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अस्पतालों को PESO कंटेनर नियमों से छूट देने की मांग, IMA ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन ​विशिष्ट संवाददाता हनुमानगढ़: ​भारत सरकार द्वारा हाल ही में जारी गजट नोटिफिकेशन के तहत पेट्रोल पंपों से केवल PESO (पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन) प्रमाणित कंटेनरों में ही डीजल या अन्य ईंधन देने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार के इस फैसले के बाद अब चिकित्सा क्षेत्र में एक नया संकट खड़ा हो गया है। ​इस गंभीर समस्या को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के स्थानीय अध्यक्ष डॉ. एस. एस. गेट और डॉ. निशांत बत्रा ने जिला कलेक्टर से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपकर इस नियम से स्वास्थ्य सेवाओं को मुक्त रखने की मांग की। ​मरीजों की जान पर बन सकती है आफत: IMA ​कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में डॉक्टरों ने बताया कि वर्तमान में बाजार में PESO प्रमाणित कंटेनरों की उपलब्धता न के बराबर है। अस्पतालों और क्लीनिकों में बिजली कटौती के दौरान आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं जारी रखने के लिए जनरेटर का उपयोग किया जाता है, जिसके लिए नियमित रूप से डीजल की आवश्यकता होती है। ​"यदि PESO कंटेनर न होने के कारण अस्पतालों को डीजल मिलना बंद हो गया, तो जनरेटर ठप हो जाएंगे। इससे न केवल अस्पताल के संचालन में व्यवधान आएगा, बल्कि आईसीयू, वेंटिलेटर और ऑपरेशन थिएटर में भर्ती गंभीर मरीजों की जान को भी बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। यह स्थिति किसी बड़ी इमरजेंसी को निमंत्रण दे सकती है।" — डॉ. एस. एस. गेट, अध्यक्ष, IMA ​प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप की मांग ​डॉ. निशांत बत्रा ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं सीधे तौर पर मानव जीवन से जुड़ी हैं, इसलिए इन्हें इस कड़े नियम के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए। IMA ने जिला कलेक्टर के माध्यम से सरकार और प्रशासनिक स्तर पर निम्नलिखित मांगें रखी हैं: ​स्वास्थ्य सेवाओं को छूट: अस्पतालों और डॉक्टरों को आपातकालीन स्थिति में PESO कंटेनर के अलावा अन्य सुरक्षित कंटेनरों में भी डीजल ले जाने की विशेष अनुमति दी जाए। ​पेट्रोलियम संगठनों को निर्देश: स्थानीय प्रशासन द्वारा पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन को तुरंत निर्देशित किया जाए कि वे अस्पतालों के अधिकृत पत्रों (Letterhead) के आधार पर ईंधन की आपूर्ति न रोकें। ​वैकल्पिक व्यवस्था: जब तक PESO कंटेनर आसानी से बाजार में उपलब्ध नहीं हो जाते, तब तक चिकित्सा संस्थानों के लिए एक शिथिल व्यावहारिक व्यवस्था लागू की जाए। ​जिला कलेक्टर ने डॉक्टरों की इस व्यावहारिक समस्या को बेहद संवेदनशील मानते हुए उचित कदम उठाने और संबंधित पेट्रोलियम अधिकारियों से बात कर बीच का रास्ता निकालने का आश्वासन दिया है।

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