
दिल्ली होटल अग्निकांड: अस्पताल में जिंदगी से जूझ रहे बुजुर्ग, आग ने पूरा परिवार छीन लिया
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे बी एंड बी होटल में लगी भीषण आग ने एक पूरे परिवार को खत्म कर दिया। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की लापरवाही और सरकारी सिस्टम की नाकामी की दर्दनाक तस्वीर बनकर सामने आया है।
80 वर्षीय राधेश्याम अग्रवाल दिल्ली के एक अस्पताल में फेफड़ों की गंभीर बीमारी का इलाज करा रहे थे। उनकी देखभाल के लिए गुरुग्राम से आया पूरा परिवार होटल में ठहरा हुआ था। लेकिन 3 जून की सुबह लगी आग ने सबकुछ खत्म कर दिया।
हादसे में उनके बेटे विवेक अग्रवाल, बहू तरजनी अग्रवाल, पत्नी, पोतियां जीविषा उर्फ एंजल और वार्या उर्फ पर्ल समेत परिवार के आठ लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस भीषण अग्निकांड में कुल 21 लोगों ने जान गंवाई।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर राजधानी दिल्ली में बिना पर्याप्त फायर सेफ्टी इंतजामों के होटल कैसे चल रहे हैं? क्या प्रशासन सिर्फ हादसे के बाद जांच और कार्रवाई की औपचारिकता निभाने के लिए बचा है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई छोटे होटल और गेस्ट हाउस नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे हैं। फायर एग्जिट, अलार्म सिस्टम और आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित हैं। लेकिन जिम्मेदार विभागों की आंखें तब खुलती हैं जब मासूम जिंदगियां आग में जलकर खत्म हो जाती हैं।
एक तरफ अस्पताल में भर्ती बुजुर्ग अपने इलाज के लिए संघर्ष कर रहे हैं, दूसरी तरफ उन्हें यह भी नहीं पता कि उनका पूरा परिवार अब इस दुनिया में नहीं रहा। यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही का भयावह चेहरा है।
दिल्ली जैसे महानगर में अगर होटल सुरक्षा का यही हाल है, तो आम लोगों की जान आखिर कितनी सुरक्षित है?