
NDA में 16 दिन... फिर तिरंगे में घर लौटा बेटा
उन्नाव के 17 वर्षीय कैडेट अभिनव बाजपेई को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई, पिता बोले— "देश सेवा का सपना पूरा करना मेरी सबसे बड़ी भूल बन गया"
उन्नाव। देश की रक्षा का सपना लेकर राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) पहुंचे उन्नाव के शुक्लागंज निवासी 17 वर्षीय कैडेट अभिनव बाजपेई की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। महज 16 दिन पहले घर से विदा हुआ बेटा रविवार को तिरंगे में लिपटकर लौटा तो शुक्लागंज की गलियां सिसक उठीं। सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया, अंतिम सलामी दी और मिश्रा कॉलोनी मुक्तिधाम घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया, जब पिता प्रदीप बाजपेई ने कांपते हाथों से इकलौते बेटे को मुखाग्नि दी। आंखों से बहते आंसुओं के बीच उन्होंने कहा— "बेटे का सपना पूरा करना मेरी सबसे बड़ी भूल बन गया... मेरा सब कुछ छिन गया।"
पहली पीटी परेड बनी आखिरी सफर
अभिनव 22 जून को घर से पुणे के लिए रवाना हुए थे और 24 जून को खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में रिपोर्ट किया था। परिवार के सपनों को नई उड़ान देने वाला यह होनहार कैडेट प्रशिक्षण की शुरुआत ही कर पाया था कि 10 जुलाई को पहली आधिकारिक पीटी परेड के दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। एनडीए के अनुसार उन्होंने बेचैनी की शिकायत की और कुछ ही देर बाद बेहोश होकर गिर पड़े। उन्हें तत्काल मिलिट्री अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
प्रारंभिक तौर पर हार्ट अटैक की आशंका जताई गई है, हालांकि मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम, विसरा जांच और कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही होगा।
तिरंगे में लिपटा बेटा... बेसुध हुआ परिवार
रविवार सुबह पार्थिव शरीर लखनऊ पहुंचने के बाद सेना की टुकड़ी उसे सड़क मार्ग से शुक्लागंज स्थित आवास लेकर पहुंची। तिरंगे में लिपटे बेटे को देखते ही मां सीमा बाजपेई, बहन अंशिका, दादी और परिजन बिलख पड़े। अंतिम दर्शन के लिए लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। हर आंख नम थी और हर जुबान पर एक ही सवाल था— आखिर इतनी कम उम्र में ऐसा कैसे हो गया?
पहले ही प्रयास में NDA, वर्दी पहनने का था जुनून
केंद्रीय विद्यालय कैंट, कानपुर से इंटरमीडिएट पास करने वाले अभिनव ने पहले ही प्रयास में एनडीए जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा उत्तीर्ण की थी। पिता चाहते थे कि बेटा डॉक्टर बने, लेकिन अभिनव का सपना सेना में अधिकारी बनकर देश की सेवा करना था।
पिता बताते हैं कि वह स्वयं बेटे को पुणे छोड़ने गए थे। आखिरी बातचीत में अभिनव ने कहा था— "पापा, चिंता मत करना... ट्रेनिंग कठिन है, लेकिन मुझे मजा आ रहा है।" किसी को अंदाजा नहीं था कि यही उनकी आखिरी बातचीत होगी।
सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई
रविवार दोपहर मिश्रा कॉलोनी मुक्तिधाम घाट पर सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर और अंतिम सलामी देकर अभिनव को विदाई दी। पूरा वातावरण "भारत माता की जय" और "अमर रहे" के नारों के बीच गमगीन रहा।
अब जांच पर टिकी निगाहें
अभिनव की मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, विसरा जांच और एनडीए द्वारा गठित कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के बाद ही यह तय होगा कि प्रशिक्षण के दौरान आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां बनीं, जिनमें देश सेवा का सपना देखने वाले एक होनहार कैडेट की जिंदगी थम गई।
प्रदेश भर में इस घटना ने युवाओं, अभिभावकों और पूर्व सैनिकों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक परिवार ने अपना इकलौता बेटा खोया है, जबकि देश ने एक संभावित सैन्य अधिकारी। अभिनव की अधूरी वर्दी और अधूरा सपना अब हमेशा के लिए तिरंगे की यादों में दर्ज हो गया।
Unnao, Unnao | Jul 12, 2026