सुप्रीम कोर्ट में 35 साल पुराने लोन मामले की सुनवाई के दौरान बैंक की रिकवरी प्रक्रिया से जुड़ा चौंकाने वाला मामला सामने आया। कोर्ट को पता चला कि करीब **50 लाख रुपये की देनदारी** वसूलने के लिए दो आरोपियों की संपत्तियां साल 2010 में कुल **3.6 करोड़ रुपये** में नीलाम की गई थीं।
एक संपत्ति से बैंक को 1.2 करोड़ रुपये मिले, जिसमें से 16.4 लाख रुपये लोन और ब्याज में समायोजित किए गए। दूसरी संपत्ति 2.8 करोड़ रुपये में बिकी और करीब 40 लाख रुपये बैंक की देनदारी में लगाए गए। इसके बाद **3 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त रकम बैंक के पास बची रही**, जिसे कानूनी वारिसों को नहीं लौटाया गया।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने जीवित बचे आरोपी बैंक मैनेजर को बरी करते हुए मामले को मनगढ़ंत बताया और बैंक से नीलामी की रकम से जुड़े रिकॉर्ड मांगे। कोर्ट अब यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अतिरिक्त रकम संबंधित कानूनी वारिसों तक पहुंचे। मामले की अगली सुनवाई **5 अक्टूबर** को होगी।