेकानंद, मुकुंद लाल घोष को योगानंद परम हंस और एक दासी पुत्र को चंद्रगुप्त मौर्य बनाने का सामर्थ्य रखती है परन्तु मनुष्य को अपना मिथ्या अहंकार त्याग कर गुरु की शरण में जाने से ही उनके महत्व का ज्ञान होता है क्योंकि गुरुदेव स्वयं वे कल्पवृक्ष हैं जो अपनी शरण में आने वाले की लौकिक आलौकिक सभी इच्छाओं की पूर्ति कर देते हैं किन्तु इसके लिए शिष्य को निरंतर सत्संग सेवा साधना सुमिरन को जीवन में उतारना होगा। साध्वी जी ने बताया कि गुरु सेवा केवल बाहरी कार्यों तक सीमित नहीं है अपितु यह शिष्य के अंतःकरण को निर्मल बनाने और उसके अहंकार का क्षय करने का दिव्य साधन है। जब शिष्य तन, मन और धन से निष्काम भावपूर्वक गुरु की सेवा करता है, तब उसका जीवन ईश्वरीय कृपा का पात्र बनने लगता है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में गुरु को साक्षात् परमात्मा का स्वरूप माना गया है। गुरु ही वह दिव्य शक्ति हैं जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाती है किन्तु गुरु की वास्तविक सेवा केवल उनके आश्रम या कार्यों में सहयोग देना ही नहीं अपितु उनके द्वारा प्रदत्त दिव्य ब्रह्म ज्ञान को अपने जीवन में धारण करना, उनके आदर्श के अनुकूल आचरण करना तथा मानवता की सेवा में स्वयं को समर्पित करना ही गुरु की वास्तविक सेवा है। साध्वी जी ने आगे कहा कि जिस प्रकार एक बीज उपजाऊ भूमि में पड़कर विशाल वृक्ष बनता है, उसी प्रकार गुरु की सेवा और उनके दिव्य आदर्शों में ढलकर शिष्य का व्यक्तित्व आध्यात्मिक रूप से विकसित होता है। गुरु सेवा से मन में विनम्रता, धैर्य, श्रद्धा, समर्पण और प्रेम जैसे दिव्य गुणों का विकास होता है। यह सेवा किसी प्रतिफल की अपेक्षा से नहीं, बल्कि कृतज्ञता और प्रेम से की जानी चाहिए। ऐसे निष्काम सेवा भाव से ही ईश्वर की कृपा सहज रूप से प्राप्त होती है। उन्होंने संगत को प्रेरित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में जब मनुष्य तनाव, अशांति और स्वार्थ से घिरा हुआ है, तब गुरु की शरण और गुरु सेवा ही जीवन को सही दिशा, स्थायी आनंद और आत्मिक शांति प्रदान कर सकती है। गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही मनुष्य अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त कर सकता है। सत्संग कार्यक्रम के अंत में साध्वी बहनों ने सुमधुर भजनों का गायन करके समूह संगत को कृतार्थ किया।
Ambala, Ambala | Jul 19, 2026